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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:PM के दौरे से पहले जम्मू में आतंकी हमले के रोहिंग्या कनेक्शन की तलाश शुरू, मददगारों की धरपकड़ जारी

श्रीनगर2 महीने पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अप्रैल में जम्मू दौरे से पहले सुजवां में हुए आतंकी हमलों के बाद रोहिंग्याओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जांच में जुटी पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों ने आतंकियों को मदद देने वाले ओवर ग्राउंड वर्कर्स की धरपकड़ शुरू की है।

22 अप्रैल को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 6 आतंकी मारे गए थे।
22 अप्रैल को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों में मुठभेड़ हुई थी, जिसमें 6 आतंकी मारे गए थे।

इसके तहत भठिंडी के किरयानी तालाब और सुंजवां के इलाके में बसे रोहिंग्या परिवारों की पहचान के काम तेज किया गया है। इलाके में गैर कानूनी ढंग से रह रहे आप्रवासियों को पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया।

155 अप्रवासियों के पास वैध दस्तावेज नहीं
प्रशासन के लोग जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक रोहिंग्या परिवारों की जानकारी भी इकट्ठा कर रहे हैं। जम्मू में अवैध रूप से रह रहे 155 आप्रवासियों के पास पासपोर्ट अधिनियम की धारा (3) के मुताबिक वैध यात्रा दस्तावेज नहीं थे। तब से ये सभी हीरानगर के होल्डिंग सेंटर में हैं।

पुलिस का मानना है कि रोहिंग्या इलाकों में रहने वाले अपराध में लिप्त हो सकते हैं।
पुलिस का मानना है कि रोहिंग्या इलाकों में रहने वाले अपराध में लिप्त हो सकते हैं।

रोहिंग्याओं का आरोप- परेशान कर रही पुलिस
किरयानी तालाब में रोहिंग्या बस्ती में लंबे समय से रह रहे दीन मोहम्मद का आरोप है कि संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी कार्ड के बावजूद रोहिंग्या परिवारों को तंग किया जा रहा है। एक मदरसे में पढ़ाने वाले मोहम्मद का कहना है कि वे 15 साल से जम्मू में रह रहे हैं। अब पुलिस के डर से लोग सामान बेचकर जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश-निकालने की प्रक्रिया शुरू हो
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में रोहिंग्याओं के देश से निकालने की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए हैं। विभिन्न याचिकाओं पर सुनचाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में अवैध रूप से रहने वालों को नागरिक नहीं माना जा सकता है।

रोहिंग्याओं के मामले में भी ऐसा ही है। सरकार को अवैध रूप से रहने वालों लोगों को निकालने की कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। इसके लिए अन्य पक्षों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। कानून सम्मत प्रक्रिया अपनाई जाए।

बांग्लादेश भी इनसे परेशान, 21 किमी दूर द्वीप पर बसाया
म्यांमार से आने वाले रोहिंग्याओं ने बांग्लादेश को सबसे पहले अपना ठिकाना बनाया। दक्षिणपूर्व कॉक्स बाजार के घने शरणार्थी शिविरों में रह रहे 11 लाख रोहिंग्याओं में से 1,00,000 शरणार्थियों के ठहरने के लिए इस द्वीप पर सुविधाओं के निर्माण पर 2,688 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

2017 में बांग्लादेश ने मुख्य भूमि से 21 किलोमीटर दूर द्वीप पर लगभग 17 सौ रोहिंग्याओं को बसाया।
2017 में बांग्लादेश ने मुख्य भूमि से 21 किलोमीटर दूर द्वीप पर लगभग 17 सौ रोहिंग्याओं को बसाया।

कॉक्स बाजार म्यामांर के रखाइन प्रांत से सटा हुआ क्षेत्र है। 2017 में बांग्लादेश ने मुख्य भूमि से 21 किलोमीटर दूर द्वीप पर लगभग 17 सौ रोहिंग्याओं को बसाया, लेकिन ये लोग वहां से भाग छूटे। उनका कहना है कि उन्हें अपने परिवारों से अलग किया जा रहा है। अब वहां पर कुछ ही रोहिंग्या परिवार रह गए हैं। वे भी कहते हें कि द्वीप सुरक्षित नहीं है।