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दिल्ली हिंसा मामला:पुलिस की याचिका पर SC में सुनवाई, जज बोले- HC के आदेश का पूरे देश पर असर पड़ सकता है, इसे नाजीर नहीं माना जाएगा

नई दिल्ली2 महीने पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। हमने मामले का परीक्षण करने का फैसला लिया है। - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ये मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। हमने मामले का परीक्षण करने का फैसला लिया है।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट को जमानत देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। SC ने याचिका पर टिप्पणी करते हुए कहा है, 'हाईकोर्ट के आदेश का पूरे भारत में असर पड़ सकता है। ये मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए हमने परीक्षण करने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश को नजीर नहीं माना जाएगा।'

चारों स्टूडेंट एक्टिविस्ट को गुरुवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया
दरअसल, दिल्ली हिंसा मामले में आरोपी पिंजरा तोड़ के एक्टिविस्ट नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल को गुरुवार शाम तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया था। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने गुरुवार सुबह ही इन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। इससे पहले 15 जून को जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और अनूप जयराम भंभानी की बेंच ने उन्हें 50 हजार के मुचकले पर छोड़ने का आदेश जारी किया था, लेकिन तीनों की रिहाई नहीं हो सकी थी।

रिहाई में जानबूझकर देरी करने का आरोप लगाते हुए तीनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद कोर्ट ने तुरंत रिहाई का आदेश जारी किया था। आदेश की कॉपी मेल के जरिए तिहाड़ जेल के प्रशासन को भेजी गई थी।

तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद देवांगना कालिता और नताशा नरवाल खुशी मनाते हुए।
तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद देवांगना कालिता और नताशा नरवाल खुशी मनाते हुए।

बेल के 36 घंटे बाद भी नहीं मिली थी जमानत
हाईकोर्ट के फैसले के 36 घंटे बाद भी जब जमानत नहीं मिली तो तीनों कार्यकर्ताओं के वकील ने आरोप लगाया था कि बेल मिलने के 36 घंटे बाद तक उन्हें रिहा नहीं किया गया। इसके बाद गुरुवार को कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई। कार्यकर्ताओं के वकील ने कहा था कि रिहाई न मिलने से उनके अधिकारों का हनन हुआ है।

सुनवाई के दौरान पुलिस के वकील ने कहा था कि तीनों का वेरिफिकेशन करने की वजह से रिहाई में देरी हुई है। पुलिस ने कोर्ट से कहा था कि हम तीनों का पता वेरिफाई कर रहे हैं, जो अलग-अलग राज्यों में हैं। हमारे पास ऐसी ताकतें नहीं हैं, कि झारखंड और असम में दिए गए पते को इतनी जल्दी वेरिफाई कर सकें। इसलिए इसमें समय लग रहा है।

इस पर अदालत ने दिल्ली पुलिस पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि पिछले एक साल से तीनों आपकी कस्टडी में थे, इसके बाद भी वेरिफिकेशन करने में देरी की जा रही है।

पुलिस ने हाईकोर्ट से पता वेरिफाई करने वक्त मांगा था

पिछली सुनवाई के दौरान पुलिस ने पिजरा तोड़ के तीनों कार्यकर्ताओं का पता वेरिफाई करने के लिए 3 दिन का समय मांगा था। दिनभर चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसले के लिए गुरुवार का वक्त तय किया था। इससे दिल्ली पुलिस हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पहले ही सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुकी है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में तीनों को जमानत देने का विरोध किया था। तीनों पर अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) के तहत केस दर्ज किया गया था।

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