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राफेल / पर्रिकर की अध्यक्षता वाली परिषद ने डील की शर्तों में 8 बदलाव किए थे: रिपोर्ट

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2019, 06:59 PM IST


प्रतीकात्मक चित्र। प्रतीकात्मक चित्र।
rafale deal issue modi government made unprecedented concessions says report
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प्रतीकात्मक चित्र।प्रतीकात्मक चित्र।
rafale deal issue modi government made unprecedented concessions says report
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  • दावा- डील से पहले हटाए गए थे भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने के प्रावधान  
  • दैसो, एमबीडीए फ्रांस के खाते तक पहुंच का प्रावधान भी एग्रीमेंट के मसौदे से हटाया था

नई दिल्ली. अंग्रेजी अखबार द हिंदू ने राफेल सौदे से जुड़ा नया दावा किया है। उसका कहना है कि डील साइन होने से पहले भ्रष्टाचार विरोधी जुर्माने के प्रमुख प्रावधान और एक एस्क्रो अकाउंट हटा दिया गया था। द हिन्दू का कहना है कि रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार खत्म करने पर जोर देने का दावा करने वाली सरकार की ओर से राफेल डील में बड़ी रियायत बरती गई थी।

राफेल के सप्लाई प्रोटोकॉल में बदलाव हुआ था : द हिंदू

  1. अखबार ने आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने सितंबर 2016 में दो सरकारों के बीच हुए एग्रीमेंट, सप्लाई प्रोटोकॉल, ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट और ऑफसेट शेड्यूल में 8 बदलाव मंजूर किए थे।

  2. रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल सौदे में उच्चस्तरीय राजनीतिक दखलंदाजी हुई थी। अनुचित प्रभाव के इस्तेमाल पर जुर्माना, एजेंट कमीशन, दैसो और एमबीडीए फ्रांस कंपनी के खाते तक पहुंच के प्रावधान डील के मसौदे से हटा दिए गए थे।

  3. द हिंदू की रिपोर्ट में कह गया है कि 23 सितंबर 2016 को भारत और फ्रांस के बीच हुए एग्रीमेंट के मुताबिक दैसो राफेल विमानों की सप्लायर है और एमबीडीए फ्रांस भारतीय वायुसेना के लिए हथियारों की सप्लायर है।

  4. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल सौदे का एग्रीमेंट और दस्तावेजों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी (सिक्योरिटी) 24 अगस्त 2016 को ही मंजूर कर चुकी थी।

  5. कुछ दिन पहले ही द हिंदू ने यह दावा भी किया था कि डील के वक्त प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से समानांतर वार्ता की जा रही थी। रक्षा मंत्रालय ने उस पर आपत्ति जताई थी।

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