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बयान / संघ विचारक गुरुमूर्ति ने कहा- जेएनयू का डीएनए राष्ट्र विरोधी, इसे सुधारा जाए या फिर फौरन बंद किया जाए

आरएसएस विचारक एस. गुरुमूर्ति आरबीआई के अंशकालिक निदेशक भी हैं। - फाइल आरएसएस विचारक एस. गुरुमूर्ति आरबीआई के अंशकालिक निदेशक भी हैं। - फाइल
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आरएसएस विचारक एस. गुरुमूर्ति आरबीआई के अंशकालिक निदेशक भी हैं। - फाइलआरएसएस विचारक एस. गुरुमूर्ति आरबीआई के अंशकालिक निदेशक भी हैं। - फाइल

  • एस. गुरुमूर्ति ने कहा- जेएनयू की स्थापना की पृष्ठभूमि में भारत विरोधी विचारधारा
  • 1982 में कांग्रेस सरकार के वक्त भी जेएनयू के भीतर पुलिस दाखिल हुई थी- गुरुमूर्ति

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2020, 05:47 PM IST

चेन्नई. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचारक और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के अल्पकालिक निदेशक स्वामीनाथन गुरुमूर्ति ने बुधवार को कहा कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) का डीएनए देश विरोधी है। उन्होंने कहा कि जेएनयू को या तो सुधार जाए, या फिर इसे फौरन बंद कर दिया जाए। गुरुमूर्ति का यह बयान हाल ही में जेएनयू परिसर में हुई हिंसा के संदर्भ में आया।

जेएनयू में 5 जनवरी को हुई हिंसा में नकाबपोश लोगों ने मारपीट और तोड़फोड़ की थी। इस दौरान छात्र संघ अध्यक्ष आइशी घोष समेत 20 छात्र और शिक्षक घायल हुए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि हिंसा फैलाने वालों में आइशी घोेष भी शामिल हैं। 

जेएनयू देश की परंपरा और मूल्यों के विरोधियों को जन्म देती है- गुरुमूर्ति

गुरुमूर्ति ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “जेएनयू के गठन की पृष्ठभूमि भारत विरोधी रही है। यह देश की विरासत, परंपरा, आध्यात्मिकता और मूल्यों के विरोधियों को जन्म देती है। 1969 में जब कांग्रेस में विभाजन हुआ था तब वामपंथियों ने इंदिरा गांधी को समर्थन किया था। इसके लिए उसने शिक्षा विभाग देने की मांग रखी थी। नूर हसन को शिक्षा मंत्री बनाया गया। जेएनयू की स्थापना के पीछे उनका ही दिमाग था कि इसे किस प्रकार चलाया जाए और किस प्रकार की विचारधारा को स्थान दिया जाए?”

1982 में 43 दिनों के लिए यूनिवर्सिटी को बंद किया गया
उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है कि जेएनयू में सरकार के खिलाफ हिंसा हुई है। इससे पहले 1982 में ऐसी घटनाएं हो चुकी है और इस दौरान कांग्रेस की सरकार थी। इस समय पुलिस संस्थान के अंदर गई और छात्रों पर कार्रवाई की। 43 दिनों के लिए यूनिवर्सिटी को बंद कर दिया गया। इसलिए यह पहली बार नहीं है। जेएनयू जैसे संस्थान को सुधारने की आवश्यकता है और यदि ऐसा नहीं होता है तो इसे बंद किया जा सकता है।”

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