ग्राउंड रिपोर्ट / सेना ने कश्मीर में मांओं से कहा- अपने बेटों को आतंकी बनने से रोक लें

उपमिता वाजपेयी

उपमिता वाजपेयी

Mar 17, 2019, 10:07 AM IST


फाइल फोटो फाइल फोटो
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  • शहीद की मां का दर्द- मैं कुछ कहूंगी तो वो छोटे बेटे को भी मार देंगे
  • आतंकी की मां- ‘कौन मां चाहेगी कि उसका बेटा यूं टुकड़ों में घर लौटे'

ठीक सालभर पहले की बात है- घाटी का खूबसूरत गांव करावूरा देर रात अचानक दहल उठा। एनकाउंटर शुरू हो गया था। जरीना अशरफ का 19 साल का बेटा, जो 6 महीने पहले ही आतंकी बना था, इस एनकाउंटर में घायल हो गया। उसे तीन गोलियां लगीं, पर बच गया। कुछ दिन श्रीनगर के अस्पताल में इलाज चला और फिर उसे जम्मू की सेंट्रल जेल भेज दिया गया। जरीना वो दिन याद करती हैं, जब अचानक उन्हें बेटे की किताब से एक चिट्‌ठी मिली थी।

 

उसमें लिखा था- ‘मैंने बंदूक उठा ली है। मैं अगर टुकड़े-टुकड़े होकर घर लौटूं तो आप रोना मत।’ जरीना नहीं जानती कि उनके बेटे ने ये कदम क्यों उठाया। वह रोज कॉलेज जाता और घर के काम में हाथ भी बंटाता था। न ही परिवार में कभी ऐसी घटना हुई, जिसने बेटे को आतंकी बनने पर मजबूर किया। पूरी रात जरीना का परिवार बेटे को ढूंढने की कोशिश करता रहा। उन्हीं के गांव में आतंकी सद्दाम पाडर का परिवार भी रहता है। वे उनके पास भी गईं और बेटे को बुलाने में मदद करने को कहा।

 

जवाब मिला, ‘जब हम अपने बेटे को नहीं रोक पाए तो आपके बेटे पर हमारा क्या जोर?’ जरीना कहती हैं- ‘हमारा बेटा घर से निकलता और जब तक कॉलेज पहुंच नहीं जाता, हम चार बार उसे फोन करते। हर दिन नमाज से पहले वह घर आ जाता था। हमें एहसास ही नहीं हुआ, उसके दिमाग में ऐसा कुछ चल रहा है। वरना कौन मां चाहेगी कि उसका बेटा यूं टुकड़ों में घर लौटे।’ जरीना जैसी मांओं की घाटी में कमी नहीं है, जिनके बच्चों के कारण पूरा परिवार बर्बाद हो गया। 

 

यही कारण है कि कश्मीर के कोर कमांडर ले.ज. केजेएस ढिल्लन ने कश्मीर की मांओं से गुजारिश की थी कि वो अपने बच्चों को आतंकी बनने से रोकें और जो चले गए हैं, उन्हें लौटा लाएं। घाटी में आतंक और इंसाफ की लड़ाई की कीमत रुकैया जैसी मांएं भी चुका रही हैं। रुकैया के लिए उस दिन सबकुछ खत्म हो गया जब पुलिस की नौकरी कर रहे बड़े बेटे शौकत का शव घर पहुंचा। आतंकी हमले में वह शहीद हो गया था। उस दिन से रुकैया के पति की मानसिक हालत बिगड़ी हुई है। घर की सारी जिम्मेदारी बेटे पर ही थी। बमुश्किल उसे पढ़ाया था। सरकारी नौकरी मिली तो घर की हालत ठीक होने लगी थी।

 

रुकैया पूछती हैं कि ‘मेरे बेटे की जान लेकर आखिर किसे क्या मिला?’ क्या कश्मीर की माएं अपने बेटों को आतंकी बनने से रोक सकती हैं? इस सवाल पर रुकैया कहती हैं- ‘मैं कुछ कहूंगी तो कहीं वो मेरे छोटे बेटे को कुछ कर न दें।’ बेटे की जान का डर सिर्फ रुकैया की आंखों में ही नहीं है। यहां ज्यादातर मांओं को रोजाना ढलते सूरज के साथ बेटे के घर लौटने का खौफ सताता है। 

 

डिवीजनल कमांडर आतंकी तारिक मौलवी की मां का कहना है उसके बेटे को इतना टॉर्चर किया गया कि उसके पास आतंकी बनने के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं बचा था। सेना और पुलिस उन्हें रोज कहती है कि वह अपने बेटे को सरेंडर करने को कहें, पर बेटा मानता ही नहीं है। डाउनटाउन में रहने वाली आबिदा का बेटा 15 साल का है। वह कब कहां जाता है, कितना वक्त किसके साथ गुजारता है, किसी घटना पर वह किस तरह से रिएक्ट करता है, आबिदा हर चीज का हिसाब रखती हैं।

 

कहती हैं- "यही उम्र है जब उसके दिमाग पर कोई छोटी बात भी असर कर सकती है।’ जिस इलाके में वह रहती हैं, वहां पत्थरबाजी आम है। आबिदा हर रोज झूठी-सच्ची कहानियां सुनाकर बेटे से तरह-तरह के सवाल करती हैं। ये जानने के लिए कि कहीं वह कुछ गलत करने के बारे में तो नहीं सोच रहा। इसी डाउनटाउन का वाकया है एहतशाम से जुड़ा। खानयार का रहने वाला एहतशाम अपनी मां के कहने पर सरेंडर करने को राजी हुआ था। मां के ही कहने पर फुटबॉलर से आतंकी बना अनंतनाग का माजिद पिछले साल छोड़ घर लौट आया था। 

 

पिछले कुछ सालों में जो भी आतंकी सरेंडर कर लौटा है, वह मां की अपील पर ही लौटा है। हाल के कुछ सालों में ऐसे तीन-चार वाकये हुए हैं। यही वजह है कि जैसे ही किसी युवा के घर से गायब होने और आतंकी बनने की बात पुलिस या आर्मी को पता चलती है, वह सबसे पहले उसके परिवार से उसे बुलाने को कहते हैं। वह परिवारों से मिलकर उन्हें समझाने की कोशिश करते हैं कि आतंक से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला। पर कई बार मां की अपील भी काम नहीं आती। पिछले साल त्राल में एक एनकाउंटर चल रहा था। सेना ने आतंकी की मां को बुलाकर उसे सरेंडर करने को कहा। मां की गुहार आतंकी ने नहीं मानी और मारा गया।

 

कश्मीर के दर्द की तस्वीर

 

  • कश्मीर की ज्यादातर मांएं अपने बेटों पर नजर रखती हैं कि वह कब कहां जाता है, कितना वक्त किसके साथ गुजारता है, घटनाओं पर किस तरह रिएक्ट करता है।
  • बीते सालों में जो भी आतंकी सरेंडर कर लौटा, वह मां की अपील पर ही आया। हाल के वर्षों में ऐसे तीन-चार वाकये हुए।

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