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अयोध्या विवाद / 5 सदस्यीय नई बेंच आज से करेगी सुनवाई, रोजाना सुनवाई पर भी हो सकता है फैसला



ram mandir temple: 5 judges bench will hear ayodhya vivad case from today, ram janam bhumi vivad news and update
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ram mandir temple: 5 judges bench will hear ayodhya vivad case from today, ram janam bhumi vivad news and update

  • इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़
  • नई बेंच इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई करेगी

Dainik Bhaskar

Jan 10, 2019, 06:39 AM IST

नई दिल्ली. अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई गुरुवार को फिर एक बार टल गई। इसकी नई तारीख 29 जनवरी तय की गई है। कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने पांच जजों की बेंच में जस्टिस यूयू ललित के होने पर सवाल उठाया। इसके बाद जस्टिस ललित खुद ही बेंच से अलग हो गए। यह सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर हो रही थी।

 

सुनवाई शुरू होते ही धवन ने कहा कि मैं जस्टिस ललित को याद दिलाना चाहता हूं कि आप 1994 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के वकील रहे हैं। यह बाबरी केस से जुड़ा अवमानना का मामला था। हालांकि, इतना कहने के बाद उन्होंने खेद जताया। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा- आप खेद क्यों जता रहे हैं। आपने तो सिर्फ तथ्य सामने रखा है। उत्तरप्रदेश सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि जस्टिस ललित के बेंच में शामिल होने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, जस्टिस ललित खुद ही केस से अलग हो गए।

 

संविधान पीठ बनाने पर भी उठाए सवाल

राजीव धवन ने यह केस तीन जजों की बेंच की बजाय पांच जजों की बेंच के पास भेजने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा यह मामला पहले तीन जजों की बेंच के पास था, अचानक पांच जजों की बेंच के सामने गया। इस पर कोई न्यायिक आदेश भी जारी नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ का गठन करना चीफ जस्टिस का अधिकार है।

 

14 अपीलों पर होनी है सुनवाई

पहले इस मामले की सुनवाई पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच कर रही थी। 2 अक्टूबर को उनके रिटायर होने के बाद केस चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली दो सदस्यीय बेंच में सूचीबद्ध किया गया। इस बेंच ने 4 जनवरी को केस की सुनवाई की तारीख 10 जनवरी तय की थी। मंगलवार को इसके लिए पांच जजों की बेंच तय की गई थी। इसमें जस्टिस यूयू ललित के अलावा, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे।

 

लोकसभा चुनाव की वजह से मंदिर पर राजनीति गरमाई
लोकसभा चुनाव नजदीक होने की वजह से राम मंदिर मुद्दे पर राजनीति भी गरमा रही है। केंद्र में एनडीए की सहयोगी शिवसेना ने कहा है कि अगर 2019 चुनाव से पहले मंदिर नहीं बनता तो यह जनता से धोखा होगा। इसके लिए भाजपा और आरएसएस को माफी मांगनी पड़ेगी। उधर, केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने अध्यादेश लाने का विरोध करते हुए कहा कि सभी पक्षों को सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही मानना चाहिए। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि न्यायिक प्रकिया पूरी हो जाने के बाद एक सरकार के तौर पर जो भी हमारी जिम्मेदारी होगी हम उसे पूरा करने के लिए सभी प्रयास करेंगे।

 

क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला?
हाईकोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने 30 सितंबर, 2010 को 2:1 के बहुमत वाले फैसले में कहा था कि 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दिया जाए। इस फैसले को किसी भी पक्ष ने नहीं माना और उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। शीर्ष अदालत ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट में यह केस पिछले आठ साल से है।

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