मोदी के मन की बात:प्रधानमंत्री ने कहा- आजादी की जंग में खादी का जो गौरव था, वही आज युवा पीढ़ी खादी को दे रही

नई दिल्ली2 महीने पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम मन की बात में नदियों के महत्व, स्वच्छता और वोकल फॉर लोकल पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आजादी की जंग में खादी का जो गौरव था, वही गौरव आज युवा पीढ़ी खादी को दे रही है। साथ ही कहा कि मेरे उपहारों की नीलामी से मिलने वाला पैसा नमामि गंगे मिशन को दिया जाएगा।

मोदी के संबोधन की खास बातें

1. गांधी जयंती पर खादी खरीदने का रिकॉर्ड बनाएं
मोदी ने कहा कि आज आजादी के 75वें साल में हम संतों से कह सकते हैं कि आजादी की जंग में जो गौरव खादी का था, वही गौरव आज की युवा पीढ़ी खादी को दे रही है। दिल्ली के खादी शो रूम में एक करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार हुआ, ऐसे कई दिन हुए। 2 अक्टूबर बापू की जयंती पर एक नया रिकॉर्ड बनाएं। जहां भी खादी, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट बिकता हो, दिवाली सामने है, अपनी हर खरीदारी वोकल फॉर लोकल को मजबूत करने और पुराने रिकॉर्ड तोड़ने वाली हो।

2. गांधी ने ही स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का काम
प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटी बातों से बड़े परिवर्तन आते हैं। महात्मा गांधी के जीवन को देखेंगे तो महसूस करेंगे कि छोटी बातों को लेकर उनके जीवन में कितनी अहमियत थी और छोटी-छोटी बातों से उन्होंने बड़े संकल्पों को कैसे साकार किया। साफ-सफाई के आंदोलन ने आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी थी। गांधी ने ही स्वच्छता को जनआंदोलन बनाने का काम किया था। स्वच्छता को स्वाधीनता के सपने के साथ जोड़ दिया था। इतने दशकों बाद स्वच्छता आंदोलन ने देश को नए सपने देखने का मौका दिया है।

3. जनधन खाते खोलने से भ्रष्टाचार कम हुआ
मोदी ने कहा कि जनधन खातों को लेकर जो अभियान शुरू किया उसकी वजह से गरीबों के हक का पैसा उनके खातों में जा रहा है। भ्रष्टाचार में कमी आई है। इसमें टेक्नोलॉजी मदद कर सकती है। आज गांव देहात में भी यूपीआई से लेनदेन की दिशा में सामान्य आदमी जुड़ रहा है। पिछले अगस्त में यूपीआई से 355 करोड़ ट्रांजेक्शन हुए हैं यानी हम कह सकते हैं कि अगस्त के महीने में साढ़े तीन सौ करोड़ से ज्यादा बार यूपीआई का इस्तेमाल डिजिटल लेन-देन के लिए किया गया। आज एवरेज 6 करोड़ रुपए का डिजिटल ट्रांजेक्शन हो रहा है।

4. नदियां भौतिक वस्तु नहीं, जीवंत इकाई हैं
प्रधानमंत्री ने वर्ल्ड रिवर डे की बात करते हुए कहा कि हमारी नदियां भौतिक वस्तु नहीं, जीवंत इकाई है। तभी तो हम नदियों को मां कहते हैं। पर्व, त्योहार, उत्सव, उमंग, ये सभी हमारी इन माताओं की गोद में ही तो होते हैं। माघ का महीना आता है तो देश में बहुत से लोग पूरे एक महीने मां गंगा या किसी और नदी के किनारे कल्पवास करते हैं। घर में स्नान करते हैं तो नदियों का स्मरण करने की परंपरा थी।

5. उपहारों की नीलामी से मिलने वाला पैसा नमामि गंगे को दिया जाएगा
मोदी ने कहा कि आज तक एक विशेष ई-नीलामी चल रही है। मुझे मिले उपहारों की नीलामी हो रही है। इससे आने वाला पैसा नमामि गंगे को ही दिया जाएगा। देशभर में नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए, पानी की स्वच्छता के लिए सरकार और समाजसेवी संगठन निरंतर कुछ न कुछ करते रहते हैं। कुछ लोग ऐसे कामों के लिए अपने आपको समर्पित कर चुके हैं। यही आस्था और प्रयास हमारी नदियों को बचाए हुए है।

तमिलनाडु के वेल्लोर में एक नदी नागा बहती है। बरसों पहले सूख गई थी। इस वजह से वहां का जलस्तर नीचे चला गया था। वहां की महिलाओं ने नदी को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। जनभागीदारी से नहरें खोदीं, चकडैम और रीचार्ज कुएं बनाए। आज वो नदी पानी से भर गई है। जब नदी पानी से भर जाती है तो मन को जो सुकून मिलता है उसका मैंने अनुभव किया है।

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