पॉवर गैलरी / पोलटिक्स, लालू इश्टाइल

डॉ. भरत अग्रवाल

डॉ. भरत अग्रवाल

Apr 16, 2019, 04:21 AM IST



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लालूप्रसाद यादव वैसे तो जेल में हैं, लेकिन फिर भी चुनाव में लालू स्टाइल में ही एक्टिव हैं। दरअसल लालू की एक जीवनी प्रकाशित हुई है और उसमें लालू ने नीतीश को बंदर कहा है। स्थानीय मीडिया ने पुस्तक के इस हिस्से का अनुवाद भी प्रकाशित किया है। जेडीयू में इसकी प्रतिक्रिया भी हुई। कई स्थानों पर जेडीयू और लालू के कार्यकर्ताओं में झड़पें भी हुई हैं। नीतीश ने अपने कार्यकर्ताओं को प्रतिक्रिया नहीं करने की सलाह दी है। उधर लालूजी जानबूझकर उकसाए जा रहे हैं। लिहाजा नीतीश की मनाही के बावजूद झड़पें जारी हैं।

 

पटवाली के नाम पर विचार
सेवानिवृत्त वरिष्ठ न्यायाधीश कुलदीप सिंह के पुत्र और वरिष्ठ अधिवक्ता आर. एस. पटवाली का नाम सर्वोच्च न्यायालय में प्रोन्नति के लिए विचाराधीन है।

 

संसद में चाहिए सुषमा
बीजेपी हाईकमान चाहता है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज पूरे भारत में अपनी पसंद की कोई भी सीट चुन लें।

 

गेम अभी जारी है
एक वरिष्ठ अधिवक्ता, जो एक्टिविस्ट ज्यादा हैं, आजकल एक कार्यालय के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने के मिशन पर जुटे हुए हैं।

 

हुनूज दिल्ली तैयार अस्त
महासचिव श्रीमती स्नेहलता श्रीवास्तव के नेतृत्व में लोकसभा सचिवालय ने लोकसभा के भावी सदस्यों की व्यवस्था की प्रोटोकॉल के अनुसार तैयारी शुरू कर दी है।

 

शत्रु भाई एमबीबीएस?
तो लखनऊ में कांग्रेस के सामने सवाल यह है कि शत्रुघ्न सिन्हा सिर्फ शत्रुघ्न सिन्हा हैं, या एमबीबीएस- माने मियां,बीवी-बच्चों सहित भी हैं? शत्रुघ्न तो कांग्रेस में आ गए। उम्मीदवार भी बन गए। सस्पेंस एमबीबीएस को लेकर है। अगर एमबीबीएस हुए, तो उनकी पत्नी पूनम सिन्हा को लखनऊ में राजनाथ सिंह के खिलाफ कांग्रेस टिकट मिल सकता है। पूनम सिन्हा जन्म से सिंधी हैं और शत्रुघ्न कायस्थ हैं। लखनऊ में कायस्थ वोट काफी हैं और सिंधी समुदाय भी एक मजबूत वर्ग है। और अगर पूनम उम्मीदवार बनती हैं, तो बेटी सोनाक्षी भी प्रचार के लिए आएगी। गालिब ख्याल तो अच्छा है, लेकिन निर्णय राहुल गांधी को लेना होगा। उससे भी पहले यह निर्णय करना होगा कि प्रियंका चुनाव लड़ेंगी या नहीं। फिर जाकर पूनम का सवाल आएगा। क्या एमबीबीएस पैकेज डील होगी? वैसे लखनऊ कांग्रेस का एक वर्ग पूनम के पक्ष में नहीं है।

 

खूब बिके हैं टिकट
भारतीय चुनाव प्रणाली में टिकटों की बिक्री का आइडिया बहुत पुराना हो गया है। माना जाता है कि यह आइडिया इंदिरा गांधी के दौर में शुरू हुआ था। लेकिन 2019 में न केवल कांग्रेस में बल्कि क्षेत्रीय दलों में भी यह खरीद- बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। विशेष रूप से बिहार, यूपी, हरियाणा और महाराष्ट्र में खुल कर खेल चल रहा है। लालू की पार्टी, समाजवादी पार्टी, मायावती की पार्टी के कई टिकट अब खुले रहस्य हैं।

 

फिक्स्ड रेट है भाई
बिहार में एक वरिष्ठ पाटलिपुत्र राजनेता के मुताबिक ठाकुर सीट पर अधिकतम दर 30 करोड़ रुपए है। ओबीसी सीट पर 15 से 20 करोड़। फिर एससी-एसटी सीट की दर 5 से 10 करोड़ है। माने सिर्फ भारतीय लोकतंत्र सबसे बड़ा नहीं है, इसका मार्केट भी काफी बड़ा है।  

 

दोनों बैच से 15-15
केन्द्र सरकार 1987 और 1988 - दोनों बैच से 15-15 आईएएस अधिकारियों को सचिव के तौर पर इम्पैनल करने पर विचार कर रही है।

 

हरियाणा सनराइजर्स
हरियाणा में स्वर्गीय सर छोटूराम की विरासत को बनाए रखने के लिए, जो 1923 में स्वराज पार्टी के सह-संस्थापक थे, उनके पोते और केंद्रीय इस्पात मंत्री चौ. बीरेंद्र सिंह मंत्रिमंडल और राज्यसभा से इस्तीफा देने जा रहे हैं। उनकी पत्नी प्रेमलता भी, जो उचानाकलां से बीजेपी की विधायक हैं, इस्तीफा देंगी। उनके ऐवज में उनके पुत्र बृजेन्द्र सिंह का राजनीति में अवतरण हो रहा है, जो 1998 बैच के आईएएस हैं और जिन्हें हिसार से बीजेपी का उम्मीदवार घोषित किया गया है।

 

हेमा के प्रभु गिरधर नागर
हेमामालिनी फिर से मथुरा से मैदान में हैं। उन्होंने मथुरा के खेतों से एक ट्रैक्टर में बैठकर शानदार चुनाव अभियान भी शुरू कर दिया है। लेकिन बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि इस बार पार्टी ने उनसे सीट बदलने का अनुरोध किया था। पार्टी का कहना था कि आप तो किसी भी सीट से जीत सकती हैं, इसलिए आप किसी और सीट से चुनाव लड़ लें। वास्तव में यूपी सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा इस सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। श्रीकांत पार्टी अध्यक्ष और अरुण जेटली के भी बेहद करीबी हैं। लेकिन हेमामालिनी का कहना है कि भगवान कृष्ण की धरती होने के नाते मैं मथुरा से बेहद जुड़ी हुई हूं। मैंने वहां एक घर खरीदा है और फैसला लिया है कि मैं बाकी जीवन वहीं रहूंगी। हेमामालिनी का कहना है कि मैंने बॉलीवुड छोड़ दिया है, लेकिन मैं मथुरा से दूर नहीं रह सकती। उन्होंने बहुत पहले एक फिल्म में मीराबाई की भूमिका निभाई थी, लेकिन उनके आध्यात्मिक झुकाव का बीजेपी नेताओं को भी अब तक पता नहीं था। 

 

आइडिया ऑफ सीपीएम
सीताराम येचुरी से कोई तो आज यह पूछे कि तेरा हाल क्या है। सीपीएम महासचिव के रूप में उनकी कोशिश हमेशा कांग्रेस के साथ अच्छे संबंध रखने की होती थी। लेकिन राहुल गांधी का केरल का वायनाड सीट से चुनाव लड़ना सीताराम के लिए बड़ी समस्या हो गई है। सीताराम ने अनौपचारिक रूप से राहुल से अनुरोध किया कि आप कर्नाटक में कोई सुरक्षित सीट देख लीजिए। हालांकि वायनाड से पिछली बार कांग्रेस जीती थी, लेकिन अंतर बहुत ज्यादा नहीं था। राहुल गांधी के केरल से चुनाव लड़ने पर प्रकाश करात और उनकी टीम बहुत नाराज है। वह बयान जारी कर चुके हैं कि हमें राहुल को हराने की कोशिश करनी चाहिए। वास्तव में अंदर ही अंदर करात टीम इस बात से खुश है कि सीताराम येचुरी की कांग्रेस समर्थक आइडिया खत्म हो गया है। केरल लॉबी येचुरी को महासचिव पद से हटाने के लिए भी उत्साहित है।

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