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राजनीति / ट्विटर पर आने के एक महीने बाद प्रियंका का पहला ट्वीट, कहा- साबरमती में सच जिंदा है

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2019, 08:58 AM IST


महासचिव बनने के बाद मंगलवार को प्रियंका ने पहली बार जनसभा को संबोधित किया था। महासचिव बनने के बाद मंगलवार को प्रियंका ने पहली बार जनसभा को संबोधित किया था।
अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में राहुल और प्रियंका। अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में राहुल और प्रियंका।
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महासचिव बनने के बाद मंगलवार को प्रियंका ने पहली बार जनसभा को संबोधित किया था।महासचिव बनने के बाद मंगलवार को प्रियंका ने पहली बार जनसभा को संबोधित किया था।
अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में राहुल और प्रियंका।अहमदाबाद के साबरमती आश्रम में राहुल और प्रियंका।
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  • मंगलवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में शामिल हुई थीं प्रियंका
  • महासचिव बनने के बाद पहली बार जनसभा को भी संबोधित किया
  • प्रियंका का दूसरा ट्वीट- हिंसा के मकसद में कुछ अच्छा दिखता है तो वह अस्थायी है, हिंसा में बुराई ही होती है

नई दिल्ली. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्विटर पर दस्तक देने के एक महीने बाद मंगलवार को अपना पहला ट्वीट किया। उन्होंने साबरमती आश्रम का जिक्र किया और महात्मा गांधी के एक कथन का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रपिता हमेशा हिंसा के खिलाफ रहे। अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में शामिल होने के बाद प्रियंका ने ट्वीट किया। उन्होंने कहा, ''साबरमती की सादगी में सत्य जीवित है।'' प्रियंका 10 फरवरी को ट्विटर पर आई थीं।

 

 

'हिंसा में बुराई होती है'

  1. प्रियंका ने गांधीजी के एक कथन का हवाला देते हुए दूसरा ट्वीट किया- अगर हिंसा के मकसद में कुछ अच्छा दिखता है तो वह अस्थायी है। हिंसा में हमेशा बुराई ही होती है।

     

     

  2. देश में नफरत फैलाई जा रही

    इससे पहले प्रियंका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश में चारों तरफ नफरत फैलाई जा रही है जिसका सभी को मिलकर मुकाबला करना है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को ताकीद दी कि असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की लगातार कोशिश की जाएगी, लेकिन वे रोजगार, किसानों और महिला सुरक्षा के मुद्दों को लेकर सवाल पूछते रहें।

  3. 'साबरमती आश्रम में आंसू आ गए'
    प्रियंका ने यहां कांग्रेस की जनसभा में कहा, ''पहली बार गुजरात आई हूं और पहली बार उस साबरमती आश्रम गई जहां से महात्मा गांधी ने आजादी के लिए संघर्ष की शुरुआत की थी। वहां बैठकर लगा कि आंखों में आंसू आ जाएंगे। उन लोगों की याद आई जिन्होंने देश के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। यह देश प्रेम, सद्भाव और आपसी प्यार के आधार पर बना है। आज जो कुछ देश में हो रहा है उससे दुख होता है।"

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