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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष:आचार्य बालकृष्ण और डॉ. नरेश त्रेहन से जानिए कोरोना की नई लहर में स्वस्थ रहने के खास टिप्स, दोनों योग-प्राणायाम पर एकमत

9 दिन पहलेलेखक: रवि यादव
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आज विश्व स्वास्थ्य दिवस है। पूरा देश कोरोना की दूसरी बड़ी लहर का सामना कर रहा है। देश में सिर्फ 9 दिनों के भीतर एक्टिव केस दोगुने हो गए हैं। ऐसे में दैनिक भास्कर आपके लिए आयुर्वेद और एलोपैथी के दो दिग्गजों के खास टिप्स लेकर आया है। ये दिग्गज हैं पतंजलि आयुर्वेद के एमडी और सीईओ आचार्य बालकृष्ण व मेदांता मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन।

दोनों ने अपनी-अपनी पैथी की पैरवी की, लेकिन योग-प्राणायाम पर एकमत नजर आए।

आचार्य बालकृष्ण बोले- बच्चे बिना तनाव लिए एग्जाम दें। वहीं डॉ. त्रेहन का कहना है कि कोरोना का नया इन्फेक्शन दोगुनी तेजी से फैल रहा है। ये न समझें कि बच्चों को कोरोना नहीं होगा। बच्चों को जब कोरोना होता है तो बहुत भयंकर होता है।

तो आइये सबसे पहले जानते हैं कि आचार्य बालकृष्ण ने क्या कहा…

कोरोना ने उत्सव प्रेमी संस्कृति को चोट पहुंचाई तो यह भी बताया कि जिंदगी में बहुत सारे जूते-कपड़े जरूरी नहीं

आचार्य बालकृष्ण कहते हैं कि कोरोना का हमारे जीवन में हर तरह से प्रभाव पड़ा है। हमारा जो सामाजिक ताना-बाना था, उसका स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है। हम उत्सव प्रेमी लोग हैं। हमें हर उत्सव को लोगों के साथ मिलकर मनाने की आदत है। हमें भीड़ में ही आनंद आता है, लेकिन कोरोना काल ने इसे बुरी तरह प्रभावित किया है। हमारी जो साथ मिलकर रहने की संस्कृति रही है, उस पर गहरा असर पड़ा है। लेकिन इसका एक सकारात्मक पक्ष भी सामने आया है कि हमें जिंदगी जीने के लिए बहुत सारे कपड़े, कई जूते और फैशन की इतनी आवश्यकता नहीं है, जितना हम इनका संग्रह करने या जोड़ने में लगे रहते हैं।

आयुर्वेद का मतलब है- लोग बीमार ही न हों

बालकृष्ण कहते हैं कि स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं आयुर्वेद का मूल मंत्र है। आयुर्वेद में किसी बीमारी के इलाज से ज्यादा इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि लोग इतने मजबूत बनें कि बीमार ही न हों। अगर कोई भी व्यक्ति आयुर्वेद की शरण में है और उसे कोई बीमारी है तो ठीक हो जाएगी, लेकिन नहीं है तो कभी नहीं होगी।

आयुर्वेद पर भरोसा बढ़ा, प्रकृति से जुड़ना जरूरी

बालकृष्ण कहते हैं कि लोगों का आयुर्वेद पर भरोसा बढ़ने लगा है। लोग औषधि का इस्तेमाल करने लगे हैं और इस बात को बेहतर तरीके से समझने लगे हैं कि प्रकृति के पास हर चीज का इलाज है। लोग जान चुके हैं कि स्वस्थ जीवन के लिए प्रकृति से जुड़े रहना कितना जरूरी है।

तुलसी, गिलोय और अश्वगंधा से खुद को स्वस्थ रखें

स्वामी बालकृष्ण का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए ज्यादा जरूरत है मजबूत इम्यूनिटी की। इसके लिए रोज योगासन और प्राणायाम करें। साथ ही तुलसी, गिलोय और अश्वगंधा का सेवन भी जरूर करना चाहिए।

स्ट्रेस और डिप्रेशन से बचाएगा प्राणायाम और योग

स्वामी बालकृष्ण ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान एक रिसर्च सामने आई जिसके अनुसार घरों में बंद लोग मानसिक तनाव या डिप्रेशन का शिकार हुए। नौकरीपेशा लोगों की नौकरी चली गई तो वे तनाव में आ गए। बिजनेसमैन का धंधा ठप हो गया तो वे भी डिप्रेशन में चले गए।

लोग कोरोना के डर के कारण भी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं कि कहीं उन्हें भी न हो जाए। इन सभी लोगों से निवेदन है कि वे योग करें, प्राणायाम करें, जिससे दिमाग शांत होगा।

धंधे को लेकर परेशान न रहें, खुद पर करें भरोसा

काम-धंधे को लेकर लोग परेशान न हों, जिस तरह से उन्होंने पहले इसे हासिल किया, वैसे ही आने वाले समय में लोग अपनी काबिलियत से इसे फिर से हासिल करेंगे। हर व्यक्ति को खुद पर विश्वास रखने की जरूरत है, सभी के पास इतना सामर्थ्य है कि सकारात्मकता के साथ प्रयास करेंगे तो ये सब दोबारा हासिल कर लेंगे।

मेडिटेशन करें और पसंदीदा मंत्र का जाप करें

स्वामी बालकृष्ण कहते हैं कि आयुर्वेद में तनाव दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है मेडिटेशन। अपना ध्यान केंद्रित करें और पसंदीदा मंत्र का जाप करें, इससे तनाव कम होगा।

बादाम-अखरोट और काली मिर्च खाएं

आचार्य की सलाह है कि रोज बादाम और अखरोट को भिगोकर दो-तीन काली मिर्च के साथ पीसकर खाएं, इससे मानसिक ताकत मिलेगी।

नाक में डालें गाय का घी

आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि बादाम-अखरोट और काली मिर्च के साथ ही रोज दो बूंद गाय का घी नाक में डालें और अश्वगंधा खाएं, इससे मानसिक तनाव दूर होगा।

बड़े बुजुर्ग सुबह-शाम योग करें

बालकृष्ण ने भारत के सभी बुजुर्गों से निवेदन किया है कि सुबह-शाम योग और प्राणायाम जरूर करें। खाने का ध्यान रखिये, जितना हो सके सादा और हेल्दी खाना ही खाएं। घर के सभी सदस्य बुजुर्गों का खास ख्याल रखें।

बच्चे शांत दिमाग से करेंगे परीक्षा की तैयारी तो याद्दाश्त बढ़ेगी

बालकृष्ण ने बच्चों से आग्रह किया है कि एग्जाम की तैयारी रिलेक्स होकर करें। कई बार बच्चों को बहुत सारी बातें पता होती हैं, लेकिन तनाव में आकर वो सब कुछ भूल जाते हैं। इसलिए सबसे पहले दिमाग को रिलैक्स करें, शांत रखें।

  • मन और दिमाग जितना शांत रहेगा, याद्दाश्त उतनी ज्यादा होगी। पढ़ी हुई चीजें लंबे समय तक याद रहेंगी।
  • घबराएं बिल्कुल नहीं, धैर्य के साथ पढ़ाई करें। व्यक्ति का पूरा जीवन ही परीक्षा की तरह है, इसलिए डरे नहीं।

स्वामी बालकृष्ण ने विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर लोगों को संदेश दिया है कि योग और आयुर्वेद के माध्यम से इस धरती को रोग मुक्त बनाने में अपना योगदान दें।

मेदांता के डॉ. त्रेहन ने चेताया- इस बार दोगुनी तेजी से फैल रहा कोरोना, ज्यादा सावधान रहें बच्चे

दिल्ली के करीब गुड़गांव में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल मेदांता के एमडी और चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन का कहना है कि पिछले दिनों लोग रिलैक्स हो गए थे। नया कोरोना वायरस पहले से दोगुनी स्पीड से फैल रहा है। यह इन्फेक्शन इतनी तेजी से आया है कि सबको लपेट सकता है। इसलिए सबको चौकन्ना रहना होगा।

दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में उन्होंने चेताया कि याद रखें बच्चों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। यह नहीं सोचना चाहिए कि वे बच्चे हैं तो कोरोना नहीं होगा। जिन बच्चों को कोरोना हो रहा है, वह बहुत ही भयंकर है।

बच्चे घर से बाहर निकलें तो डिस्टेंसिंग, मास्क और हैंड हाइजीन का पूरा ख्याल रखें। यह नहीं कि दोस्तों से बात कर रहे हैं तो उन्हें गले लगाएं। उनसे हाथ मिलाएं या मास्क उतारकर बात करने लगें। बच्चों में यह आम आदत है।

सीनियर सिटीजन को अपना खास ख्याल रखना होगा। उन्हें बिना मास्क के किसी के करीब नहीं जाना चाहिए। हैंड हाइजीन और डिस्टेंसिंग पर सख्ती से अमल करना होगा।

पहला काम कोरोना से बचना, तीन तरीके- न्यूट्रिशन, एक्सरसाइज और योग-प्राणायाम

डॉ. त्रेहन का कहना है कि इस समय लोगों की पहली प्राथमिकता खुद को कोरोना से बचाना होना चाहिए। सबको कोरोना से लड़ाई लड़नी है। इसके लिए तीन प्रिवेंशन हैं- डिस्टेंसिंग, मास्क और हैंड हाइजीन, इनका बहुत अच्छी तरह पालन करें।

उनका कहना है कि कोरोना के इस दौर में खुद को स्वस्थ रखने के तीन तरीके हैं। न्यूट्रिशन, एक्सरसाइज और योग-प्राणायाम। जो लोग घर पर ही हैं, उन्हें भी एक्सरसाइज करना चाहिए। रोज कम से कम 30 से 40 मिनट। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी। योग प्राणायाम से इम्यूनिटी बढ़ने के साथ न केवल मेंटल स्ट्रेस कम होगा बल्कि उससे आप बचे भी रहेंगे।

एलोपैथी ने लाखों कोरोना मरीजों की जान बचाई, अब वैक्सीन की बारी

उनका दावा है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एलोपैथी ने बड़ी भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि एलोपैथी की एंटीवायरल और दूसरी दवाओं ने ही लाखों लोगों की जान बचाई है। वहीं कोरोना वैक्सीन आने वाले समय में लोगों की कोरोना से बचाएगी। डॉ. त्रेहन बोले, "विश्व स्वास्थ्य दिवस पर यही कहना चाहूंगा कि सभी लोग अपना ख्याल रखें। तीन चीजों पर अमल करें। अच्छी डाइट, एक्सरसाइज और योग प्राणायाम।"

बाबा रामदेव के अनुसार तीन प्राणायाम कोरोना जैसे संक्रमण से बचने में काफी कारगर हैं...

कैसे करें

  • खुली या हरियाली वाली जगह न होने पर छत, बालकनी या बड़े कमरे में योग मैट बिछा लें।
  • अब इस पर पद्मासन, अर्ध पद्मासन या सामान्य रूप से पालथी मारकर बैठ जाएं।
  • सामान्य रूप से सांस भीतर लें और पेट पर जोर देते हुए तेजी से सांस को छोड़ें।
  • इस प्रक्रिया में पेट की मांसपेशियां झटके से अंदर जानी चाहिए।
  • शुरुआत में एक मिनट में 20 बार क्रिया को दोहराएं। धीरे-धीरे इसे बढ़ाएं।
  • दिल की बीमारी, स्ट्रोक, हर्निया, स्लिप डिस्क से ग्रस्त या गर्भवती महिलाएं कपालभाति न करें।

कैसे करें

  • इसे सामान्य, मध्यम या तीव्र गति से कर सकते हैं।
  • यदि आप हायपरटेंशन, दिल की बीमारी, हर्निया, कमर दर्द या किसी तरह की कमजोरी से ग्रस्त हैं तो धीमी या मध्यम गति से भस्त्रिका प्राणायाम करना चाहिए।
  • सबसे पहले किसी योग मैट पर बैठ जाएं।
  • अब एक गहरी सांस लें और पेट पर जोर देते हुए सांस छोड़ें।
  • इस प्राणायाम को करीब 3-5 मिनट तक करें।
  • आप इसे सुबह और शाम दोनों समय कर सकते हैं।

कैसे करें

  • एक शांत वातावरण में योग मैट या किसी आसन पर बैठें।
  • अब अपने बाएं हाथ के अंगूठे से, बाईं नाक के छिद्र को बंद करके, दाईं नाक के छिद्र से सांस लें।
  • अब दाईं नाक के छिद्र को अपनी एक उंगली से बंद करें और बाईं नाक के छिद्र को खोलकर, इसके जरिए सांस छोड़ें।
  • दूसरी ओर से भी इस प्रक्रिया को दोहराएं।
  • रोज सुबह 5 मिनट अनुलोम-विलोम करने से कोरोना जैसे सांस से फैलने वाले संक्रमण से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।

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