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  • Sandeep Jamalia in rajasthan paid a loan of lakhs of rupees for his father after 18 years

राजस्थान / व्यापार में कर्ज बढ़ा तो पिता परिवार समेत गांव छोड़ गया, बेटे ने 18 साल बाद 55 लाख रु. चुकाए



संदीप कुमार जमालिया (दाएं)। संदीप कुमार जमालिया (दाएं)।
कर्ज चुकाने पर व्यापारियों ने बेटे को सम्मानित किया। कर्ज चुकाने पर व्यापारियों ने बेटे को सम्मानित किया।
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संदीप कुमार जमालिया (दाएं)।संदीप कुमार जमालिया (दाएं)।
कर्ज चुकाने पर व्यापारियों ने बेटे को सम्मानित किया।कर्ज चुकाने पर व्यापारियों ने बेटे को सम्मानित किया।

  • पिता राजस्थान के रावतसर में कारोबार करते थे, घाटे के बाद कई लोगों से कर्ज लिया था
  • बेटे ने पिता के निधन के बाद गांव लौटकर सबका कर्ज चुकाया, व्यापारियों ने उसे सम्मानित किया

Dainik Bhaskar

Jun 06, 2019, 12:22 PM IST

रावतसर (मनोज पुरोहित. रमेश सिगची). कर्ज लेकर भागने वालों के किस्से तो आपने खूब सुने होंगे, लेकिन राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में एक अनूठा मामला सामने आया। यहां पिता के सिर पर चढ़ा करीब 55 लाख का कर्ज बेटे ने 18 साल बाद उतार दिया। रावतसर के व्यापारियों ने उसके बेटे की इस ईमानदारी का सम्मान किया और प्रशस्ति पत्र दिया।

 

दरअसल, 2001 में रावतसर की धानमंडी की एक फर्म जमालिया ट्रेडिंग कंपनी घाटे में चली गई। इसके मालिक मीताराम जमालिया ने कई लोगों से कर्ज लिया था। मजबूरन उसे परिवार के साथ गांव छोड़ना पड़ा। उस वक्त उसका बेटा संदीप कुमार जमालिया 12 साल का था।


 

राजस्थान से नेपाल चले गए थे पिता 

 

  • संदीप फिलहाल दिल्ली के करोलबाग में रहते हैं। उन्होंने बताया, "12 साल पहले हमारा परिवार रावतसर (हनुमानगढ़) से दिल्ली आ गया था। फिर पिताजी नेपाल चले गए। वहां किराने की दुकान खोल ली। मैं एक मोबाइल की दुकान पर नौकरी करने लगा। छोटा भाई भी इसी धंधे में लग गया।"
  • संदीप ने बताया, "जब मैं अपने पिता का उदास चेहरा देखता तो मेरे मन में यही बात रहती कि पिताजी का कर्ज चुकाना है। चाहे कुछ भी जो जाए। मैं अक्सर पिता के पत्र और डायरी देखता था। रावतसर से जाने के छह साल बाद मेरे पिता का हार्टहटैक की वजह से निधन हो गया। मां भी नहीं रही। लेकिन, मैंने काम करना नहीं छोड़ा।"
  • "मोबाइल बिजनेस जम गया। मैंने पैसे इकट्ठे किए। शुरुआत में कर्जदारों के फोन आते थे। बाद में लोगों के फोन आने भी बंद हो गए। मैंने अपने भाई के सहयोग से पूंजी इकट्ठा की और 18 साल बाद रावतसर आया। यहां आकर धानमंडी के व्यापारियों को पैसे लौटाए।" 

 

कारोबारियों ने कहा- ऐसा होते हमने नहीं देखा
रावतसर के व्यापारियों ने संदीप की इस ईमानदारी को सराहा। उन्होंने एक प्रोग्राम कर सम्मानित किया। व्यापारियों ने बताया कि उनके दो से तीन लाख रुपए तक वापस आ गए। हमें उम्मीद नहीं थी कि यह पैसा वापस मिलेगा।

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