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सिद्धू-अमरिंदर टकराव का असर:नाराजगी जाहिर कर अपनी इमेज खराब कर रहे हैं सिद्धू, कैप्टन के जाने से कांग्रेस के 4-5% वोट कट सकते हैं

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
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पंजाब में जारी सियासी उठापटक और बदले समीकरणों में किस राजनीतिक दल के पास सत्ता की चाबी होगी तो किसको होगा भारी नुकसान? कैप्टन अमरिंदर का कांग्रेस से दूर होना और ‌BJP से उनकी नजदीकी की खबर... इन सबका क्या होगा असर? दैनिक भास्कर ने सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटीज (CSDS) के निदेशक और चुनाव विश्लेषक संजय कुमार, किसान आंदोलन से जुड़े योगेंद्र यादव और कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा से इस मुद्दे पर बात की। सबसे पहले पढ़िए क्या कहा संजय कुमार ने-

सवाल: पंजाब में कांग्रेस में जो डेवलपमेंट हुआ है उससे वहां की पॉलिटिक्स पर क्या असर दिखेगा?
जवाब: जाहिर सी बात है कि कैप्टन के हटने से सीधा नुकसान कांग्रेस को होगा। फायदा अकाली दल और आम आदमी पार्टी को होगा। पंजाब में अकाली दल लंबे समय तक रहा है। लिहाजा लोग एक नई पार्टी को ट्राई करना चाहते हैं। विकल्प आम आदमी पार्टी के तौर पर मौजूद है। तो इस पूरे प्रकरण का फायदा आम आदमी पार्टी को होता दिख रहा है। पिछली बार केजरीवाल की पार्टी की परफॉर्मेंस भी बेहतर थी। आप सत्ता में आ सकती है।

सवाल: कांग्रेस का कितना प्रतिशत वोट कैप्टन डैमेज कर सकते हैं ?
जवाब: कैप्टन अमरिंदर कांग्रेस के 4-5 प्रतिशत वोट डैमेज कर सकते हैं और इतने वोट अगर कांग्रेस खोएगी तो यह अकाली और आप में बंटेगे। आम आदमी पार्टी में ज्यादा।

सवाल: अगर कैप्टन भाजपा में जाते हैं या फिर वे अलग पार्टी बनाते हैं और फिर बाद में भाजपा से जुड़ते हैं तो क्या इसका भाजपा को कुछ फायदा होगा?
जवाब: पंजाब में भाजपा कभी 6-7 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं ला पाई है। सत्ता के करीब भी नहीं रही। कैप्टन अगर जुड़ भी गए तो भी बहुत ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा पाएंगे। 6-7 फीसदी की जगह यह आंकड़ा 8-9 फीसदी हो जाएगा। पंजाब में कभी भाजपा की सियासी जमीन रही ही नहीं।

सवाल: क्या कृषि कानूनों की वजह से किसानों के मुद्दे पर घिरी भाजपा के लिए कैप्टन अमरिंदर कुछ कर पाएंगे?
जवाब: मैं फिर कह रहा हूं, भाजपा पंजाब में बहुत नुकसान और फायदे की स्थिति में नहीं है, लेकिन कैप्टन अगर आते हैं तो किसानों को साधने की कोशिश कर सकते हैं।

अब देखने वाली बात यह है कि किसान इनकी कितनी सुनेंगे। किसान जिस तरह से आंदोलन पर अड़े हैं उसे देखकर लगता है कि वे किसी तरह का समझौता नहीं करना चाहते। अपनी मांग मनवाने के बाद ही वे हटेंगे।

सवाल: आप बार-बार कह रहे हैं कि कांग्रेस के नुकसान का फायदा आप को होगा, किस आधार पर आप यह कह रहे हैं?
जवाब: अकाली दल वहां लंबे समय तक सत्ता में रहा है। पंजाब में लोग नई पार्टी या बदलाव चाह रहे हैं। लिहाजा आम आदमी पार्टी पर दांव खेलेंगे। आम आदमी पार्टी दिल्ली में टिक कर काम कर रही है।

पंजाब में यह भी मैसेज है कि वह केंद्र से मोर्चा लेने वाली पार्टी है। राज्य के लिए लड़ने वाली पार्टी है। यही वजह रही कि आप की पिछली बार की परफॉर्मेंस भी वहां अच्छी थी। यही सब वजहें आम आदमी पार्टी को बढ़त दिला रही हैं।

सवाल: कांग्रेस को सिद्धू के छोड़ने का नुकसान होगा, क्या वे आम आदमी पार्टी का रुख करेंगे?
जवाब: मैं कहता हूं कि सिद्धू अगर ऐसे ही अस्थिर रहे तो उनकी विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। छोटे-छोटे मुद्दों पर सिद्धू का बिदकना उनकी इमेज को बहुत डैमेज करेगा। सिद्धू लगातार अस्थिर दिख रहे हैं। अगर वे आम आदमी पार्टी में जाने की सोचें भी तो इसका फायदा पार्टी को कम ही होता दिख रहा है। हालांकि अभी तो उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।

कैप्टन को आगे रख किसानों को नहीं साध सकेगी भाजपा: योगेंद्र यादव
योगेंद्र यादव ने कहा- मैं किसान आंदोलन से जुड़ा हूं इसलिए मैं राजनीतिक विश्लेषक के लिहाज से बात नहीं करूंगा, लेकिन अगर भाजपा को यह लगता है कि वह कैप्टन को आगे रखकर किसानों को साध लेगी तो वह गलत है। ऐसी बात करने वाले लोग यह भूल जाते हैं कि दो साल पहले किसानों ने कैप्टन के घर को भी घेरा था। किसान के हित में जो भी बात करेगा, किसान उसके साथ रहेंगे। वह कोई भी हो। अब किसानों का आंदोलन तोड़ना किसी के बस की बात नहीं है। हां, अगर भाजपा सकारात्मक बात करना चाहे तो वह कैप्टन हो या कोई और, किसी के जरिए भी बढ़ सकती है। सकारात्मक मतलब तीनों बिल वापस लेना।

कृषि बिल पर भाजपा की प्रतिष्ठा बचा सकते हैं अमरिंदर: देवेंद्र शर्मा
देवेंद्र शर्मा बोले- किसानों और तीनों नए कृषि बिल के मुद्दे पर भाजपा अब एक ही काम कर सकती है, वह यह कि अपनी प्रतिष्ठा बचाए। अमरिंदर एक सहारा साबित हो सकते हैं, लेकिन तभी जब अमरिंदर भी किसानों के हित की बात करेंगे, तभी किसान भी उनकी बात सुनेंगे। भाजपा कैप्टन को आगे रखकर किसानों के साथ बातचीत कर सकती है। जहां तक मैं समझ रहा हूं तो भाजपा के भीतर भी किसानों के लंबे होते आंदोलन को लेकर रेस्टलेसनेस है। पार्टी के भीतर लोग अब इस आंदोलन को खत्म कराने के लिए बातचीत कर रहे हैं। भाजपा ने किसानों के साथ जो व्यवहार किया है उसको देखते हुए उनके नेताओं से किसान कितना बात करेंगे, इस पर भाजपा के भीतर शंका है। लिहाजा अमरिंदर यह काम कर सकते हैं।

शर्मा ने कहा कि किसानों के मुद्दे पर भाजपा को चुनाव में नुकसान होता साफ दिख रहा है। इसलिए उन्हें एक ऐसा व्यक्ति चाहिए जो उन्हें इस मुद्दे पर आगे बढ़ा सके, लेकिन मैं फिर कह रहा हूं कि किसान लंबा आंदोलन कर चुके हैं और वे इसे और आगे बढ़ाने के मूड में हैं। वे समझौते के मूड में नहीं हैं। किसान इसी शर्त पर हटेंगे, जब केंद्र तीनों बिल वापस ले। अमरिंदर पंजाब में किसानों के करीब हैं, लेकिन अगर वह कृषि कानूनों के पक्ष में बोले तो उनकी फिर कोई नहीं सुनेगा।

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