मोदी आज 53वीं बार देश से करेंगे मन की बात, ट्वीट कर आज के शो को स्पेशल बताया

3 वर्ष पहले
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  • पिछले एपिसोड में प्रधानमंत्री ने चुनाव के महत्व पर की थी मन की बात

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के 53वें एपिसोड में देश को संबोधित किया। उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव में जीत का भरोसा जताया। मोदी ने कहा कि मई में फिर से मन की बात करूंगा। पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यह शहादत आतंक को समूल नष्ट करने के लिए हमें निरंतर प्रेरित और हमारे संकल्प को मजबूत करेगी। 

 

इससे पहले उन्होंने शो से जुड़ा एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा कि आज की मन की बात स्पेशल होगी। बाद में मत कहिएगा कि मैंने आपको पहले नहीं बताया।

 

\'अब की बात दो महीने बाद\'
मोदी ने कहा, \"मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आप सब से जुड़ना मेरे लिए एक अनोखा अनुभव रहा है। रेडियो के माध्यम से मैं एक तरह से करोड़ों परिवारों से हर महीने रूबरू होता हूं। कई बार तो आप सब से बात करते, आपकी चिठ्ठियां पढ़ते या आपके फोन पर भेजे गए विचार सुनते मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आपने मुझे अपने परिवार का ही हिस्सा मान लिया है। यह मेरे लिए एक बहुत ही सुखद अनुभूति रही है।\"

 

\"मैं लोकसभा चुनाव 2019 के बाद एक नए विश्वास के साथ आपके आशीर्वाद की ताकत के साथ फिर एक बार मन की बात के माध्यम से हमारी बातचीत के सिलसिले का आरम्भ करूंगा और सालों तक आपसे मन की बात करता रहूंगा। चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है। अगले दो महीने हम सभी चुनाव की गहमा-गहमी में व्यस्त होगें। मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक प्रत्याशी रहूंगा। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली मन की बात मई महीने के आखरी रविवार को होगी।\"

 

\'वीरों ने हमारी रक्षा में खुद को खपा दिया\'
मोदी ने कहा, \"आज मन भरा हुआ है। 10 दिन पूर्व भारत माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। इन पराक्रमी वीरों ने हमारी रक्षा में खुद को खपा दिया। देशवासी चैन की नींद सो सकें, इसके लिए जवानों ने अपने दिन-रात दे दिए। शहीदों और उनके परिवारों के प्रति चारों तरफ संवेदनाएं उमड़ पड़ी हैं। जो आवेग आपके मन में है, वही भाव हर देशवासी के अंतर्मन में है। विश्व के लोगों के भी मन में है। भारत माता की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले देश के सभी वीर सपूतों को मैं नमन करता हूं।\"

 

\"देश के सामने आई इस चुनौती का सामना हमें जातिवाद, संप्रदायवाद, क्षेत्रवाद और अन्य मतभेदों को भुलाकर करना है ताकि आतंक के खिलाफ हमारे कदम पहले से कहीं अधिक दृढ़, सशक्त और निर्णायक हों।\"

 

\'वॉर मेमोरियल का इंतजार खत्म हुआ\' 
मोदी ने कहा कि आजादी के इतने लंबे समय तक हम सबको जिस वॉर मेमोरियल का इंतजार था, वह खत्म होने जा रहा है। मैंने निश्चय किया था कि देश में एक ऐसा स्मारक अवश्य होना चाहिए। मुझे खुशी है कि स्मारक इतने कम समय में यह स्मारक बनकर तैयार हो चुका है। 25 फरवरी को हम सभी देशवासी इस मेमोरियल को सेना के सुपुर्द करेंगे।\"
 
\"मुझे विश्वास है कि देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थस्थल जाने के समान होगा। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का डिजाइन हमारे अमर सैनिकों के अदम्य साहस को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय सैनिक स्मारक का कॉन्सेप्ट फोर कन्सेंट्रिक सर्किल्स यानी चार चक्रों पर केंद्रित है- अमर चक्र, वीरता चक्र, त्याग चक्र, रक्षक चक्र। जहां उसके जन्म से लेकर शहादत तक का जिक्र है।\" 

 

\"अक्टूबर 2018 में मुझे नेशनल पुलिस मेमोरियल को देश को समर्पित करने का सौभाग्य मिला था। देश को उन पुरुष, महिला पुलिसकर्मियों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए, जो अनवरत हमारी सुरक्षा में जुटे रहते हैं। मैं आशा करता हूं कि आप राष्ट्रीय सैनिक स्मारक और पुलिस मेमोरियल को देखने जरूर जाएंगे। आप जब भी जाएं, तो वहां ली गई अपनी तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अवश्य शेयर करें ताकि दूसरें लोग इस मेमोरियल को देखने के लिए उत्सुक हों।\"

 

\'मोरारजी भाई ने कठिन समय में देश का नेतृत्व किया\'
मोदी ने कहा, \"देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई का 29 फरवरी को जन्मदिन होता है। यह चार साल में एक बार आता है। शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी मोरारजी देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे। उन्होंने उस कठिन समय में भारत का कुशल नेतृत्व किया, जब देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को खतरा था। इसके लिए हमारी आने वाली पीढ़ियां भी उनकी आभारी रहेंगी। मोरारजी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आपातकाल के खिलाफ आंदोलन में खुद को झोंक दिया।\" 

 

\"1977 में जब जनता पार्टी चुनाव जीती तो मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल के दौरान ही 44वां संविधान संशोधन लाया गया। यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इमरजेंसी के दौरान जो 42वां संशोधन लाया गया था। 42वें संशोधन में यह प्रावधान किया गया था कि संविधान के अनुछेद 20, 21 के तहत मिले मौलिक-अधिकारों का आपातकाल के दौरान हनन नहीं किया जा सकता है। पहली बार ऐसी व्यवस्था की गई कि मंत्रिमंडल की लिखित अनुशंसा पर ही राष्ट्रपति आपातकाल की घोषणा करेंगे। भारतीय लोकतंत्र के माहात्म्य को बनाए रखने में उनके अमूल्य योगदान को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।\"

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