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रिपोर्ट / मंदी से निपटने के लिए ब्याज दरें घटाना काफी नहीं, सरकार को ग्रामीण इलाकों में खर्च बढ़ाना चाहिए



State Bank SBI Research Report On Monetary Policy; Reducing interest rates is not enough to deal with recession
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State Bank SBI Research Report On Monetary Policy; Reducing interest rates is not enough to deal with recession

  • एसबीआई की रिपोर्ट- राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार जैसी योजनाओं के जरिए सरकार खर्च बढ़ाए 
  • मनरेगा के लिए जारी 45903 करोड़ रुपए में से सिर्फ 33420 करोड़ खर्च किए गए
  • अक्टूबर की समीक्षा बैठक में आरबीआई फिर ब्याज दरों में बड़ी कटौती कर सकता है

Dainik Bhaskar

Sep 16, 2019, 07:16 PM IST

मुंबई. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा मंदी से निपटने के लिए आरबीआई की उदार मौद्रिक नीति काफी नहीं। इसके बजाय सरकार को ग्रामीण इलाकों में मांग बढ़ाने के उपाय करने चाहिए। राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना, मनरेगा और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए खर्च बढ़ाना चाहिए। एसबीआई की रिपोर्ट सोमवार को सामने आई।

पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या लक्ष्य से आधी

  1. रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि सरकार ने वित्तीय लक्ष्य साधने के लिए खर्च घटाने की कोशिश की तो यह आर्थिक विकास दर के लिए घातक साबित होगी। पीएम-किसान पोर्टल से पता चलता है कि योजना के लाभार्थियों की संख्या सिर्फ 6.89 करोड़ है। जबकि, लक्ष्य 14.6 करोड़ का है। किसानों के आंकड़ों के प्रमाणीकरण (वेलिडेशन) की सुस्त रफ्तार की वजह से देरी हो रही है।

  2. रिपोर्ट में मनरेगा की वेबसाइट के आंकड़ों का हवाला देकर कहा गया है कि योजना के लिए जारी 45 हजार 903 करोड़ रुपए में से सिर्फ 33 हजार 420 करोड़ खर्च किए गए। बजट में जुलाई तक खर्च का अनुमान 3 लाख 38 हजार 85 करोड़ रुपए बताया गया। लेकिन, आवंटित राशि की तुलना में सिर्फ 31.8% खर्च किया गया। जबकि, पिछले साल 37.1% राशि खर्च की गई थी।

  3. रिपोर्ट के मुताबिक 2007-14 तक निजी निवेश की हिस्सेदारी 50% थी। 2015-19 तक यह घटकर 30% रह गई। ऐसी स्थिति में सरकार को मांग बढ़ाने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खासतौर से खर्च बढ़ाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरबीआई अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों में फिर से बड़ी कटौती कर सकता है।

     

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