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लोन / आरबीआई गवर्नर ने कहा- सभी बैंकों को ब्याज दरें रेपो रेट से जोड़ देनी चाहिए



आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास।
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आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास।आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास।

  • इससे रिजर्व बैंक के रेट घटाने का फायदा ग्राहकों को जल्द मिल पाएगा
  • एसबीआई समेत 7 बैंक ब्याज दरों को रेपो रेट से लिंक कर चुके
  • सरकार पर निर्भर रहने की बजाय बैंक बाजार से पूंजी हासिल करने के योग्य बनें: आरबीआई गवर्नर

Dainik Bhaskar

Aug 19, 2019, 01:27 PM IST

मुंबई. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि अब सभी बैंकों को ब्याज और जमा की दरें रेपो रेट से जोड़ देनी चाहिए। इससे आरबीआई के रेट कट का फायदा ग्राहकों को जल्द मिल पाएगा। दास ने कहा कि इसके लिए जरूरी कदम उठाएंगे।

आरबीआई इस साल रेपो रेट में 1.10% कटौती कर चुका

  1. शक्तिकांत दास ने कहा कि कई बैंक ब्याज दरों खासकर नए लोन की इंटरेस्ट रेट को रेपो रेट से जोड़ रहे हैं। यह सकारात्मक है लेकिन, इसमें तेजी की जरूरत है। अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए मॉनेटरी पॉलिसी का ट्रांसमिशन भी जरूरी है।

  2. आरबीआई इस साल रेपो रेट में 1.10% कटौती कर चुका है। लेकिन, अधिकतर बैंकों ने ग्राहकों को इतना फायदा नहीं दिया। रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंकों को आरबीआई से कर्ज मिलता है। इसमें कटौती होने से बैंकों पर लोन की दरें सस्ती करने का दबाव बढ़ता है।

  3. एसबीआई ने सबसे पहले मई में जमा की दरों को रेपो रेट से जोड़ दिया था। जुलाई से होम लोन को भी लिंक कर दिया। बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक और केनरा बैंक समेत 6 अन्य बैंकों ने भी पिछले हफ्ते इसका ऐलान किया।

  4. आरबीआई गवर्नर ने इकोनॉमिक ग्रोथ में गिरावट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निराशा के माहौल से किसी को फायदा नहीं होगा। साथ ही कहा कि ग्रोथ रेट सभी के लिए प्राथमिकता है और सभी नीति निर्माताओं को इसकी चिंता है।

  5. शक्तिकांत दास ने भरोसा दिलाया कि नकदी संकट ग्रोथ में आड़े नहीं आएगा। दास ने कहा कि मंदी की आहट के साथ उम्मीद से कम ग्रोथ वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा जोखिम है।

  6. दास ने खराब हाल वाले सरकारी बैंकों के कॉरपोरेट गवर्नेंस में सुधार की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सरकार पर निर्भर रहने की बजाय बाजार से पूंजी हासिल करना ऐसे बैंकों की असली परीक्षा है। दास ने कहा कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में हुए संशोधन से बैंकिंग सेक्टर को फायदा होगा।

     

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