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राजस्थान के गांवों से ग्राउंड रिपोर्ट:अजमेर में लोगों की जिद- पहले जिंदा रहने की गारंटी दो, फिर वैक्सीन लगवाएंगे; सीकर के गांवों में दूसरी डोज नहीं लग पा रही

एक महीने पहलेलेखक: अजमेर से दिलीप चौधरी, मनीष शर्मा, सीकर से यादवेंद्रसिंह राठौड़

कोरोना से हो रही मौतों और सरकारी मशीनरी की लापरवाही को लेकर लोगों में किस तरह की नाराजगी है, इसका उदाहरण अजमेर के गांवों में देखने को मिलता है। यहां दो गांव के लोगों ने वैक्सीन लगवाने से ही इनकार कर दिया। उनकी शर्त है कि पहले लिखकर दो कि टीका लगवाने के बाद मौत नहीं होगी।

लोगों की यह जिद तब है, जब अजमेर के 25 गांवों में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। उधर, सीकर के कुछ गांवों में लोग वैक्सीन लगवाना तो चाहते हैं, लेकिन उन्हें दूसरी डोज नहीं मिल पा रही। भास्कर के 3 रिपोर्टर्स गुरुवार को अजमेर और सीकर के गांवों में पहुंचे और वहां के हालात जानने की कोशिश की...

सबसे पहले चलते हैं अजमेर के मसूदा पंचायत समिति के केसरपुरा और लहरी गांव। केसरपुरा में 1300 लोग रहते हैं। इतने लोगों में सिर्फ एक महिला का वैक्सीनेशन हुआ है। यह महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है। उसने भी स्वास्थ्य विभाग की समझाइश के बाद टीका लगवाया।

भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जब मेडिकल टीम इन गांवों में वैक्सीनेशन के लिए पहुंची तो लोगों ने बेतुकी शर्त रख दी कि टीका लगवाने के बाद मौत नहीं होने की लिखित गारंटी चाहिए। जब भी टीम गांव में वैक्सीनेशन के लिए आती है तो या तो गांव के लोग घरों में दुबक जाते हैं गए या फिर टीम का विरोध कर घेर लेते हैं। इस बारे में भास्कर टीम ने गांव में जाकर लोगों से बात करने की काेशिश की, लेकिन लोग सामने आने से बचते रहे और चुप्पी साध ली।

खरवा पीएचसी की मेडिकल ऑफिसर गरिमा कुमावत का कहना था कि हमने दो बार टीम भेजकर केसरपुरा और लहरी गांव में वैक्सीनेशन की कोशिश की। लोगों को समझाया, लेकिन गांव के लोग जिद कर रहे हैं कि हमें यह लिखकर दो कि वैक्सीनेशन के बाद मौत नहीं होगी, तभी वैक्सीनेशन कराएंगे, वर्ना नहीं।

न जांच की व्यवस्था, न क्वारैंटाइन
अजमेर के ब्यावर खास, फतेहगढ़, किशनपुरा, खरवा, बेगलियावास, सरमालिया, केसरपुरा, लहरी, राजियावास, रामपुरा, जेठाना, बड़ाखेड़ा, रावला बाडिया, गोपालपुरा समेत कई गांवों में लगातार मौतों के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इन गांवों में न तो क्वारैंटाइन होने की कोई व्यवस्था है, न ही सैम्पल कलेक्शन के इंतजाम हैं।

सीकर के गांवों में वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लग रही
जब हम सीकर के नीमकाथाना और आसपास के इलाकों में पहुंचे तो पाया कि गांवाें के हालात बेहद खराब हाे चुके हैं। नीमकाथाना में एक भी गांव ऐसा नहीं है, जहां कोई कोरोना पॉजिटिव मरीज नहीं है। अस्पतालों में बेड खाली नहीं हैं। हेल्थ सेंटर्स में सुबह ही मरीजाें की कतारें लग जाती है। चिंताजनक स्थिति यह है कि गांवों में वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं लग रही।

जब हम नीमकाथाना के सबसे बड़े कपिल अस्पताल पहुंचे तो पाया कि 43 बेड में से एक भी खाली नहीं है। यदि कोई भर्ती होने आता है तो उसे ठीक होने वाले मरीज के डिस्चार्ज होने का इंतजार करना पड़ता है। फिलहाल 43 पॉजिटिव भर्ती हैं। इनमें 4 वेंटिलेटर पर हैं। दर्दनाक यह कि हर दिन 3 से 4 लोगों की मौत हो रही है, लेकिन यह सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं की जाती। अगर किसी की स्थिति ज्यादा गंभीर होती है तो उसे 100 किमी दूर सीकर के कोविड सेंटर में रेफर कर दिया जाता है।

लोग बिना मास्क के घूम रहे
गुहाला ग्राम पंचायत में 18 अप्रैल काे पॉजिटिव केस सामने आया, तब से लेकर 12 मई तक 96 पॉजिटिव मिल चुके हैं। गांव की आबादी 8500 है। कोरोना से 4 लोगों की मौत हो चुकी हैं। हेल्थ सेंटर पर मरीजों की कतारें लगी थीं। मेडिकल स्टोर खुले हैं, लेकिन बिना मास्क के ही दवा बेची जा रही है। पुलिस का कोई डर नहीं है। लोग बेखौफ होकर बिना मास्क के घूम रहे हैं।

सीएचसी प्रभारी डाॅ. आनंद कुमार कहते हैं, 45 से अधिक उम्र के 5396 और 18 से ऊपर के 464 लाेगाें को वैक्सीन की पहली डाेज लग चुकी है। वैक्सीन हर दिन नहीं मिल पा रही, इसलिए दिक्कत हो रही है।

उधर, सिराेही नीमकाथाना उपखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। यहां 20 हजार की आबादी हैं। बीसीएमओ डाॅ. अशाेक यादव बताते हैं, 41 ग्रामीण काेविड पाॅजिटिव हैं। अब तक एक की मौत हुई है, जबकि पंचायत के सरपंच जयप्रकाश कस्वा दावा करते हैं कि बुधवार को ही 5 लोगों की मौत हो गई। गांव में अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री है, जिसके बहुत से मजदूर काेविड पाॅजिटिव आए और काेराेना फैला।

वे आरोप लगाते हैं कि कई बार कहने के बाद भी सैंपल नहीं लिए जा रहे हैं। वे बताते हैं कि सिराेही के हेल्थ सेंटर में 13 मार्च काे 45 साल से ऊपर के 2611 लाेगाें के वैक्सीन लगी थी, लेकिन दाे महीने बाद भी इन लाेगाें के दूसरी डाेज नहीं लग पाई है।

मास्क से ही बना रखी है दूरी
कुरबड़ा गांव में 23 लाेग काेविड पॉजिटिव हैं। भास्कर टीम पहुंची तो ठाकुर जी के मंदिर में 6-7 लाेग बिना मास्क लगाए ताश खेलते नजर आए। उनके पास कुछ लाेग बिना मास्क के खड़े थे। जैसे ही फाेटाे खींचने लगे वे लाेग मुंह छिपाने लगे। वहीं, गणेश्वर में अभी तक 25 लाेग पाॅजिटिव पाए गए हैं, जिनमें से कुछ लाेग अब निगेटिव हाे चुके हैं। खाली मैदान में शाम को लड़के बिना मास्क लगाए ही क्रिकेट खेलते दिखे।

अजमेर और सीकर के गांवों के उन लोगों की बात, जिन्होंने अपनों को खोया
1. चार घंटे में ही बच्चों ने माता-पिता को खो दिया
​​​​​​अजमेर जिले की जवाजा पंचायत समिति के गांव राजियावास में एक परिवार पर कोरोना कहर बन कर टूटा है। उम्र के आखिरी पड़ाव में हरि सिंह और दाखूदेवी के कंधों पर अपने पोते और पोती की जिम्मेदारी आ पड़ी है। हरि सिंह का बेटा देवी सिंह उर्फ कालू भाई भीलवाड़ा में सुरक्षा गार्ड था। लॉकडाउन के चलते वह घर आ गया। कुछ ही दिन में उसकी तबीयत खराब हुई। ब्यावर के अमृतकौर सरकारी अस्पताल में उसे भर्ती किया गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पति के मौत के सदमें में चार घंटे बाद पत्नी भी गुजर गई। अब बच्चों की जिम्मेदारी दादा-दादी के बूढ़े कंधों पर है।
पति के मौत के सदमें में चार घंटे बाद पत्नी भी गुजर गई। अब बच्चों की जिम्मेदारी दादा-दादी के बूढ़े कंधों पर है।

परिवार वालों ने उसकी पत्नी को यह बात नहीं बताने का फैसला लिया। करीब चार घंटे बाद पत्नी लक्ष्मी को शक हुआ कि कुछ तो अनहाेनी हुई है। वह बेसुध हो गई। परिवार के लोग उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां उसकी भी मौत हो गई। कोरोना के कहर ने दो मासूमों के सिर से पिता का साया और मां का आंचल, दोनों ही छीन लिए।

12 साल की दीक्षा और 10 साल का रचित अब दादी-दादी के साथ रहेंगे। जब भास्कर की टीम उनके घर पहुंची तो बात करते-करते दाखूदेवी की आंखों से आंसू बहने लगे। यह देखकर रचित और दीक्षा भी रोने लगे। रोते-रोते दादी से लिपटकर चुप कराने लगे। रचित अपनी दादी को समझाता रहा कि रो मत। मैं हूं ना।

2. माता-पिता और भाई की मौत, खुद अस्पताल में
जवाजा पंचायत समिति के ही गांव फतेहगढ़ सल्ला के रतनपुरा सरदारा में पिछले 10 दिनों में कोरोना एक परिवार पर कहर बन कर टूटा है। गांव के अकबर के पिता नंदू की कोरोना के चलते 22 अप्रैल को मौत हो गई। उसकी मां मीना ने भी इलाज के दौरान 2 मई को दम तोड़ दिया।

अकबर अभी इन सदमों से उबर भी नहीं पाया था कि 5 मई को उसके 19 साल के भाई फिरोज की भी मौत हो गई। अकबर खुद अस्पताल में भर्ती रहा, जहां से डिस्चार्ज होते ही उसे ससुराल वाले अपने साथ ले गए। परिवार के 3 लोगों की मौत हो जाने के बाद अकबर के घर पर अब ताला है।

परिवार के 3 लोगों की मौत हो जाने के बाद अकबर के घर पर अब ताला है।
परिवार के 3 लोगों की मौत हो जाने के बाद अकबर के घर पर अब ताला है।

3. बेटे की मौत, अब परिवार के हालात खराब
सीकर के सिरोही गांव के 32 साल के ज्याेतिष की कोरोना से जान चली गई। पिता ने बताया कि देखते ही देखते बेटा चला गया। समय पर जांच और इलाज नहीं मिलने से बेटे की मौत हुई। अब उसके तीन बच्चों, पत्नी और हम बूढ़े मां-बाप के पास इनकम का कोई साेर्स नहीं है। बेटा इकलौता कमाने वाला था, घर की आर्थिक हालत खराब है।

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