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महामारी पर एक्शन में 3 हाईकोर्ट:बॉम्बे और MP हाईकोर्ट ने रेमडेसिविर का इंतजाम करने को कहा, इलाहाबाद HC का UP के 5 शहरों में लॉकडाउन का आदेश

नागपुरएक वर्ष पहले
देश में कोरोना की दूसरी लहर में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लोगों को रेमडेसिविर और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ रहा है।
  • एक तरफ हाईकोर्ट रेमडेसिविर की कमी पर सरकारों को फटकार लगा रहे हैं, दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि रेमडेसिविर जीवनरक्षक दवाई नहीं है

देश में कोरोना महामारी से मचे हाहाकार के बीच देश के 3 हाईकोर्ट एक्शन में दिखाई दे रहे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने रेमडेसिविर के मनमाने बंटवारे पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई, तो MP हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि वह जरूरत के वक्त दिनों के बजाय रेमडेसिविर इंजेक्शन को घंटों में उपलब्ध कराए। इधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संक्रमण को देखते हुए उत्तर प्रदेश के पांच शहरों में लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को फटकारा
महाराष्ट्र में रेमडेसिविर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने नोटिस लिया है। कोर्ट की नागपुर बेंच ने सोमवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि राज्यों को यह इंजेक्शन किस आधार पर बांटा जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र में देश के 40% कोरोना मरीज हैं तो उन्हें रेमडेसिविर भी उसी हिसाब से दिए जाने चाहिए। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जिलों को मनमाने तरीके से रेमडेसिविर का बंटवारा किया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने 13 अप्रैल और 18 अप्रैल को नागपुर में रेमडेसिविर की एक भी वायल (शीशी) क्यों नहीं भेजी? अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि सोमवार रात 8 बजे तक 10 हजार डोज नागपुर भेजी जाए।

MP हाईकोर्ट ने कहा- दिनों में नहीं घंटो में मिले रेमडेसिविर

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमितों के इलाज में हो रही लापरवाही पर मप्र हाइकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को 49 पेज के विस्तृत आदेश देकर 19 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की है। आदेश में हाईकोर्ट ने कहा, 'हम मूकदर्शक बनकर यह सब नहीं देख सकते। कोरोना के गंभीर मरीजों को एक घंटे में अस्पताल में ही रेमडेसिविर इंजेक्शन सरकार उपलब्ध कराए। केंद्र सरकार रेमडेसिविर का उत्पादन बढ़ाए। अगर जरूरत पड़े तो आयात करे।' हाईकोर्ट ने कहा कि​​​​ इलाज के नाम पर प्राइवेट अस्पताल मनमानी रकम न वसूल सकें, यह भी तय किया जाना चाहिए।

UP के 5 शहरों में लॉकडाउन का आदेश
उत्तर प्रदेश कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई। इस दौरान जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजीत कुमार की डिवीजन बेंच ने प्रदेश के सबसे ज्यादा कोविड-19 प्रभावित पांच शहर प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, कानपुर नगर और गोरखपुर में आगामी 26 अप्रैल तक लॉकडाउन लगाने का आदेश दिया है। इससे पहले भी कोर्ट ने यूपी सरकार को लॉकडाउन का सुझाव दिया था। इसके बाद ही यूपी सरकार ने प्रदेश के कई जिलों में नाइट कर्फ्यू लगाया था।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा- रेमडेसिविर जीवनरक्षक नहीं
एक तरफ अदालतें रेमडेसिविर के लिए राज्य सरकारों को आदेश दे रही हैं, दूसरी तरफ स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिविर जीवन रक्षक दवाई नहीं है। इसे केवल अस्पतालों में मेडिकल सुपरविजन में ही दिया जाना चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि रेमडेसिविर का गैर जरूरी इस्तेमाल नैतिक तौर पर भी गलत है। रेमडेसिविर एक्सपेरिमेंटल और इन्वेस्टिगेशनल ड्रग है, जिसे इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

मंत्रालय ने कहा कि रेमडेसिविर कोविड मरीजों की जान बचाने वाली दवा नहीं है। स्टडीज दिखाती हैं कि इससे कोरोना मरीजों की मौतों में कमी नहीं आई है। इसे केवल कोरोना के मध्यम लक्षणों वाले उन मरीजों को दिया जाना चाहिए, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। इसे किसी भी हालत में घर पर नहीं दिया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र में हर 3 मिनट में एक मरीज दम तोड़ रहा
महाराष्ट्र में हर घंटे करीब 2,859 लोग संक्रमित हो रहे हैं और हर तीन मिनट पर एक मरीज दम तोड़ रहा है। मृतकों की कुल संख्या भी 60 हजार के पार पहुंच चुकी है। पिछले 24 घंटों में यहां 503 लोगों की मौत हुई है। दुनिया के 209 देशों से ज्यादा मौतें सिर्फ महाराष्ट्र में हुई हैं।

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