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केरल / अनुकंपा नियुक्ति पर बेटी को सफाईकर्मी बनाया, 12 साल बाद काबिलियत से अंग्रेजी की शिक्षिका बनीं

लिंजा के इस मुकाम को हासिल करने की शुरुआत 2001 से हुई थी। लिंजा के इस मुकाम को हासिल करने की शुरुआत 2001 से हुई थी।
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लिंजा के इस मुकाम को हासिल करने की शुरुआत 2001 से हुई थी।लिंजा के इस मुकाम को हासिल करने की शुरुआत 2001 से हुई थी।

  • 39 साल की लिंजा आरजे ने सफाईकर्मी के काम के साथ बीए, एमए, बीएड और केटीईटी की परीक्षाएं पास कीं
  • 2001 में पिता की मौत के बाद कन्हंगड़ स्थित इक्बाल हायर सेकंडरी स्कूल ने योग्यता और वैकेंसी के आधार पर काम का ऑफर दिया था

दैनिक भास्कर

Mar 18, 2020, 09:47 AM IST

कन्हंगड़. केरल के कन्हंगड़ स्थित इक्बाल हायर सेकंडरी स्कूल में 39 साल की लिंजा आरजे सफाईकर्मी थीं। उन्हें पिता के निधन के बाद अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। आज वह इसी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं। लिंजा की तरक्की को देख स्कूल की हेडमिसट्रेस प्रवीना एमवी ने कहा, ‘‘वह एक दिन स्कूल की प्रिंसिपल भी बन सकती है।’’ लिंजा के इस मुकाम को हासिल करने की शुरुआत 2001 से हुई थी। वह स्नातक के आखिरी साल में थी, जब 47 साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था। 

लिंजा के पिता स्कूल में संस्कृत पढ़ाते थे। लिंजा की योग्यता के आधार पर स्कूल ने उन्हें सफाईकर्मी का काम अनुकंपा के रूप में ऑफर किया। उन्हें यह ऑफर वैकेंसी नहीं होने के कारण दिया गया था। लिंजा का भाई दसवीं में था और परिवार की जरूरत को देखते हुए लिंजा ने सफाई कर्मी का काम स्वीकार कर लिया। लिंजा ने बताया, जब स्कूल में सफाई का काम नहीं होता तब मैं हेड मिसट्रेस के रूम में बैठकर पढ़ती थी। यहां काम के साथ पढ़ाई करते हुए मैंने बीए और इंग्लिश में एमए किया। 

2016 में मैंने स्कूल से चौकीदार और सफाईकर्मी का पद से छुट्‌टी ले ली और बीएड की तैयारियों में लग गई। यह स्कूल में शिक्षिका बनने के लिए जरूरी था। इसके साथ ही निजी स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाना शुरू किया। मैंने यह काम पांच साल 2012 तक किया। 2013 में इक्बाल स्कूल ने फिर मुझे सफाई कर्मी के तौर पर जॉइन करने के लिए कहा। मैंने दोबारा जॉइन कर लिया। अब मैं अपने जॉब से संतुष्ट थी। 

जब क्लास में पहुंची तो छात्र अचंभित थे
लिंजा ने बताया, ‘‘जब मैंने 2001 में स्कूल जॉइन किया तब मुझे अभिमान था कि मैं अंडर ग्रेजुएट हूं, लेकिन जब मैंने एमए और बीएड कर दोबारा स्कूल जॉइन किया तब मैं धरातल से जुड़ी थी और योग्यता मुझसे ऊंची थी। मैंने 2013 से लेकर 2018 तक सफाईकर्मी का काम किया। टीचर्स की पोस्ट निकली जब प्राइमरी टीचर के लिए आवेदन दिया। चयनित हुई और जब क्लास में पहुंची तो छात्र अचंभित थे। उन्हें लगा, मैं किसी अब्सेंट टीचर की जगह आकर खड़ी हुई हूं। इसके बाद मैंने उन्हें अंग्रेजी में संबोधित कर पढ़ाना शुरू किया। यह न केवल मेरे लिए जरूरी था बल्कि मुझे इसे साबित करना था। यह छात्रों के दिमाग में बैठी मेरी सफाई कर्मी की छवि को हटाने के लिए भी जरूरी था। मैंने काम के दौरान कभी मलयालम इस्तेमाल नहीं की। यही कारण है कि छटवीं और सातवीं के मेरे छात्र इंग्लिश कम्यूनिकेशन करते हैं।’’

लिंजा आरजे ने 2013 से लेकर 2018 तक दोबारा सफाईकर्मी का काम किया।

यदि उसे सफाईकर्मी रहने देती तो स्कूल और छात्रों का बड़ा नुकसान होता
हेडमिसट्रेस प्रवीना एमवी ने बताया, ‘‘वह शाम को स्कूल को सजाती और सुबह सफाई का काम करती थी। इसके बाद मिले समय को वह सोशल मीडिया पर बिताकर बर्बाद करती थी। मैंने उसमें टैलेंट देखा और कहा- वह टीचर्स एलिजीबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की तैयारी करे। तब उसने दो बच्चों की (हाल में हुई लड़की और 6 साल के लड़के) परवरिश का हवाला दिया। लेकिन जब मैंने उसे बताया कि गरीबी के कारण मेरी शादी जल्दी हो गई थी। मैंने भी दो बच्चों के साथ अपनी उच्च शिक्षा पूरी की तब वह तैयार हुई। इसके बाद लिंजा के लिए इक्बाल स्कूल फिर से अध्ययन शाला बन गया। वह अपने फ्री टाइम में टीईटी की तैयारी करने लगी। लिंजा ने केरल टीईटी का दूसरा और तीसरा टेस्ट पास किया। इस आधार पर वह प्राइमरी और मिडिल स्कूल में पढ़ा सकती थी। इसके बाद उसने फाइनल टेस्ट पास किया और हायर सेकंडरी स्कूल में पढ़ाने की योग्यता हासिल कर ली। उसने कम्प्यूटर भी सीखा। इस सबके बीच उसने कभी अपना सफाई का काम नहीं छोड़ा। उसमें लीडरशिप क्वालिटी है। यदि में उसे सिर्फ सफाईकर्मी तक रहने देती तो यह स्कूल और छात्रों का बड़ा नुकसान होता। ’’

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