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लोकसभा में राहुल की एग्रेसिव स्पीच:राहुल गांधी का मोदी और शाह पर तंज- देश को चार लोग चलाते हैं, हम दो और हमारे दो

नई दिल्ली4 महीने पहले

लोकसभा में गुरुवार को बजट पर चर्चा में हिस्सा लेने आए राहुल गांधी सिर्फ किसानों के मुद्दे पर बोले। 22 मिनट के अपने भाषण में 20 मिनट कृषि कानूनों के इंटेंट और कंटेंट पर बोलते रहे। इस दौरान 8 बार हंगामा हुआ।

स्पीकर ने भी उन्हें 4 बार टोका। बोला बजट पर बात कीजिए, पर राहुल के तेवर अलग थे। आखिर के 2 मिनट में राहुल ने यह जरूर कहा कि अब बजट पर बात करते हैं, पर फिर अचानक बोल पड़े कि मैं तो आज किसानों के मुद्दे पर ही बोलूंगा। पढ़िए लोकसभा में उनके भाषण के दौरान हुआ क्या-क्या...

मैंने सोचा कि प्रधानमंत्री जी को खुश करें
राहुल ने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा, ‘कल प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि विपक्ष किसान आंदोलन की बात कर रहा है, पर कृषि कानून के कंटेंट और इंटेंट के बारे में नहीं बोल रहा। मैंने सोचा कि आज प्रधानमंत्री जी को खुश करें और जो तीन किसान बिल हैं, उनके कंटेंट और इंटेंट पर बात करें।’
इस पर भाजपा सांसदों ने पूछा- बजट पर भी बोलेंगे क्या? तो राहुल बोले- हां, हां, बजट पर भी बोलेंगे। किसान का मुद्दा, बजट का भी मुद्दा है।

जब राहुल ने कानूनों के कंटेंट के बारे में बताया- हंगामा...

  • ‘पहले कानून के कंटेंट पर बात करते हैं।’ हंगामा होने लगा, राहुल कुछ देर रुके फिर बोले- ‘कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी अनाज, फल खरीद सकता है। अगर देश में अनलिमिटेड खरीदी होगी तो मंडी में जाकर कौन खरीदेगा? पहले कानून का कंटेंट और इसका लक्ष्य मंडी को खत्म करने का है।’
  • ‘दूसरे कानून का कंटेंट है कि बड़े से बड़े उद्योगपति जितना भी अनाज-फल-सब्जी स्टॉक करना चाहते हैं, कर सकते हैं। कोई लिमिट नहीं है। दूसरे कानून का कंटेंट एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट काे खत्म करने, जमाखोरी को अनलिमिटेड तरीके से हिंदुस्तान में शुरू करने पर है।’
  • ‘तीसरे कानून का कंटेंट है कि जब एक किसान हिंदुस्तान के किसी बड़े उद्योगपति के सामने जाकर अपनी उपज के लिए सही दाम मांगे तो उसे अदालत में नहीं जाने दिया जाएगा।’ राहुल के इतना कहते ही फिर हंगामा होने लगा।

राहुल बोले- हम दो, हमारे दो का नारा बदल गया

राहुल ने अब इंटेंट के बारे में बताया। उन्होंने कहा- ‘सालों पहले फैमिली प्लानिंग में नारा था कि हम दो, हमारे दो। अब कानून के इंटेंट की बात करता हूं। आज क्या हो रहा है? जैसे कोरोना दूसरे रूप में आता है, वैसे ही यह नारा दूसरे रूप में आया है। इस देश को आज 4 लोग चलाते हैं। हम दो और हमारे दो।’ स्पीकर ने राहुल से कहा कि आप बजट पर बात कीजिए। भाजपा के सांसदों ने भी हंगामा करते हुए कहा कि नाम भी बता दो। इस पर राहुल बोले- नाम तो सब जानते ही हैं।

इसके बाद जमकर हंगामा हुआ तो स्पीकर ने टोका। इसके बाद राहुल बोले- ‘पहले कानून का इंटेंट बताता हूं कि हमारे दो मित्रों में से एक जो सबसे बड़ा मित्र है, उसे पूरे हिंदुस्तान के अनाज-फल-सब्जी बेचने का अधिकार मिल जाए। इसमें नुकसान किसका होगा? ठेले वालों, छोटे व्यापारियों, मंडी में काम करने वाले लाखों लोगों का।’

‘दूसरे कानून का इंटेंट दूसरे मित्र की मदद करने का है। दूसरे मित्र को पूरे देश में अनाज-फल-सब्जी के स्टोरेज की मोनोपॉली चाहिए। दूसरा मित्र हिंदुस्तान का 40% अनाज अपने स्टोरेज में रखता है।’ भाजपा के सांसदों ने इस पर फिर भारी हंगामा कर दिया। कहने लगे- यह कांग्रेस पार्टी की बैठक नहीं है। ये सभा नहीं है। स्पीकर ने भी कहा कि आज बजट पर चर्चा है, आप बजट पर ही बात करें।

प्रधानमंत्री ने तीन ऑप्शन दिए- भूख, बेरोजगारी और आत्महत्या
राहुल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री कहते हैं कि मैंने ऑप्शन दिया है। हां, उन्होंने तीन ऑप्शन दिए हैं। पहला ऑप्शन- भूख, दूसरा ऑप्शन- बेरोजगारी और तीसरा ऑप्शन- आत्महत्या। हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस एग्रीकल्चर का है।’ स्पीकर ने तीसरी बार टोका कि आप बजट पर बात कीजिए। भाजपा सांसदों ने कहा कि राहुल को कोई पानी दो।

इसके बाद भी राहुल नहीं रुके, उन्होंने कहा, ‘40% आबादी एग्रीकल्चर से जीती है। 40 लाख करोड़ रुपए का धंधा है। इसमें किसानों को फायदा मिलता है। दूसरे कंटेंट का इंटेंट है कि आप एक मित्र को स्टोरेज की मोनोपॉली दे दो। जिसके पास मोनोपॉली होगी, वह किसान से कम से कम पैसे में उपज खरीदेगा। वही किसान जब कंज्यूमर बनकर अपना ही माल खरीदने जाएगा तो वही व्यक्ति अपने गोदाम से वह माल देने के लिए उसे और पैसे लेगा।’

अब संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल सामने आए। बोले- ये बजट पर चर्चा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के बाद प्रस्ताव पारित कर भेजा जा चुका है। राहुल गांधी तब नहीं बोले। अब स्पीकर का भी अपमान कर रहे हैं, सदन का भी अपमान कर रहे हैं।

राहुल इस पर तल्ख हो गए और चर्चा के नियम बताने लगे। कहा- ‘इस देश के रीढ़ की हड्‌डी किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस रीढ़ की हड्‌डी को तोड़कर टुकड़े-टुकड़े कर दो मित्रों को दे दो।’

हंगामा चरम पर आ गया। अब संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी खड़े हुए। वे सदन में चर्चा के नियम बताने लगे कि यह चर्चा गलत हो रही है। मैं राहुल को याद दिलाना चाहता हूं कि वे अपना भाषण बजट पर दें। उन्होंने पहली बार अडाणी-अंबानी का नाम लिया और कहा कि इस नाम के साथ जो बात कही, उसे साबित करें।

इस पर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने भी जवाबी नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जनरल पॉइंट्स पर चर्चा की इजाजत है। क्या बजट में एग्रीकल्चर का मुद्दा नहीं है? पीछे से कांग्रेस सांसद भी चिल्लाने लगे कि अडाणी-अंबानी का नाम तो आपने खुद लिया। तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने भी कांग्रेस के समर्थन में नियमों का हवाला दिया।

राहुल ने कहा- हम दो, हमारे दो में क्यूट से मोटे-मोटे चेहरे थे
राहुल दोबारा शुरू हुए। मुस्कुराते हुए बोले- ‘आपको हम दो, हमारे दो वाली वो फोटो याद होगी। क्यूट से सुंदर-सुंदर, मोटे-मोटे चेहरे थे। खैर, इससे हाेगा क्या? जब ये कानून लागू होंगे तो इस देश के किसान, छोटे मजदूर, छोटे व्यापारियों का धंधा बंद हो जाएगा। किसानों का खेत चला जाएगा। उन्हें सही दाम नहीं मिलेगा। सिर्फ हम दो और हमारे दो इस देश को चलाएंगे। हिंदुस्तान का फूड सिक्यूरिटी सिस्टम नष्ट हो जाएगा। पहली बार हिंदुस्तान के लोगों को भूख से मरना पड़ेगा। रूरल इकोनॉमी खत्म हो जाएगी और ये देश रोजगार नहीं पैदा कर पाएगा।’

बजट पर भी आ रहा हूं, फाउंडेशन लगा रहा हूं
राहुल ने कहा, ‘ये आप मत सोचिए कि ये पहला अटेम्प्ट है। ये काम प्रधानमंत्री ने पहले नोटबंदी में शुरू किया था। पहली चोट नोटबंदी थी। गरीबों, किसानों, मजदूरों से पैसा लो, बैंक में डालो और फिर उसे हम दो, हमारे दो की जेब में डाल दो। फिर लाए GST गब्बर सिंह टैक्स। फिर उन्हीं किसानों, मजदूरों, व्यापारियों पर आक्रमण। कोरोना के समय मजदूर चिल्ला-चिल्लाकर कहते रहे कि बस-ट्रेन का टिकट दे दीजिए। वे बोले कि नहीं मिलेगा, तुम पैदल घर जाओगे। टैक्स माफ जरूर होगा, पांच-दस उद्योगपतियों का।’ हंगामा होने पर स्पीकर ने यहां उन्हें चौथी बार टोका कि ये आज बजट पर चर्चा है। इस पर राहुल बोले कि बजट पर भी आ रहा हूं, अभी फाउंडेशन लगा रहा हूं।

आंदोलन किसानों का नहीं, पूरे देश का है
राहुल ने कहा- हिंदुस्तान के रोजगार का सिस्टम यानी MSME खत्म हो गई। आज ये देश रोजगार नहीं पैदा कर सकता। क्योंकि आपने देश की रीढ़ की हड्‌डी तोड़ दी है। ये किसानों का आंदोलन नहीं है। ये देश का आंदोलन है। किसान सिर्फ रास्ता दिखा रहा है। अंधेरे में टॉर्च दिखा रहा है। फिर हंगामा होने लगा पर राहुल बोलते रहे- किसान, मजदूर, छोटा दुकानदार आपको हटा देगा, वह एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा। आपको कानून वापस लेना ही पड़ेगा।

20 मिनट किसानों पर बोलकर रुके, फिर कहा- मैं तो किसानों के मुद्दे पर ही बोलूंगा
लगभग 20 मिनट किसान और कृषि मुद्दे पर बोलने के बाद राहुल ने कहा, ‘अब बजट पर आते हैं। विपक्ष ने कहा था कि हमें मिलकर किसानों के मुद्दे पर बोलने दीजिए। स्पीकर सर ने सरकार से पूछा। सरकार ने कहा कि नहीं, किसानों के मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी, बजट पर होगी। अलग चर्चा नहीं हो सकती। विरोध में अब मैं यह कह रहा हूं कि मैं आज बजट पर यहां टिप्पणी नहीं करने वाला। मैं सिर्फ किसानों के मुद्दे पर बोलूंगा और चुप हो जाऊंगा। आखिर में यही कहना चाहता हूं कि जो 200 किसान शहीद हुए, उन्हें इन लोगों ने श्रद्धांजलि नहीं दी। मैं अपने भाषण के बाद दो मिनट मौन रहूंगा। आप लोग खड़े हाे जाइए। धन्यवाद।’

स्पीकर ने कहा- इस तरह का व्यवहार उचित नहीं
राहुल ने इशारों में अपने सांसदों से मौन रखने के लिए खड़े होने को कहा। इसके बाद भी हंगामा जारी रहा तो स्पीकर ने कहा कि इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। कोई भी सदस्य कहेगा कि मैं उत्तराखंड के लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। कोई कहेगा कि शहीदों को श्रद्धांजलि देता हूं। आप लोगों ने यह जिम्मेदारी मुझे दी है। जैसे- सैनिकों के प्रति सभी का सम्मान है, पूरे सदन और 130 करोड़ लोगों का सम्मान है। ऐसा कोई विषय है तो लिखकर दें तो मैं चर्चा करके विचार करूंगा।