नसीहत / भारत कोई डंपिंग बाजार नहीं, अमेरिका को यह समझने की जरूरत: राम माधव



भाजपा महासचिव राम माधव। भाजपा महासचिव राम माधव।
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भाजपा महासचिव राम माधव।भाजपा महासचिव राम माधव।

  • भाजपा महासचिव राम माधव ने नई दिल्ली में सोमवार को यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) को संबोधित किया
  • उन्होंने कहा- चीन भारत का करीबी पड़ोसी, हमें वैश्विक और क्षेत्रीय दबावों से परे बढ़ती साझेदारी को देखने की जरूरत
  • कार्यक्रम में अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस भी मौजूद थीं, उन्होंने चेतावनी दी- चीन भारत के साथ गुरिल्ला युद्ध लड़ रहा

Dainik Bhaskar

Oct 22, 2019, 10:41 AM IST

नई दिल्ली. भाजपा महासचिव राम माधव ने सोमवार को कहा कि हमारी पार्टी इस विचार का स्वागत करती है कि भारत को अपने हितों का ख्याल रखते हुए ज्यादा देशों के साथ जुड़ना चाहिए। साथ ही कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार साझेदारी के महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं। लेकिन एक बात जिसे अमेरिका को समझने की जरूरत है, वह यह कि हम एक डंपिंग बाजार नहीं हैं। सरकार चाहती है कि भारत घरेलू बाजार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आगे बढ़ाते हुए ट्रेडिंग हब के तौर पर उभर कर सामने आए।

 

नई दिल्ली में यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) को संबोधित करते हुए माधव ने कहा कि रक्षा, संचार, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा प्रमुख क्षेत्र हैं। आज हमारे पास व्यापारिक साझेदारी डील करने के लिए सबसे अच्छा दिमाग है। चीन भारत का करीबी पड़ोसी है और हमें वैश्विक और क्षेत्रीय दबावों से परे बढ़ती साझेदारी को देखने की जरूरत है।

 

चीन-भारत संबंध अमेरिका से बेहतर: माधव

माधव ने कहा, ‘‘जिस तरह से भारत और चीन दोनों आगे बढ़ रहे हैं, हमें प्रतिस्पर्धी होने और इस क्षेत्र में सभी तरीकों से संसाधनों का उपयोग करने की भी आवश्यकता है। मैं यह स्पष्ट रूप से बताना चाहूंगा कि आज चीन-भारत संबंध अमेरिका-भारत संबंधों से बहुत बेहतर हैं।’’

 

अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री ने भारत को चेताया

कार्यक्रम में मौजूद अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने माधव के बयान पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, ‘‘चीन भारत के साथ गुरिल्ला युद्ध खेल रहा है। हर कोई इसे देख रहा है, लेकिन भारत अभी भी कई तरीकों से उनसे जुड़ना चाहता है। आज भारत को सभी क्षेत्रों में विकास के लिए निजी क्षेत्र के साथ जुड़ने की जरूरत है। उन्हें यह देखने की जरूरत है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था ने कैसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का उपयोग किया। साथ ही विकास के बुनियादी ढांचे को एक साथ विकसित और मजबूत किया। भारत अपनी अर्थव्यवस्था के साथ बहुत कुछ करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा इसे दी गई कम रेटिंग के कारण कई चुनौतियां भी हैं।’’

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