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चाबहार पोर्ट पर बढ़ा ट्रैफिक:तालिबान के भरोसे के बाद पोर्ट का संचालन शुरू, रूस और ऑस्ट्रेलिया से पहुंच रहे कार्गो शिप

तेहरान8 दिन पहले

ईरान के चाबहार पोर्ट का संचालन फिर से पहले जैसा हो गया है। 15 अगस्त को तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद यहां के संचालन बुरा प्रभाव पड़ा था। तालिबान के आश्वासन देने के बाद यहां ट्रैफिक में फिर से बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।

तालिबान ने कहा है कि कि वह भारत के साथ अच्छे राजनयिक और व्यापारिक संबंध चाहता है, इसलिए क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार को सुगम बनाने के लिए पोर्ट की भूमिका का समर्थन करेगा। इस पोर्ट को भारत ने तैयार किया है।

कार्गो शिप से ट्रांसपोर्ट किए जा रहे अनाज
पोर्ट पर भारत और रूस से आने वाले शिप्स के ट्रैफिक में इजाफा हुआ है। इस पोर्ट पर ट्रेड में भारत की अहम भूमिका रही है। अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद यहां ट्रेड में कमी आई थी। हालांकि, 2 सितंबर से पोर्ट का संचालन फिर से शुरू हो गया।

पोर्ट का एक टर्मिनल रूस, कतर, रोमानिया और ऑस्ट्रेलिया से आने वाले कार्गो शिप को संभाल रहा है। इनमें जौ, गेहूं और मक्का जैसे अनाज ट्रांसपोर्ट किए जा रहे हैं।

भारत और ईरान के बीच इस बंदरगाह को तैयार करने के लिए 2018 में समझौता हुआ था।
भारत और ईरान के बीच इस बंदरगाह को तैयार करने के लिए 2018 में समझौता हुआ था।

ग्लोबल मार्केट के लिए सस्ता और सुरक्षित है पोर्ट
अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के लिए यह पोर्ट भारत और ग्लोबल मार्केट तक पहुंचने की खातिर आसान, सस्ते और सेफ रुट के तौर पर माना जाता है। पोर्ट के अधिकारियों के मुताबिक, अफगानिस्तान में अस्थिरता के बावजूद चाबहार में ट्रैफिक फिर से बढ़ रहा है।

तालिबान के पॉलिटिकल ऑफिस के प्रमुख रहे शेर अब्बास स्टेनकजई से अगस्त में आश्वासन दिया था कि, तालिबान भारत के साथ अच्छे व्यापार और डिप्लोमेटिक रिलेशन चाहता है। इसके लिए स्टेनकजई ने व्यापारियों से पोर्ट का उपयोग करने की अपील की थी ।

भारत-ईरान ने 2018 में समझौता किया था
ईरान और भारत ने 2018 में चाबहार बंदरगाह तैयार करने का समझौता किया था। यह बंदरगाह सीधा ओमान की खाड़ी से जुड़ता है। यह पोर्ट भारत और अफगानिस्तान को व्यापार के लिए वैकल्पिक रास्ता मुहैया कराता है। अमेरिका ने भारत को इस बंदरगाह के लिए हुए समझौतों को लेकर कुछ खास प्रतिबंधों में छूट दी है। इसे ग्वादर (पाक) की तुलना में भारत के रणनीतिक पोर्ट के तौर पर देखा जाता है। ग्वादर को बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट के तहत चीन ने बनाया है।

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