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सरकार और ट्विटर में तकरार:रविशंकर प्रसाद बोले- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन नहीं करना चाहते, लेकिन कानून का पालन करना होगा

नई दिल्ली3 महीने पहले
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माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर और केंद्र सरकार में चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं। हमारी सरकार आलोचनाओं को स्वीकार करती है, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कानूनों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रविशंकर ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हमें लोकतंत्र पर भाषण नहीं देना चाहिए। भाजपा असम में चुनाव जीती है तो पश्चिम बंगाल में चुनाव हारी भी है। ये हमारे लोकतांत्रिक होने का सबसे बड़ा सबूत है।

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में ट्विटर पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आधी सरकार ट्विटर पर है। PM और राष्ट्रपति ट्विटर पर हैं, मैं ट्विटर पर हूं। यह दिखाता है कि हम कितने निष्पक्ष हैं। हम किसी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं हैं, लेकिन आपको कानून का पालन करना होगा।

ट्विटर के पैसे कमाने से परेशानी नहीं
उन्होंने आगे कहा कि भारत में अदालतें-मीडिया सरकार और मंत्रियों से सवाल करते हैं। हमारे देश में आज ट्विटर के 100 करोड़ यूजर्स हैं। खुशी की बात है। हमें उनके पैसे कमाने से कोई परेशानी नहीं है। हमें ट्विटर पर लोगों के सरकार की आलोचना करने से भी दिक्कत नहीं है, लेकिन भारत से लाभ कमाने वाली कंपनी हमें ही लोकतंत्र पर भाषण देने लगती है।

ट्विटर के इंटरमेडियरी स्टेटस (सरंक्षण) को खत्म करने के सवाल पर रविशंकर ने कहा कि ये फैसला सिर्फ उनका नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सरकार के IT नियमों का पालन कर सकते हैं तो ट्विटर को क्या परेशानी है?

दूसरी कंपनियों ने नियम माने, ट्विटर ने नहीं
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हमने तीन महीने के अंदर 3 अधिकारी नियुक्त करने को कहा था। दिया गया समय 26 मई को खत्म हो गया। इसके बाद भी हमने एक मौका और दिया। इसके बाद भी ग्रीवांस ऑफिसर, नोडल ऑफिसर और चीफ कम्पलॉयंस ऑफिसर की नियुक्ति नहीं की गई। दूसरी कंपनियों ने इस नियम का पालन किया, लेकिन ट्विटर ने नहीं।

नए IT नियम की धारा 7 के मुताबिक, यदि आप नियम का पालन नहीं करते हैं तो आपका इंटरमेडियरी स्टेटस खत्म हो जाता है। इसके बाद यूजर के कंटेंट की पूरी जवाबदारी कंपनी की हो जाती है। उन्होंने कहा कि यूट्यूब, फेसबुक और वाट्सऐप का इंटरमेडियरी स्टेटस अब भी कायम है।

नियमों का पालन इसलिए जरूरी
उन्होंने दो मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि नए नियमों का पालन करना क्यों जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2018 में प्रज्ज्वला केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं की सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं के सेक्सुअल हैरेसमेंट से बचा जाना चाहिए। इसके बाद सितंबर 2019 में एक मैसेज की वजह से हिंसा हुई थी। इस पर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था।

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