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  • Narendra Modi | PMGKAY; PM Narendra Modi Will Interact With Beneficiaries Of Gujarat Via Video Conferencing Today

प्रधानमंत्री ने PMGKAY के लाभुकों से बात की:मोदी बोले- इस साल सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने ओलिंपिक में क्वालिफाई किया, यह व्यवस्थाओं के ट्रांसपेरेंट होने का नतीजा

नई दिल्ली2 महीने पहले

PM नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गुजरात में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) का लाभ पाने वाले लोगों से बात की। PM वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लोगों से जुड़े और उनके विचार और अनुभव जाने। मोदी ने लाभार्थियों से कहा कि दिवाली तक गरीबों को मुफ्त अनाज दिया जाएगा। कार्यक्रम में गुजरात के CM विजय रूपाणी और उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल भी मौजूद रहे।

PM मोदी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पहले की तुलना में ईज ऑफ लिविंग के पैमाने तय किए गए हैं। अब गांवों और कस्बों तक भी विकास पहुंच रहा है। उन्होंने ओलिंपिक खेलों में देश के खिलाड़ियों शानदार प्रदर्शन पर कहा कि खिलाड़ियों ने यह प्रदर्शन 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए किया है। ये आत्मविश्वास व्यवस्थाओं के बदलने और ट्रांसपेरेंट होने पर आता है।

पिछले साल फूड सब्सिडी पर खर्च हुए 2.84 लाख रुपए
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना एक फूड सेफ्टी वेलफेयर स्कीम है, जिसे पिछले साल कोरोना महामारी के फैलने के दौरान केंद्र सरकार ने मार्च में लॉन्च किया था। इस स्कीम का संचालन केंद्रीय कंज्यूमर अफेयर्स, फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन मंत्रालय के तहत आने वाला डिपार्टमेंट ऑफ फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन करता है।

  • 80 करोड़ लोगों को 2 लाख करोड़ रुपए के खर्च से महामारी के दौरान मुफ्त राशन मिला है।
  • कोविड-19 के दौरान फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए पिछले साल 948 लाख मीट्रिक टन अनाज का आवंटन किया गया, जो बाकी सालों के मुकाबले 50% ज्यादा है।
  • 2020-21 के दौरान फूड सब्सिडी पर 2.84 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए।
  • गुजरात के करीब 3.3 करोड़ लाभार्थियों को 25.5 लाख मीट्रिक टन अनाज मिला। फूड सब्सिडी में से इस पर 5 हजार करोड़ रुपए खर्च किए गए।
  • अप्रवासी लाभार्थियों के लिए फूड सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में वन नेशन वन राशन कार्ड की सुविधा शुरू की गई है।

सरकार ने सुधारा डिलीवरी सिस्टम
आजादी के बाद से ही करीब-करीब हर सरकार ने गरीबों को सस्ता भोजन देने की बात कही थी। सस्ते राशन की योजनाओं का दायरा और बजट साल दर साल बढ़ता गया, लेकिन उसका जो प्रभाव होना चाहिए था, वो सीमित ही रहा। इसका एक बड़ा कारण था- प्रभावी डिलीवरी सिस्टम का ना होना।

इस स्थिति को बदलने के लिए साल 2014 के बाद नए सिरे से काम शुरु किया गया। आज 2 रुपए किलो गेहूं, 3 रुपए किलो चावल के कोटे के अतिरिक्त हर लाभार्थी को 5 किलो गेहूं और चावल मुफ्त दिया जा रहा है। यानी इस योजना से पहले की तुलना में राशन कार्ड धारकों को करीब दाेगुनी मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। ये योजना दिवाली तक चलने वाली है।

शहरों तक सीमित नहीं विकास
PM मोदी ने कहा कि एक दौर था विकास की बात केवल बड़े शहरों तक ही सीमित रहती थी। वहां भी विकास का मतलब बस इतना ही रहता था कि खास-खास इलाकों में फ्लाइ-ओवर, सड़कें और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाता था, लेकिन बीते कुछ सालों में इस सोच में बदलाव हुआ है। ईज ऑफ लिविंग के लिए नए मानदंड पैमाने तय किए जा रहे हैं।

2 करोड़ गरीब परिवारों को घर दिए जाते हैं तो वे सर्दी, गर्मी और बारिश का डर छोड़कर जी पाते हैं। जब 100 करोड़ गरीब परिवारों को शौच के लिए बाहर जाने से मुक्ति मिलती है तो उनका जीवन बदल जाता है। जब सड़कें शहरों से गांवों को भी जोड़ती हैं, जब गरीब परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिलता है तो उनका सशक्तिकरण होता है।

ओलिंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की तारीफ की
PM ने कहा, इस बार ओलिंपिक्स में भारत के अब तक के सबसे अधिक खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया है। याद रहे ये 100 साल की सबसे बड़ी आपदा से जूझते हुए किया है। कई तो ऐसे खेल हैं जिनमें हमने पहली बार क्वालीफाई किया है। सिर्फ क्वालीफाई ही नहीं किया बल्कि कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं।

भारतीय खिलाड़ियों का जोश, जुनून और जज़्बा आज सर्वोच्च स्तर पर है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब सही टैलेंट की पहचान होती है, उसको प्रोत्साहन मिलता है। ये आत्मविश्वास तब आता है जब व्यवस्थाएं बदलती हैं, ट्रांसपेरेंट होती हैं। ये नया आत्मविश्वास न्यू इंडिया की पहचान बन रहा है। आज भारत के हर कोने में ये विश्वास सामने आ रहा है। गांव, कस्बों से प्रतिभावान लोग आगे आ रहे हैं।

वैक्सीन लेने और सोशल डिस्टेंसिंग रखने की अपील की
PM ने कहा कि वैश्विक महामारी के इस दौर में हमें सावधानी बनाए रखनी है। आज देश 50 करोड़ वैक्सीनेशन के लक्ष्य के करीब पहुंच गया है, लेकिन हमें मास्क भी लगाना है और सोशल डिस्टेंसिंग भी रखनी है। हम देख रहे हैं कि जिन देशों में मास्क हटाए गए थे, वहां केस फिर से बढ़ने लगे हैं। आजादी के अमृत महोत्सव में ये संकल्प लेना है कि इस अभियान में गरीब-अमीर, बच्चे, पुरुष महिलाएं सबकी बराबर भागीदारी होनी चाहिए।

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