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टैगोर के गुरुकुल में मोदी:विश्वभारती के प्रोग्राम में PM ने बंगाल और गुजरात का साड़ी कनेक्शन बताया, राष्ट्रवाद का जिक्र किया

नई दिल्लीएक महीने पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विश्वभारती के लिए गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है।

मोदी ने इस मौके पर गुजरात और बंगाल का साड़ी कनेक्शन भी बताया। दरअसल, रवींद्र नाथ टैगोर के बड़े भाई आईसीएस में रहते हुए गुजरात में भी नियुक्त हुए। उनकी पत्नी ज्ञाननंदिनी देवी देखा कि जब महिलाएं दाएं कंधे पर साड़ी का पल्लू रखकर काम करती हैं तो उन्होंने दिक्कत होती है। मोदी ने कहा कि ठीक-ठीक तो याद नहीं पर बाएं पल्लू की साड़ी पहनने का चलन उन्होंने ही शुरू किया।

तृणमूल का दावा- ममता को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया

विश्वभारती यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी नहीं पहुंची। इस पर बातें होने लगीं तो तृणमूल की ओर से जवाब आया। पार्टी ने कहा कि ममता को यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट की ओर से कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं गया।

साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्टर ब्रत्य बसु ने कहा कि ममता बनर्जी प्रदेश की मुख्यमंत्री हैं। ऑफिशियल प्रोटोकाल के तहत उन्हें कार्यक्रम में बुलाया जाना चाहिए था। यूनिवर्सिटी अथॉरिटी ने इस बारे में हमसे कोई बात नहीं की। क्या मुख्यमंत्री से इस तरह का बर्ताव किया जाना चाहिए।

मोदी का शांति निकेतन में कार्यक्रम, ममता ने एक दिन पहले संगीत मेले में नृत्य कौशल दिखाया

मोदी की स्पीच पर ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि शांति निकेतन में टैगोर के विजन और फिलॉस्फी को बचाकर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व भारती विश्वविद्यालय 100 साल का हो गया है। शिक्षा का यह मंदिर रवींद्रनाथ टैगोर का सबसे बड़ा प्रयोग था।

वे बोलीं कि आज विश्व भारती में हुए दीक्षांत समारोह में नहीं बुलाया। कुछ लोग वहां आए हैं, लेकिन वे विश्व भारती को खत्म नहीं कर सकते। आज जो लोग हैं, वे अस्थायी हैं। उनके पास सिर्फ कुछ दिन हैं।

मोदी ने शांति निकेतन को संबोधित किया तो एक दिन पहले ममता भी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुईं। बंगाल की मुख्यमंत्री बुधवार को बांग्ला संगीत मेला में गई थीं। यहां मंच पर एक डांसर ने ममता से भी नृत्य करने को कहा। इसके बाद ममता बनर्जी ने भी मंच पर इस आदिवासी नृत्यांगना का साथ दिया।

मोदी के 34 मिनट के भाषण की अहम बातें

पर्यावरण संरक्षण में भारत की अहम भूमिका
मोदी ने कहा- इस संस्था को इस ऊंचाई पर पहुंचाने वाले हर व्यक्ति को मैं आदर पूर्वक नमन करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं। भारत आज इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है। भारत इकलौता देश है जो पेरिस एकॉर्ड के तहत सही मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।

भक्ति युग में संत-महंतों ने देश में चेतना जगाई
स्वतंत्रता आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी। आजादी के आंदोलन को पहले से चले आ रहे कई आंदोलनों से ऊर्जा मिली। भक्ति युग में भारत के हर क्षेत्र में संतों, महंतों ने देश की चेतना के लिए अविराम प्रयास किया।

गुरुदेव का विजन था- जो भारत में सर्वश्रेष्ठ, उससे दुनिया को फायदा हो
वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी और ये धारा अंतर्मुखी नहीं थी। वो भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग रखने वाली नहीं थी। उनका विजन था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे।

आत्मनिर्भर अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग
आपके विश्वविद्यालय का नाम ही देखिए- विश्व-भारती। मां भारती और विश्व के साथ समन्वय। विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है। आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है। ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है।

बाएं कंधे पर पल्लू रखने की परंपरा का जिक्र किया
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुजरात की बेटी भी गुरुदेव के घर बहू बनकर आई थी। सत्येंद्रनाथ टैगोर (रवीन्द्रनाथ टैगोर के बड़े भाई) की पत्नी ज्ञानदानंदिनी जब अहमदाबाद में रहती थीं, तब उन्होंने देखा कि वहां महिलाएं साड़ी का पल्लू दाईं ओर रखती थीं। इससे काम करने में परेशानी होती थी। उन्होंने सलाह दी कि बाएं कंधे पर पल्लू रखें तो काम करने में आसानी होगी। यह परंपरा तब से ही वहां चल रही है।

1921 में हुई थी स्थापना
1921 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्वभारती देश की सबसे पुरानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी है। मई 1951 में इसे एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और इंस्टीट्यूशन ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस घोषित किया गया था।

PM 2 महीने में 5 यूनिवर्सिटीज में प्रोग्राम में शामिल हो चुके

  • 19 अक्टूबर को मोदी ने मैसूर यूनिवर्सिटी के शताब्दी दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। 1916 में बनी इस यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में मोदी ने युवाओं को शिक्षा और दीक्षा का सही मतलब समझाया था।
  • 12 नवंबर को JNU के एक कार्यक्रम में भाग लिया। स्वामी विवेकानंद की मूर्ति अनावरण समारोह में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने नेशन फर्स्ट का नारा देते हुए युवाओं को संदेश दिया कि विचारधारा बाद में है, देश पहले है।
  • 21 नवंबर को गांधीनगर की दीनदयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी के आठवें दीक्षांत समारोह में 2600 छात्रों को डिग्री और डिप्लोमा देते हुए उनसे देश के विकास में योगदान देने की अपील की।
  • 25 नवंबर को लखनऊ यूनिवर्सिटी के 100 साल पूरे होने के कार्यक्रम में भाग लेते हुए युवाओं को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी।
  • 22 दिसंबर को मोदी ने CAA के खिलाफ आंदोलन को लेकर चर्चा में रही उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया था। उन्होंने एजुकेशन सेक्टर में किए गए कामों को गिनाया। साथ ही कहा कि आप किस मजहब में पले हैं, इससे बड़ी बात यह है कि हमारी आकांक्षाएं देश से कैसे जुड़ें।

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