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TRP में फर्जीवाड़ा:रिपब्लिक विवाद के बाद ब्रॉडकास्ट काउंसिल BARC ने न्यूज चैनलों की वीकली TRP लिस्ट पर अस्थायी रोक लगाई

मुंबई2 महीने पहले

ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) ने टेलीविजन रेटिंग पॉइंट (TRP) पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। यह रोक अगले आठ से बारह हफ्ते के लिए हो सकती है। काउंसिल की तकनीकी कमेटी TRP जारी करने की पूरी प्रोसेस का रिव्यू करेगी और वेलिडेशन के बाद ही दोबारा इसे शुरू किया जाएगा। दरअसल, पिछले गुरुवार को मुंबई पुलिस ने दावा किया था कि रिपब्लिक जैसे कुछ चैनल पैसे देकर TRP बढ़वाते हैं।

BARC इंडिया बोर्ड के चेयरमैन पुनीत गोयनका ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए यह फैसला बेहद जरूरी था। बोर्ड का मानना है कि BARC को अपने कड़े प्रोटोकॉल का रिव्यू करना चाहिए। इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए, ताकि फर्जी टीआरपी जैसी घटनाएं फिर सामने न आएं।

BARC के CEO सुनील लुल्ला ने कहा, ‘‘हम BARC में अपनी भूमिका को पूरी ईमानदारी और लगन से निभाते हैं और वही रिपोर्ट करते हैं, जो देश देखता है। हम ऐसे और विकल्प तलाश रहे हैं, जिससे ऐसी गैर-कानूनी कामों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।’’

सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी से हाईकोर्ट जाने को कहा

मुंबई पुलिस की ओर से समन भेजे जाने के खिलाफ रिपब्लिक टीवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उससे बॉम्बे हाईकोर्ट जाने को कहा है। कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर के इंटरव्यू देने पर चिंता जताई।

मुंबई पुलिस ने TRP में फर्जीवाड़े का दावा किया था

मुंबई पुलिस ने 8 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके फॉल्स TRP रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया। पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने बताया था कि रिपब्लिक टीवी समेत तीन चैनल पैसे देकर टीआरपी खरीदते थे और बढ़वाते थे। इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने यह भी कहा था कि हिरासत में लिए गए लोगों ने यह बात कबूल की है कि ये चैनल पैसे देकर टीआरपी बदलवाते थे। उधर, रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क ने इन आरोपों को झूठा करार दिया था।

BARC क्या है?

BARC (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) एक इंडस्ट्री बॉडी है, जिसे एडवर्टाइजर्स, एड एजेंसियों और ब्रॉडकास्टिंग कंपनियां चलाती हैं। इंडियन सोसायटी ऑफ एडवर्टाइजर्स, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन और एडवर्टाइजिंग एजेंसी एसोसिएशन ऑफ इंडिया इसके संयुक्त मालिक है।

बार्क के डेटा का इस्तेमाल कैसे होता है?

  • हर गुरुवार को BARC अपना डेटा जारी करता है। यह ऑडियंस के डेमोग्राफिक्स- उम्र, एजुकेशन, इनकम आदि में बांटकर बताता है कि किसी शो को कितने लोग कितनी देर देख रहे हैं। इस पर चैनल की एडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू निर्भर करती है।
  • इसका मतलब यह है कि पूरा देश क्या देख रहा है, यह इन 45 हजार परिवारों के टीवी पर लगे डिवाइस बताते हैं। BARC इन डिवाइस को गोपनीय रखता है, लेकिन छेड़छाड़ के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। मुंबई पुलिस कमिश्नर के आरोप इसी कड़ी में नए आरोप हैं।
  • फिक्की और अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल भारत का टीवी उद्योग 78,700 करोड़ रुपए का रहा। इसमें भी एडवर्टाइजर्स के लिए टीआरपी ही मुख्य क्राइटेरिया रहा एडवर्टाइज करने का।

टीवी चैनल्स TRP को कैसे प्रभावित कर सकते हैं?

टीवी चैनल्स दो तरह से TRP को प्रभावित करते हैं। पहला, यदि उन्हें पता चल जाए कि बार-ओ-मीटर या पीपल मीटर कहां लगे हैं तो वे उन परिवारों को सीधे कैश या गिफ्ट के जरिए अपने चैनल देखने को प्रेरित करते हैं। दूसरा, वे केबल ऑटरेटर्स या मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर्स के जरिए यह सुनिश्चित करते हैं कि दर्शकों को उनके चैनल सबसे पहले दिखें।

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