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इंदौर / भय्यू महाराज ने आत्महत्या नहीं की, उनकी हत्या की गई इसलिए सीबीआई जांच करे: भक्त



भय्यू महाराज। भय्यू महाराज।
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भय्यू महाराज।भय्यू महाराज।

  • भय्यू महाराज की आत्महत्या का मामला छह महीने बाद फिर चर्चा में आया
  • भक्त बोले- महाराज को गन लोड करना तक नहीं आता था, कैसे मार सकते हैं खुद को गोली

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2018, 12:47 PM IST

इंदौर.   भय्यू महाराज की मौत का मामला फिर चर्चा में आया है। महाराष्ट्र, गुजरात से आए भक्तों ने आरोप लगाया कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की, बल्कि सुनियोजित ढंग से उनकी हत्या की गई है। भक्तों ने पुलिस को ज्ञापन सौंपकर सीबीआई जांच की मांग की। सोमवार सुबह भक्तों ने सूर्योदय आश्रम पर बैठक की। शाम को अलग-अलग संस्था के पदाधिकारी डॉ. दत्ता देशमुख, वल्लभ पाठक, श्याम देशमुख, तुषार पाटिल सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रेस कांफ्रेस की। महाराज ने 12 जून को खुद को गोली मार ली थी।

 

पदाधिकारियों और भक्तों ने बताया कि महाराज को गन लोड-अनलोड करना नहीं आता था। कहीं जाने के दौरान वे गन अपने साथ रखते थे, लेकिन घर लौटते ही सेवादार गन को अनलोड कर अलग कमरे और कारतूस अलग कमरे में रख देते थे। इसकी खबर महाराज को भी नहीं दी जाती थी। फिर उनकी गन में किसने गोली लोड की। 

 

 

सेवादारों से क्यों नहीं की सख्ती से पूछताछ


भक्तों ने पुलिस की जांच पर आरोप लगाते हुए कहा- "पुलिस ने घटना के बाद ही महाराज की मौत को आत्महत्या बता दिया और वजह गृह कलह बताई। घटना के बाद उनकी पत्नी डॉ. आयुषी को एक दिन की रियायत दी जा सकती थी, लेकिन बाकी सेवादारों से सख्ती से पूछताछ की जाती तो कई बातें सामने आ सकती थीं, लेकिन किसी भी सेवादार को थाने लाकर पूछताछ नहीं की गई। पुलिस भक्तों को भी कोई जानकारी नहीं दे रही।" भक्तों ने आरोप लगाया कि कुछ माह से सेवादार विनायक समेत कई सेवादार लापता हैं। ट्रस्ट के लोग विनायक के महाराष्ट्र स्थित घर भी गए थे, लेकिन वह वहां भी नहीं है। उसका मोबाइल भी बंद आ रहा है। 

 

छह माह बाद सीबीआई जांच की मांग इसलिए

भक्त श्याम देशमुख के मुताबिक, घटना के बाद से पुलिस जांच कर रही थी, लेकिन छह माह बाद भी पुलिस की जांच से कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। इसलिए सीबीआई जांच की मांग की है। इस बारे में भक्तों ने राज्यपाल और राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है।

 

भक्तों ने किए सवाल

 

  • बेटी को लेने एयरपोर्ट जाने वाले थे महाराज, उसके आने से पहले गोली कैसे मार ली?
  • 11 जून की रात 9.30 बजे महाराज खाने के बाद टहलने के लिए जाने वाले थे। बंगले के गेट पर ड्राइवर गाड़ी लेकर खड़ा था। रात 2.30 बजे तक ड्राइवर गाड़ी में इंतजार करता रहा, लेकिन महाराज नहीं गए। आखिर उन्हें बाहर जाने से किसने और क्यों रोका?
  • महाराज 15 दिन के लिए अज्ञात जगह जाने वाले थे। इसकी खबर घर के अन्य व्यक्तियों को कैसे मिली?
  • महाराज जब भी कमरे में अकेले रहते थे तो सबको हिदायत दी जाती थी कि उनकी इजाजत के बगैर कोई भी अंदर नहीं जाएगा। लेकिन घटना के दिन कमरे में बंद होने के महज 1-2 घंटे बाद ही दरवाजा क्यों तोड़ा गया? किसके कहने पर तोड़ा गया? 
  • कमरे का गेट तोड़ने के बाद अंदर कौन लोग गए, बयानों में भी विसंगतियां क्यों?
  • अस्पताल ले जाने के तुरंत बाद कथित सुसाइड नोट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऐसा किसने किया और क्यों? दूसरे दिन सुसाइड नोट का एक और पेज वायरल क्यों किया गया। पुलिस सुसाइड नोट वायरल करने वाले का पता क्यों नहीं लगा रही।
  • घटना वाले दिन उन्होंने खुद गन मांगी, जबकि उनके कहीं जाने का कोई तय कार्यक्रम भी नहीं था। अगर उन्होंने गन मांगी तो आखिर किसने उन्हें गन दी? कुछ दिन पहले ही पुणे में रहने वाले एक सेवादार से फोन पर जानकारी ली गई कि गन घर में कहां रखी है? यह जानकारी किसने ली और क्यों ली?

 

पत्नी डॉ. आयुषी नहीं दिखीं साथ: 2 दिसंबर को भक्त सुबह आश्रम पर बैठक के बाद आयुषी को साथ लेकर पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से सीबीआई जांच की मांग करने वाले थे, लेकिन डॉ. आयुषी साथ नहीं आईं। पदाधिकारियों द्वारा जो लेटर दिया गया, उस पर भी उनका नाम नहीं था। हालांकि पदाधिकारियों का कहना था कि उनका समर्थन है। वे भी सीबीआई जांच की मांग चाह रही हैं।

 

सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट के सचिव तुषार पाटिल ने बताया बैठक में निर्णय लिया गया कि महाराज की समाधि का काम दत्त जयंती तक पूरा करना है। घर व आश्रम में रखी महाराज की वस्तुओं को आश्रम पर रखा जाएगा और यहां पर महाराज का म्यूजियम बनाया जाएगा।

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