राज्यसभा में टूटी मर्यादा:VIDEO में सदन में हाथापाई करते दिखे मार्शल-सांसद; सिक्योरिटी अधिकारियों ने कहा- सांसदों का बर्ताव बहुत आक्रामक था

नई दिल्ली4 महीने पहले
तस्वीरेंं राज्यसभा की हैं, जहां मानसून सेशन के दौरान बुधवार को हंगामा हुआ। जब मार्शल बुलाए गए तो उनके और सांसदों के बीच धक्का-मुक्की हो गई।

हंगामे के चलते राज्यसभा अनिश्चितकाल तक स्थगित होने के अगले दिन गुरुवार को सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच मार्शल बुलाने पड़ गए थे। इसी को लेकर गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 15 विपक्षी दलों के साथ संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला। आरोप लगाया कि सरकार ने सदन में लोकतंत्र की हत्या की।

इसके बाद देर शाम संसद में तैनात सिक्योरिटी अधिकारियों का बयान सामने आया। उन्होंने बताया कि सांसदों का बर्ताव बेहद आक्रामक था। सिक्योरिटी असिस्टेंट अक्षिता भट ने बताया कि कुछ पुरुष सांसद जो प्रदर्शन में शामिल थे, मेरी तरफ दौड़े और सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि जब मैंने इसका विरोध किया, तो सांसद छाया वर्मा और फूलो देवी नेताम एक तरफ हट गईं और पुरुष सांसदों को वेल तक पहुंचने का का रास्ता दिया। अक्षिता ने कहा कि दोनों महिला सांसदों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने में साथी पुरुष सांसदों की मदद की। उन्होंने जबरदस्ती मेरी बांहें पकड़ ली और मुझे घसीटा।

मेरी गर्दन पकड़ी, कुछ पल के लिए घुटन हुई: सुरक्षा अधिकारी
सिक्योरिटी अधिकारी राकेश नेगी ने बताया कि 11 अगस्त को मुझे राज्यसभा में मार्शल ड्यूटी के लिए तैनात किया गया था। इस दौरान सांसद एलमारन करीम और अनिल देसाई ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। सांसद एलमारन करीम ने मेरी गर्दन पकड़ ली और मुझे सुरक्षा घेरे से दूर करने लगे। इससे मुझे कुछ पल के लिए घुटन होने लगी।

सरकार के मंत्रियों ने विपक्ष को घेरा
दोपहर में सरकार के 8 मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और विपक्ष के हर आरोप का सिलसिलेवार ढंग से जवाब दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी, सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अलावा मुख्तार अब्बास नकवी, धर्मेंद्र प्रधान, अनुराग ठाकुर, अर्जुन मेघवाल और वी मुरलीधरन यानी 8 मंत्रियों ने 48 मिनट तक जवाब दिया।

48 मिनट में सरकार के विपक्ष पर 8 बड़े हमले
1.
संसद में मानसून सत्र के दौरान विपक्ष के अलोकतांत्रिक और हिंसक व्यवहार ने भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय की कहानी लिखी।

2. सरकार ने कई मौकों पर विपक्ष को चर्चा करने का प्रस्ताव भेजा, लेकिन हर बार हमारी अपील को सुना नहीं गया।

3. विपक्ष का चर्चा में कोई इंट्रेस्ट नहीं था और उन्होंने पहले से ही तय कर रखा था कि संसद को बाधित करना है।

4. विपक्षी सदस्यों का दुर्व्यवहार भारत के संसदीय इतिहास के लिए शर्मनाक है और उन्हें देश से इसके लिए माफी जरूर मांगनी चाहिए।

5. शर्मनाक और रुकावट डालने वाले व्यवहार के लिए विपक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं।

6. पूरे देश ने संसद में विपक्ष का ड्रामा देखा है। विपक्ष ये पचा नहीं पा रहा है कि देश उनसे हार मान चुका है। माई वे या हाईवे वाली सोच की निंदा करते हैं। देश भी इस तरह की सोच की निंदा करता है।

7. राहुल गांधी कहते हैं कि ये देश में लोकतंत्र की हत्या है। राष्ट्र देख रहा है कि उन्होंने संसद में क्या किया। अगर उन्हें अपनी जिम्मेदारी का जरा सा भी अहसास है तो उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। सभापति भी इस पर सख्त एक्शन लें ताकि इस तरह की हरकतें दोहराई न जाएं।

8. विपक्ष ने आम जनता और टैक्स देने वालों की फिक्र नहीं की। घड़ियाली आंसू बहाने की जगह विपक्ष को देश से माफी मांगनी चाहिए।

सरकार के 3 मंत्रियों के तल्ख बयान
संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी
ने कहा- हमने विपक्ष से सहयोग की मांग की थी। बिल पास कराने के लिए भी साथ मांगा था, हम तो चाहते थे कि संसद सोमवार तक चले, पर ऐसा नहीं हुआ। लोकतंत्र की हत्या की बात करने वाले राहुल को देश से माफी मांगनी चाहिए। वो जानते हैं कि उन्होंने क्या किया है। टेबल पर चढ़कर सांसदों ने उपद्रव किया। महिला मार्शलों को चोट पहुंचाई गई। विपक्ष का तो एजेंडा ही यही था कि हंगामा करना है।

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- विपक्ष ने सदन की गरिमा को गिरा दिया है। कोई मंत्री जवाब दे रहा है तो उसके हाथ से जवाब छीन लिया गया। जब विपक्ष से कहा कि माफी मांगिए तो उससे भी साफ इनकार कर दिया। वेल में जबरदस्ती घुसने की कोशिश की। मार्शल बुलाए तो उनसे धक्का मुक्की की गई। शीशा तोड़ा और ये शीशा महिला मार्शल को लगा। उसे चोट पहुंची है और ये दुखद है। एक रूल बुक चेयर की तरफ फेंक दी गई। अगर चेयर पर कोई होता तो वो बुरी तरह घायल हो जाता। ये हमला था। अब विपक्ष निराधार आरोप लगा रहा है ताकि मुद्दे से भटका सके और उस पर एक्शन न हो।

सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा- मानसून सेशन के दौरान सड़क से संसद तक अराजकता फैलाना ही विपक्ष का एकमात्र एजेंडा रहा है। जनता इंतजार करती रही कि उनके मुद्दे संसद में उठाए जाएंगे, इसके बावजूद विपक्ष का यही अराजक रवैया जारी रहा। विपक्ष को लोगों की, टैक्स भरने वालों की फिक्र नहीं है। जो भी हुआ, वो निंदनीय है। घड़ियाली आंसू बहाने के बजाय विपक्ष को पूरे देश में माफी मांगनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने नए मंत्रियों से कहा था कि राज्यसभा जाएं और वहां पर बहस को ध्यान से सुनें। हमें नए मंत्रियों से पता चला कि मेजों पर तो डांस किया जा रहा था, वो पूछ रहे थे कि इन मेजों का दूसरा कोई इस्तेमाल भी है?

विपक्ष ने लगाए सरकार पर आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि हमने पेगासस का मुद्दा उठाया। हमें संसद में नहीं बोलने दिया गया। राज्यसभा में पहली बार सांसदों की पिटाई की गई।

राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि उन्होंने अपने संसदीय जीवन में इस तरह की शर्मनाक घटना कभी नहीं देखी।

सपा नेता विशंभर निषाद ने कहा कि हमारी महिला सांसदों से धक्का-मुक्की की गई।

राजद नेता मनोज झा ने कहा कि इंश्योरेंस बिल संसद ने नहीं पास किया, मार्शल लॉ ने पास किया है।

DMK ने कहा- संसद की ऐसी तस्वीर कभी नहीं देखी। हमारी महिला सांसदों को घसीटा गया।

विपक्ष ने मार्च निकाला
बुधवार को सदन में हुई धक्का-मुक्की के विरोध में विपक्षी नेताओं ने गुरुवार को मार्च निकाला। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि उन पर सदन में मार्शलों से हमला करवाया गया। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है, जब सदन में सांसदों की पिटाई हुई है। वहीं, DMK ने कहा कि हमारी महिला सांसदों के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

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