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असम में प्रधानमंत्री:मोदी ने एक लाख लोगों को जमीन के पट्टे बांटे, बोले- जमीन सिर्फ घास-मिट्टी नहीं होती, यह हमारी मां है

गुवाहाटी3 महीने पहले
PM मोदी ने असम के शिवसागर में एक लाख से ज्यादा लोगों को जमीन का पट्‌टा देने की शुरुआत की। ये लोग अब किसानों से जुड़ी योजनाओं का फायदा ले सकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को असम पहुंचे। यहां के शिवसागर जिले में उन्होंने एक लाख से ज्यादा लोगों को जमीन का पट्‌टा देने की शुरुआत की। राज्य की भाजपा सरकार ने मई 2016 से लेकर अब तक 2.28 लाख लोगों को जमीन के पट्टे बांटे हैं। राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।

कार्यक्रम के दौरान मोदी ने कहा कि हम सभी ऐसी संस्कृति के ध्वजवाहक हैं, जहां जमीन घास-मिट्टी-पत्थर के रूप में नहीं देखी जाती। हमारी जमीन हमारी मां है। भूपेन हजारिका ने कहा था- ऐ धरती माता मुझे अपने चरणों में जगह दीजिए। आपके बिना खेती करने वाला क्या करेगा। मिट्टी के बिना वो असहाय होगा।

मोदी के भाषण की चार खास बातें

1.मूल निवासियों से जुड़ने की कोशिश
असम के एक लाख से ज्यादा मूल निवासी परिवारों को जमीन का मालिकाना हक मिलने से उनके जीवन की बड़ी चिंता दूर हो गई है। आज असम की मिट्टी से प्यार करने वाले असम के मूल निवासियों के जुड़ाव को कानूनी संरक्षण दिया है। यह ऐतिहासिक काम शिवसागर के चेरंगा पठार पर हो रहा है। यह जयमती की बलिदान भूमि है।

2. पिछली सरकारों पर निशाना
असम में जब हमारी सरकार बनी, तो यहां 6 लाख मूल निवासी परिवार ऐसे थे, जिनके पास कानूनी कागजात नहीं थे। पहले की सरकारों की प्राथमिकता में ये काम नहीं था। सर्बानंद सोनोवाल की सरकार ने इस दिशा में काम किया। आज असम की सभ्यता सुरक्षित रखने के साथ भू-अधिकार कानून को संरक्षित करने का काम किया जा रहा है।

3. किसानों से जुड़ी योजनाओं का फायदा
बीते सालों में सवा दो लाख से ज्यादा मूल निवासी परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जा चुके हैं। अब इसमें एक लाख परिवार और जुड़ जाएंगे। जमीन का पट्टा मिलने से मूल निवासियों की मांग तो पूरी हुई है, साथ ही लाखों लोगों का जीवन बेहतर होने का रास्ता भी बना है। अब इन्हें भी किसान क्रेडिट कार्ड, किसान बीमा योजना और अन्य योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। ये लोग कारोबार के लिए लोन ले पाएंगे।

4. कोरोना की वैक्सीन लगवाने की अपील
असम अब स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। कोरोना को हैंडल करने के लिए यहां की जनता और सरकार को बधाई देता हूं। उम्मीद है कि वैक्सीनेशन को भी यहां अच्छे से आगे बढ़ाया जाएगा। जिसकी भी बारी आएगी, वो टीका लगवाएगा। टीके की दोनों डोज लगावाना बहुत जरूरी है। हमें टीका भी लगवाना है और सावधानी भी रखनी है।

मोदी के असम दौरे के सियासी मायने?
असम सरकार ने मोदी के हाथों एक लाख से ज्यादा स्थानीय मूल के परिवारों को जमीन का पट्टा दिलवाकर ऊपरी असम में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की बड़ी कोशिश की है। इसी मकसद से पट्टा वितरण को मेगा उत्सव के तौर पर मनाया गया। इसके लिए जान-बूझकर ऊपरी असम के जेरेंगपथार को चुना गया, क्योंकि ब्रह्मपुत्र के दक्षिण में अहोम मतदाताओं का वर्चस्व है। यहां चाय बागान के मजदूरों के साथ स्थानीय मूल के मतदाता ज्यादा असरदार हैं।

पहले माना जा रहा था कि अगले विधानसभा में भाजपा और असम गण परिषद के गठबंधन को वॉकओवर मिल जाएगा। लेकिन, पिछले एक महीने के दौरान राज्य की सियासत में बड़ा बदलाव आया है। ऊपरी असम में नए क्षेत्रीय दल- असम जातीय परिषद तथा राइजर दल की साथ मिलकर चुनाव लड़ने की घोषणा ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भाजपा की उम्मीद चाय मजदूरों से है।

निचले असम में कांग्रेस-एआईयूडीएफ के साथ वामपंथी दलों और आंचलिक गण का गठबंधन भाजपा के लिए चिंता का विषय है। ज्यादातर सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाताओं का प्रभाव है। इसलिए भाजपा निचले असम के घाटे की भरपाई ऊपरी असम में कर सकती है।

कांग्रेस की उम्मीद नवगठित गठबंधन है, लेकित प्रदेश नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं में विश्‍वास पैदा करने में विफल रहा है। कार्यकर्ताओं में उत्साह नहीं है, जबकि कांग्रेस के लिए अच्छी स्थिति है। बराक घाटी में कांग्रेस-एआईयूडीएफ बेहतर प्रदशन कर सकती है। कांग्रेस सभी गैर भाजपा दलों को एकजुट करने का प्रयास कर रही है, लेकिन नए क्षेत्रीय दल भाजपा और कांग्रेस से सामान दूरी बनाए हुए हैं।

दौरे से पहले CAA के विरोध में प्रदर्शन
PM के दौरे से पहले ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन किया। संगठन ने CAA के अलावा पर्यावरण प्रभाव आंकलन अधिनियम (EIA) को रद्द करने की मांग कर मशाल जुलूस निकाला। उनका कहना था कि राज्य में असम एकॉर्ड की धारा छह पर समिति की रिपोर्ट को लागू किया जाए। यह धारा मूल निवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करती है।

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