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राज्यसभा का 250वां सत्र / मोदी ने कहा- निचला सदन जमीन से जुड़ा है, तो ऊंचा सदन दूर तक देख सकता है



राज्यसभा में सदस्यों को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी। राज्यसभा में सदस्यों को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी।
राज्यसभा के 250वें सत्र के उपलक्ष्य में मार्शल्स की ड्रेस बदली गई। राज्यसभा के 250वें सत्र के उपलक्ष्य में मार्शल्स की ड्रेस बदली गई।
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राज्यसभा में सदस्यों को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी।राज्यसभा में सदस्यों को संबोधित करते प्रधानमंत्री मोदी।
राज्यसभा के 250वें सत्र के उपलक्ष्य में मार्शल्स की ड्रेस बदली गई।राज्यसभा के 250वें सत्र के उपलक्ष्य में मार्शल्स की ड्रेस बदली गई।

  • प्रधानमंत्री ने कहा- भारत की अनेकता में एकता की ताकत सदन में नजर आती है
  • राज्यसभा में व्यवहार के लिए मोदी ने राकांपा और बीजद सांसदों की तारीफ की
  • 250वें सत्र में राज्यसभा के मार्शलों की ड्रेस में बदलाव किया गया 

Dainik Bhaskar

Nov 18, 2019, 06:19 PM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के 250वें सत्र के मौके पर सदस्यों को संबोधित किया। इस मौके पर मार्शलों की ड्रेस में बदलाव किया गया। मोदी ने कहा कि चर्चा चल रही थी कि सदन एक हो या दो हो। लेकिन, संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था दी है, वह बेहद उपयुक्त है। निचला सदन जमीन से जुड़ा हुआ है, तो ऊंचा सदन दूर तक देख सकता है। निचले सदन में भारत की जमीनी स्थिति का प्रतिबिम्ब होता है, तो यहां पर दूरदृष्टि का पता चलता है। इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखे। इतिहास बनाया भी और इतिहास बनते हुए देखा। जरूरत पड़ने पर इतिहास को मोड़ने का भी काम किया।

 

मोदी ने कहा- 'सभापतिजी जब आप दो घटनाओं को जोड़कर प्रस्तुत कर रहे थे। मुझे लगता है कि लेखन के शौकीन इस पर जरूर गौर करेंगे। 250 सत्र विचार यात्रा रही है। हर दिन के बाद नया दिन आया, समय बदला और परिस्थितियां बदलीं। सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए अपने आपको ढालने का प्रयास किया। इसके लिए सदन के सभी सदस्य बधाई के पात्र हैं। यह हमारी विकास यात्रा का प्रतिबिम्ब है। वैश्विक परिदृश्य में भारत किस तरह से नेतृत्व की क्षमता रखता है, यह इस सदन से पता चलता है।’

 

'राज्यसभा में मुझे कई चीजों को नए सिरे से देखने का मौका मिला'

  • प्रधानमंत्री ने कहा- ‘सदन के दो पहलू खास है। एक स्थायित्व और दूसरा विविधता। लोग आते हैं और जाते हैं लेकिन, स्थायित्व बना रहता है। यह भारत के संघीय ढांचे की आत्मा हर पल प्रेरित करती है। भारत की अनेकता में एकता का जो सूत्र है, उसकी सबसे बड़ी ताकत सदन में नजर आती है। हर किसी के लिए चुनावी अखाड़ा पार करना बहुत सरल नहीं होता है, लेकिन देश में उन लोगों की उपयोगिता कम नहीं होती है। उनका लाभ देश के राजनीतिक जीवन, नीतिनिर्धारण में मिलता है।’
  • 'देश की हस्तियों ने इस सदन का नेतृत्व किया है। आजादी के बाद बहुत सारी चीजें गढ़नी थीं, उस समय जिस परिपक्वता के साथ सबने नेतृत्व किया, यह बहुत बड़ी बात है। 250 सत्रों की यात्रा और अनुभव के बाद हमारा आने वाली पीढ़ियों के लिए दायित्व और बढ़ जाता है। क्या हम राधाकृष्णन जी की उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं या नहीं। मुझे उम्मीद है कि सदन की मौजूदा पीढ़ी इस दिशा में निरंतर प्रयास करती रहेगी। कई बातों तो नए सिरे से देखना का अवसर मुझे मिला।’ 

 

'सदन ने तीन तलाक और 370 हटाकर बड़ा फैसला किया'

  • मोदी ने कहा- ‘तीन तलाक का कानून सभी को लगता था कि राज्यसभा में अटक जाएगा। लेकिन, इसी सदन ने महिला सशक्तिकरण का बहुत बड़ा काम किया। हमारे देश में आरक्षण के चलते हर पर संघर्ष के बीज बोए गए हैं। इसी सदन में सामान्य वर्ग के गरीब परिवार का 10% आरक्षण निश्चित किया। जीएसटी के लिए हर किसी ने मेहनत की। कमियां हैं, या नहीं हैं। लेकिन, वन नेशन और वन टैक्स के लिए देश को दिशा देने का काम इसी सदन ने किया है।’ 
  • ‘1964 में वादे किए गए थे, इसी सदन में धारा 370 को हटाने के लिए कदम उठाया गया। संविधान निर्माताओं ने जो दायित्व दिया है, उसमें प्राथमिकता कल्याणकारी शासन। उसके साथ राज्यों का कल्याण भी जिम्मेदारी है। दोनों सदन में मिलकर राज्यों को आगे बढ़ा सकते हैं। हमारा संघीय ढांचा हमारे देश के विकास के लिए अहम है। राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर काम करें, तभी प्रगति संभव होती है। राज्यसभा इसे सुनिश्चित करती है कि देश में केंद्र और राज्य सरकारें प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं।’ 

 

सदन में व्यवहार के लिए मोदी ने राकांपा और बीजद की तारीफ की

  • प्रधानमंत्री ने कहा- ‘देश का विकास और राज्यों का विकास अलग नहीं है। इन बातों को यह सदन सबसे ज्यादा जीवंतता के साथ प्रतिबिंबित करता है। बहुत सी नीतियां केंद्र सरकार बनाती है, उन नीतियों में राज्यों की स्थिति, अनुभव और दिक्कतों को नीतिनिर्धारण में सटीक तरीके से कोई ला सकता है तो इस सदन के सदस्य ला सकते हैं। इसका लाभ संघीय ढांचे को मिलता है। दिशा तय होती है और यह काम हो रहा है।’
  • ‘राकांपा और बीजद दो दलों का उल्लेख करता हूं। दोनों दलों की विशेषता देखिए, इन्होंने खुद तय किया है कि हम वेल में नहीं जाएंगे। कभी भी नियम तोड़ा नहीं गया। हमें सीखना होगा कि नियम का पालन करने के बावजूद दोनों दलों की विचारधारा में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। ये वेल में जाए बगैर लोगों का दिल जीत सकते हैं। क्यों न हम इनसे कुछ सीखें। मैं सारे सदन के लिए कह रहा हूं कि राकांपा और बीजद ने जिस नियम का पालन किया, उसकी चर्चा हो और उन्हें धन्यवाद दिया जाए।’

 

'राज्यसभा को देश के विकास के लिए सपोर्टिव हाउस बने रहना चाहिए'

  • मोदी ने कहा- ‘2003 में जब सदन के 200 सत्र पूरे हुए थे, तब भी एनडीए की सरकार थी। अटलजी प्रधानमंत्री थे, 200वें सत्र के समय अटलजी का भाषण दिलचस्प था। उन्होंने कहा था कि हमारे संसदीय लोकतंत्र की शक्ति बनाने के लिए सेकंड चैम्बर मौजूद है। यह भी चेतावनी दी थी कि सेकंड हाउस को कोई सेकंडरी हाउस बनाने की गलती न करे।’
  • ‘आज के समय में अटलजी की बात को कहना चाहूंगा कि राज्यसभा को भारत के विकास के लिए सपोर्टिव हाउस बने रहना चाहिए। जब हमारी संसदीय प्रणाली के 50 साल हुए थे, तब अटलजी ने कहा था कि एक नदी का प्रवाह तभी तक अच्छा रहता है, जब तक कि उसके किनारे मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत के संसदीय प्रवाह का एक किनारा लोकसभा है और दूसरा किनारा राज्यसभा है। ये दो मजबूत रहेंगे तभी लोकतांत्रिक परंपराओं का प्रवाह सही तरह से आगे बढ़ेगा।'
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