आंकड़े / खुदरा महंगाई दर फरवरी में 2.57% रही, यह 4 महीने में सबसे ज्यादा



Retail inflation at 4 month high of 2.57pc in feb as food prices rise
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Retail inflation at 4 month high of 2.57pc in feb as food prices rise

  • खाने-पीने की चीजों में इजाफे की वजह से खुदरा महंगाई बढ़ी
  • जनवरी में यह 19 महीने के निचले स्तर 1.97% पर पहुंची थी
  • जनवरी में औद्योगिक उत्पादन में सिर्फ 1.7% बढ़ोतरी हुई 

Dainik Bhaskar

Mar 13, 2019, 08:24 AM IST

नई दिल्ली. खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से फरवरी में खुदरा महंगाई दर 2.57% दर्ज हुई है। यह चार महीने में सबसे अधिक है। पिछले साल अक्टूबर में यह 2.33% और फरवरी में 4.44% पर थी।

खाद्य महंगाई दर में 0.15% इजाफा

  1. सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने खाद्य महंगाई दर (-)0.66% दर्ज हुई, लेकिन जनवरी की तुलना में इसमें 0.15% बढ़ोतरी हुई है।

  2. आरबीएल बैंक की अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर ने कहा, खाने-पीने की चीजों को छोड़ दें तो कोर महंगाई दर 5% से ज्यादा है। ज्यादातर सर्विसेज के दाम 6% से ज्यादा बढ़े हैं। इससे पता चलता है कि डिमांड बढ़ने के साथ इनकी महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हो रही है।

  3. पिछले महीने शिक्षा, घरेलू सामान व सेवाएं, परिवहन और संचार, एम्यूजमेंट और पर्सनल केयर आदि की खुदरा महंगाई दर 6.02% की रफ्तार से बढ़ी है। पान, तंबाकू, शराब के दाम 5.49% बढ़े।

  4. मीट और मछली 5.92%, मोटे अनाज 1.32%, तेल व वसा 1.41% और दूध व इससे बने उत्पाद 0.92% महंगे हुए। कपड़े 2.71%, फुटवियर 3.10%, घर 5.10% और ईंधन-बिजली 1.24% महंगे हुए।

  5. संभावना: आरबीआई अप्रैल की समीक्षा में रेपो रेट घटा सकता है

    खाद्य पदार्थों के अलावा बाकी चीजों की महंगाई दर 6% से ज्यादा बनी हुई है 
    खुदरा महंगाई हाल के महीनों में लगातार रिजर्व बैंक (आरबीआई) के लक्ष्य 4% से नीचे बनी हुई है। इसलिए माना जा रहा है कि 4 अप्रैल को मौद्रिक नीति समीक्षा में रिजर्व बैंक रेपो रेट 0.25% घटा सकता है। रिजर्व बैंक ब्याज दरें तय करने के लिए खुदरा महंगाई पर गौर करता है।

  6. कोर महंगाई दर 6% से ऊपर है। यह रेट कट में बाधा बन सकती है। फरवरी की समीक्षा में आरबीआई ने जनवरी-मार्च के लिए 2.8% महंगाई का लक्ष्य तय किया था। 2019-20 में अप्रैल-सितंबर में 3.2%-3.4% का लक्ष्य है।

  7. जनवरी में औद्योगिक उत्पादन सिर्फ 1.7% बढ़ा

    जनवरी में औद्योगिक उत्पादन में सिर्फ 1.7% बढ़ोतरी हुई है। इसकी मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती है। बड़ी मशीनरी और उपभोक्ता सामान दोनों की रफ्तार कम हुई है।

  8. एक साल पहले जनवरी 2018 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 7.5% थी। इस बीच, सीएसओ ने दिसंबर 2018 के आईआईपी आंकड़ों को 2.4% से संशोधित कर 2.6% किया है। मशीनरी का उत्पादन जनवरी में घट गया। इस क्षेत्र को नए निवेश का इंडिकेटर माना जाता है।

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