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पुलवामा हमले का एक साल / जम्मू से ग्राउंड रिपोर्ट: अब काफिले के साथ डॉग स्क्वॉड और मोबाइल बंकर भी चलते हैं, सीआरपीएफ ने कहा- हमारा जोश अब भी हाई

Pulwama Attack CRPFJawan | Jammu Kashmir Pulwama Terrorist Attack Ground Report Latest News and Updates On Pulwama Terror Attack First Anniversary
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Pulwama Attack CRPFJawan | Jammu Kashmir Pulwama Terrorist Attack Ground Report Latest News and Updates On Pulwama Terror Attack First Anniversary

  • 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले पर हमला हुआ था, 40 जवान शहीद हुए
  • सीआरपीएफ ने इस हमले के बाद सुरक्षा के कदम उठाए, हर दिन सुरक्षा बलों के 4 हजार जवान जम्मू से श्रीनगर जाते हैं

दैनिक भास्कर

Feb 14, 2020, 12:20 PM IST

जम्मू से मोहित कंधारी. पुलवामा हमले की आज पहली बरसी है। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर हुए हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों की जान गई थी। इस एक साल के भीतर सीआरपीएफ ने सुरक्षा को मजबूत करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को सख्ती से लागू करने की प्रक्रिया शुरू की है और खुद का आधुनिक निगरानी तंत्र भी विकसित किया है। सीआरपीएफ की 166वीं बटालियन के डिप्टी कमांडर शिवानंद सिंह ने दैनिक भास्कर से कहा कि निगरानी और जांच के लिए अब हर यूनिट के पास अपनी डॉग स्क्वॉड है। हाईवे की पेट्रोलिंग करने वाली टीम लेटेस्ट गैजेट्स से लैस रहती है। काफिले के साथ क्विक रेस्पॉन्स टीम और मोबाइल बंकर्स भी चलते हैं।

हमले के वक्त किसी भी तरह की एसओपी का उल्लंघन नहीं हुआ था
शिवानंद सिंह ने कहा- पुलवामा हमले के बाद करीब 6 बार अलग-अलग रास्तों पर हमारे काफिलों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे आतंकवादी हर बार नाकाम रहे और सुरक्षा बलों को कोई भारी नुकसान नहीं पहुंचा पाए। हमारे जवानों का जोश हाई रहता है। वे हाईवे पर सफर करने से डरते नहीं हैं। एक साल पहले जब हमारे काफिले पर हमला किया गया था, तब किसी भी एसओपी का उल्लंघन नहीं किया गया था। इस हमले के बाद हमने छोटे और सुगठित काफिले कश्मीर घाटी भेजने शुरू किए, ताकि उनकी सुरक्षा को निश्चित किया जा सके। हर दिन आर्मी, सीआरपीएफ, बीएसएफ समेत केंद्रीय सुरक्षा बलों के 3000-4000 जवान जम्मू से श्रीनगर आते-जाते हैं।

सीआरपीएफ ने काफिलों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए
सिंह ने बताया- एसओपी को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ हमारा जोर रोड ओपनिंग पार्टी को लेटेस्ट गैजेट्स से लैस करना है, ताकि वे काफिले के रास्ते में आईईडी और अन्य विस्फोटकों की पहचान कर सकें। उन्होंने कहा- सहयोगी एजेंसियों के अलावा आर्मी भी किसी भी काफिले के मूवमेंट से पहले नेशनल हाईवे की पड़ताल करती है। आईईडी ब्लास्ट के बड़े खतरे को देखते हुए वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने का अलर्ट जारी करते रहते हैं। रास्ते में कड़ी निगरानी बरतने में हम किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतते।


सिंह ने कहा- हमने इलाके की सभी यूनिट्स को उनकी डॉग स्क्वॉड और बम डिस्पोजल यूनिट्स दी हैं ताकि रियल टाइम में किसी भी तरह के खतरे को पहचाना जा सके। "300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर तुरंत रेस्पॉन्स करने के लिए हमने संवेदनशील जगहों पर क्विक रिएक्शन टीम तैनात की हैं। हमारी पेट्रोल पार्टियां लगातार नेशनल हाईवे की निगरानी करती हैं। पूरी तरह से इलाके के निरीक्षण के लिए उनके पास स्निफर डॉग भी रहते हैं। रोड ओपनिंग पार्टी भी तैनात की जाती हैं। ये माइंस और बम की जांच करती हैं।'

शिवानंद सिंह ने कहा, ‘‘ संवेदनशील स्थानों पर सीआरपीएफ के सुरक्षा चेक प्वाइंट भी बढ़ाए गए हैं ताकि काफिला सहज तरीके से मूवमेंट कर सके। हम अप अपने काफिलों में प्राइवेट बस और ट्रक जैसे वाहनों को शामिल करना बंद कर दिया है। आमतौर पर सीआरपीएफ का काफिला एक दिन के अंतराल पर गुजरता है, जबकि आर्मी जम्मू स्थित ट्रांजिट कैंप में अपने जवानों को रोजाना भेजती है। छुट्टी से घर लौटने के बाद जवान इन्हीं ट्रांजिट कैंपों में रिपोर्ट करते हैं। इन कैंपों में रहने की सुविधा भी रहती है।’’
 

बिजबेहरा से पम्पोर तक का इलाका मौत का जाल
शिवानंद सिंह ने बताया कि नेशनल हाईवे पर पड़ने वाली सर्विस रोड, कटआउट्स और गांवों को जोड़ने वाली सड़कें सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती हैं। बिजबेहेरा कस्बे से दक्षिण कश्मीर के पम्पोर तक का 35 किलोमीटर तक का इलाका सुरक्षा बलों के लिए मौत का जाल है। इस इलाके में पिछले कई सालों में सुरक्षा बलों पर कई हमले हुए और काफी नुकसान भी हुआ। इस इलाके में लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जैश का ओवरग्राउंड वर्कर्स का अच्छा नेटवर्क है। वे इस इलाके में ओवर ग्राउंड वर्कर्स के घरों का इस्तेमाल छिपने में करते हैं और इसके बाद सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हैं।

इस साल 20 आतंकवादी ढेर 
पुलवामा हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में जैश-ए-मोहम्मद की लीडरशिप को खत्म करने का ऑपरेशन शुरू कर दिया था। सीआरपीएफ काफिले पर हमला करने वाले आदिल अहमद डार को ट्रेनिंग देने वाले तीन जैश आतंकियों को हमले के 100 घंटे के भीतर ही सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। इनमें हमले का मास्टर माइंड अब्दुल रशीद गाजी भी शामिल था। इस हमले के तीन महीने के भीतर जैश के करीब 24 आतंकी मारे गए थे। सालभर के दौरान आतंकवाद का गढ़ माने जाने वाले दक्षिण कश्मीर में 160 आतंकवादी मारे गए। एक जनवरी 2020 से लेकर अब तक 20 आतंकवादी मारे गए।

पुलवामा हमले के बाद 30 मार्च 2019 को जम्मू-कश्मीर हाईवे पर बनिहाल के पास सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया गया। 17 जून 2019 को पुलवामा में 44 राष्ट्रीय राइफल्स के मोबाइल पेट्रोल व्हीकल को आईईडी से उड़ाने की कोशिश की गई। इस हमले में दो जवान शहीद हुए।

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