शोध / गंगा-यमुना के पानी में बैक्टीरियोफगेस, ठीक हो सकती हैं गंभीर बीमारियां



Phages bacteria in water of Ganga-Yamuna can be cured, serious diseases
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Phages bacteria in water of Ganga-Yamuna can be cured, serious diseases

  • बीएचयू के प्राेफेसर ने रिसर्च कर तैयार किया बैक्टीरियाेफगेस काॅकटेल हीलिंग ट्रीटमेंट
  • सरकार से मेडिकल प्रैक्टिस में फगेस काॅकटेल का प्रयाेग करने की अनुमति लेने की चल रही प्रक्रिया

Dainik Bhaskar

Jul 30, 2019, 12:57 PM IST

हिसार (वैभव शर्मा). शरीर में अक्सर ऐसी बीमारियां हाे जाती हैं, जिनका उपचार एंटीबाॅयाेटिक दवाएं भी नहीं कर पाती हैं, क्याेंकि शरीर में माैजूद बैक्टीरिया एंटी बाॅयाेटिक से लड़ना भी सीख चुके हैं। ऐसे में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में वैज्ञानिक प्राे. गाेपाल नाथ ने बैक्टीरियाेफगेस काे लेकर एक हीलिंग ट्रीटमेंट तैयार किया है, जिसकी मदद से गंभीर से गंभीर राेगाें का उपचार किया जा सकता है।

 
प्राे. नाथ ने रिसर्च के दाैरान पाया कि बैक्टीरियाेफगेस यूं ताे हर जगह मिल सकते हैं, मगर इनके सबसे बड़े स्राेत देश में गंगा, यमुना, घग्घर आदि नदियां हैं। जिस नदी का पानी साफ नहीं हाेगा,वहां बैक्टीरियाेफगेस अच्छे तरह से पनप सकता है। जानवराें पर जब इस ट्रीटमेंट का प्रयाेग किया गया ताे हड्डी में नासूर जैसी बीमारियां भी ठीक हाेने लगी।


बड़े से बड़े इंफेक्शन को किया जा सकता है खत्म
प्राे. नाथ ने बताया कि कुछ प्रकार के बैक्टीरियाेफगेस ताे बर्न या इन्फेक्शन से पीड़ित मरीजाें पर आजमाए, जिसमें सफलता मिली। कुछ खरगाेश पर भी प्रयाेग किए गए। बैक्टीरियाेफगेस की मदद से बड़े से बड़े इन्फेक्शन काे खत्म किया जा सकता है। रिसर्च में डायबिटिक और नाॅन डायबिटिक दाेनाें व्यक्तियाें पर प्रयाेग किया गया। इसे अब मेडिकल साइंस में प्रयाेग किया जाए। इसके लिए सरकारी एजेंसी से अनुमति लेने की प्रक्रिया अमल में ला रहे हैं, जाे बीमारियां 5 साल से ठीक नहीं हाे रही थी उसमें भी सकारात्मक परिणाम आए।

 
दूसरे बैक्टीरिया को खाते हैं बैक्टीरियाेफगेस

बैक्टीरियाेफगेस का मतलब हाेता है, बैक्टीरिया ईटर यानि बैक्टीरिया काे खाने वाले। जहां-जहां बैक्टीरिया पाए जाते हैं वहां बैक्टीरियाेफगेस इन बैक्टीरिया काे खाने के लिए माैजूद रहते हैं। यह बैक्टीरियाेफगेस पानी, धरती, हवा में, शरीर के कई हिस्साें में सहित सभी स्थानाें पर माैजूद हैं। असान भाषा में कहें ताे जहां बैक्टीरिया है, वहां बैक्टीरियाेफगेस माैजूद हाेंगे ही। यह बैक्टीरियाेफगेस बैक्टीरिया काे मारते रहते हैं। इस प्राेसेस में कुछ बैक्टीरिया मर जाते हैं कुछ रह जाते हैं, ताे बैक्टीरियाेफगेस भी रहते हैं और बैक्टीरिया भी रहते हैं।


काॅकटेल ट्रीटमेंट 
प्राे. नाथ ने बताया कि हम संबंधित बीमारी पर असरदार रहने वाले बैक्टीरियाेफगेस काे लेकर बीमारी के स्थान पर इंजेक्ट करते हैं, जिसे हीलिंग कहा जाता है। बैक्टीरियाेफगेस इन्फेक्शन में माैजूद बैक्टीरिया काे खाने लगते हैं। कई सप्ताह से प्रतिदिन हीलिंग दी जाती है। हर दिन बीमारी में बदलाव दिखेंगे। मेरठ की एसवीबीपीयूएटी विश्वविद्याालय के पूर्व कुलपति डाॅ. गया प्रयाद बताते हैं कि जिंदा चीजाें में लाेग कहते हैं कि मच्छराें की तादाद दुनिया में सबसे ज्यादा है, मगर विश्व में सबसे अधिक संख्या इन बैक्टीरियाेफगेस की ही है। स्पेस, समुद्र और सीवरेज में सबसे अधिक बैक्टीरियाेफगेस हैं।

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