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केंद्र-असम सरकार के साथ 8 आदिवासी गुटों का शांति समझौता:गृह मंत्री अमित शाह बोले- आदिवासी संगठनों के 1,100 सदस्य हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे

नई दिल्ली3 महीने पहले
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केंद्र और असम सरकार ने गुरुवार को असम के 8 विद्रोही आदिवासी संगठनों के साथ त्रिपक्षीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। दिल्ली में हुए समझौते के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिसवा सरमा भी मौजूद रहे। इस दौरान अमित शाह ने कहा कि आज आदिवासी गुटों के करीब 1,100 सदस्य हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे हैं।

जिन 8 विद्रोही आदिवासी गुटों ने सरकार के साथ समझौता किया, उनमें बिरसा कमांडो फोर्स (BCF), आदिवासी पीपुल्स आर्मी (APA), ऑल आदिवासी नेशनल लिबरेशन आर्मी (ANAL), आदिवासी कोबरा मिलिट्री (ACMA) और संथाली टाइगर फोर्स (STF) शामिल हैं। ये आदिवासी समूह 2012 यानी 10 साल पहले से ही सरकार के साथ संघर्ष विराम में हैं। सीजफायर के बाद ये सरकारी शिविरों में रह रहे हैं।

गृह मंत्री बोले- हमने मील का पत्थर पार किया

असम के 8 विद्रोही संगठनों के करीब 1100 सदस्य हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे हैं।
असम के 8 विद्रोही संगठनों के करीब 1100 सदस्य हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटे हैं।

समझौते के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि असम और पूरी उत्तर पूर्व के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। उत्तर पूर्व को शांत और विकसित बनाने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम हाथ में लिए गए हैं। आज एक बड़ा मील का पत्थर हम पार करके आगे बढ़ रहे हैं।

246 विद्रोहियों ने जनवरी में हथियार डाले थे
वहीं, CM सरमा ने कहा- इस समझौते से हमारे आदिवासी जनजाति के लोगों को सामाजिक न्याय मिलेगा, आर्थिक विकास का एक बहुत बड़ा मौका मिलेगा और साथ ही राजनीतिक अधिकार भी मिलेगा। समझौता के तहत उन्हें एक आदिवासी वेलफेयर काउंसिल मिलेगा, जिसे बजट भी दिया जाएगा। इसी साल 27 जनवरी को असम के दो उग्रवादी गुटों के 246 विद्रोहियों ने हथियार डाल दिए थे।

इन्होंने गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित एक समारोह में यूनाइटेड गोरखा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (UGPO) के 169 विद्रोहियों और तिवा लिबरेशन आर्मी (TLA) के 77 विद्रोहियों ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिसवा सरमा और DGP भास्कर ज्योति के सामने हथियार रखे थे।

आदिवासी समूह 2012 यानी 10 साल पहले से ही सरकार के साथ संघर्ष विराम में हैं। सीजफायर के बाद से ये सरकारी शिविरों में रह रहे हैं।
आदिवासी समूह 2012 यानी 10 साल पहले से ही सरकार के साथ संघर्ष विराम में हैं। सीजफायर के बाद से ये सरकारी शिविरों में रह रहे हैं।

कार्बी आंगलोंग समझौता 2021 में हुआ था
असम सरकार ने 6 विद्रोही संगठनों के साथ 4 सितंबर 2021 को कार्बी आंगलोंग समझौते पर हस्ताक्षर किया था। ये हथियारबंद समूह 30 साल से हिंसक घटनाओं में शामिल थे। इस समझौते के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मौजूद थे।

कार्बी समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले सशस्त्र समूहों में कार्बी लोंगरी नॉर्थ कछार हिल्स लिबरेशन फ्रंट (KLNLF), पीपुल्स डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी(PDCK), यूनाइटेड पीपुल्स लिबरेशन आर्मी(UPLA) , कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स (KPLT), कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स (R) और कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर्स (M) शामिल थे।

कार्बी रीजन के विकास पर 1000 करोड़ खर्च करेगी असम सरकार
अमित शाह ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया था। उन्होंने कहा था कि असम सरकार अगले 5 साल में कार्बी रीजन के विकास के लिए लगभग 1000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। नरेंद्र मोदी सरकार की पॉलिसी है कि हम अपने कार्यकाल के दौरान ही समझौते में किए गए सभी वादों को पूरा करते हैं।

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