बिहार / 18 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान, लेकिन प्रचार के लिए घर से ही नहीं निकल रहे तेजस्वी

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 11:25 AM IST



rjd tejaswi yadav absent in rally and election campaign
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rjd tejaswi yadav absent in rally and election campaign
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  • तेजस्वी कुल 18 दिन के तय प्रचार कार्यक्रम में से 4 दिन घर से बाहर ही नहीं निकले
  • इस दौरान उन्होंने कभी बीमारी की बात की, कभी पारिवारिक तनाव तो कभी हेलिकॉप्टर नहीं मिलने का बहाना बनाया
  • दूसरे चरण में बिहार की पांच सीटों पर मतदान होगा

पटना (इन्द्रभूषण). बिहार में राजद ही नहीं महागठबंधन के स्टार प्रचारक तेजस्वी यादव दो दिन से घर से नहीं निकले हैं। दूसरे चरण में 18 अप्रैल को किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, भागलपुर और बांका लोकसभा सीटों पर मतदान है। लेकिन तेजस्वी अब तक कुल 18 दिन के तय प्रचार कार्यक्रम में से चार में शामिल नहीं हुए। जिन उम्मीदवारों के क्षेत्र में तेजस्वी का प्रचार कार्यक्रम होना था, वहां कार्यकर्ताओं में उत्साह कम दिख रहा है। 


कई दिनों से चल रही तैयारी तो फीकी पड़ी ही, उम्मीदवार खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कार्यकर्ताओं की महागठबंधन उम्मीदवारों के पक्ष में आक्रामकता में कमी आ आई है। नेताओं और कार्यकर्ताओं में इसको लेकर काफी बेचैनी है। उन्हें डर है कि फ्लोटिंग वोटरों पर इसका खराब प्रभाव पड़ सकता है। 

 

10 जगह प्रचार के लिए नहीं गए तेजस्वी 
तेजस्वी सहयोगी दलों के 6 क्षेत्र और राजद उम्मीदवारों के 4 क्षेत्रों में कार्यक्रम तय करावाकर वहां नहीं जा सके। वैसे, 30 मार्च और 14 अप्रैल को तेजस्वी के प्रचार में नहीं जाने का कारण आधिकारिक रुप से पार्टी ने हेलिकॉप्टर की खराबी बताया। वहीं, 9 अप्रैल और 15 अप्रैल को स्वास्थ्य कारणों को हवाला दिया गया। 

 

निर्धारित सभाओं में नहीं गए

 

तारीख लोकसभा क्षेत्र
30 मार्च गया और नवादा
9 अप्रैल गया (राहुल गांधी की सभा)
14 अप्रैल बांका, भागलपुर, किशनगंज और मधेपुरा
15 अप्रैल कटिहार, समस्तीपुर, मधुबनी और मुजफ्फरपुर

 

तेजस्वी पारिवारिक मामलों को हैंडल नहीं कर पा रहे?

 

  • 29 मार्च को महागठबंधन की 32 सीटों और उम्मीदवारों का ऐलान कर तेजस्वी ने प्रचार कार्यक्रम की शुरुआत की थी। पर पारिवारिक कलह की शुरुआत भी उसी दिन सामाने आई। 
  • अपने उम्मीदवार को टिकट नहीं मिलने और ससुर चंद्रिका राय की सारण से टिकट के कारण तेजप्रताप ने उसी दिन शाम में विरोध करते हुए अपने प्रत्याशियों का ऐलान भी कर दिया। नतीजा इस तनाव में तेजस्वी को अगले दिन (30 मार्च) ही प्रचार स्थगित करना पड़ा। 
  • दिन भर लालू परिवार में तेजप्रताप के इस रवैया को लेकर गहमागहमी बनी रही। उसके बाद तेजप्रताप ने लालू राबड़ी मोर्चा बना खुलेआम राजद के खिलाफ अपने चुनावी अभियान की शुरुआत कर दी।

 

लालू जैसी जीवटता और चुनावी मैनेजमेंट नहीं होने से पिछड़ रहे : तेजस्वी के करीबियों का मानना है कि राजद अध्यक्ष लालू यादव की तरह जीवटता और चुनावी कार्यक्रमों की अनुभवहीनता के कारण तेजस्वी प्रचार से बच रहे हैं। कांग्रेस, रालोसपा, वीआईपी और हम की तरफ से भी उनकी ही मांग है। लालू यादव गरम पानी का सेवन कर लगातार खुद को भाषण देने के काबिल बनाये रखते थे। प्रचार दौरे से लौटने के बाद वे आसमान के नीचे खुले में बैठ मौसम के अनुकुल अपने को ठीक रखते थे। पर तेजस्वी सिर्फ लौंग का सेवन करते हैं। गरम पानी लगातार नहीं पीते हैं। वहीं, प्रचार दौरे से लौटने के बाद वे बंद कमरे में एसी में बैठना पसंद करते हैं। इस कारण वे अपने को मौसम के अनुकूल नहीं बना पा रहे हैं। 

 

कई तरह के उठ रहे सवाल

 

  • कांग्रेस की तरफ से अधिक तवज्जो नहीं दिया जाना।
  • कांग्रेस को बिहार में राजद की हैसियत समझाना। 
  • कुशवाहा और मांझी को कांग्रेस से ज्यादा तरजीह मिलना। 
  • लालू समेत परिवार के अन्य लोगों के विभिन्न मामलों में फंसे होने से राजनीतिक दबाव। 
  • चुनाव में भाजपा का दबाव।


क्या महागठबंधन की एकता टूट गई : दरअसल, चतरा (झारखंड), मधेपुरा, सुपौल और मधुबनी सीटों को लेकर सहयोगी दल कांग्रेस से तेजस्वी के तनावपूर्ण संबंध हो गए हैं। वहीं, मोतिहारी सीट लेकर उपेन्द्र कुशवाहा ने जिस तरह कांग्रेस अभियान समिति के अध्यक्ष अखिलेश सिंह के बेटे को सौंप दिया, वह तेजस्वी को नागवार गुजरा है। 9 अप्रैल को राहुल गांधी की गया की सभा में तेजस्वी को साथ में मंच शेयर करने की रणनीति बनी थी। पर चतरा, मधेपुरा, सुपौल और मधुबनी सीटों को लेकर कांग्रेस से तनावपूर्ण संबंधों के कारण खफा तेजस्वी तबीयत खराब होने की बात कर घर से नहीं निकले। सबसे ज्यादा विवाद चतरा को लेकर है। वहां से लालू परिवार के करीबी बालू व्यवसायी सुभाष यादव के खिलाफ कांग्रेस ने उम्मीदवार दे दिया है। उसी तरह राजद नेतृत्व मधेपुरा में पप्पूयादव और मधुबनी में शकील अहमद की उम्मीदवारी को कांग्रेस की शिथिलता से जोड़ रहा है। यही कारण है कि सुपौल में कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन के खिलाफ वहां के एक राजद विधायक खुलकर विरोध में उतर आये पर राजद की तरफ से अब तक कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

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