BBC डॉक्यूमेंट्री पर केंद्र को नोटिस:सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा जवाब, याचिकाकर्ता ने बैन हटाने की मांग की

नई दिल्ली2 महीने पहले
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यह तस्वीर कोच्चि की 24 जनवरी की है। जिला कांग्रेस कमेटी ने मरीन ड्राइव जंक्शन पर BBC डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की स्क्रीनिंग की थी।

BBC की प्रतिबंधित डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ पर लगे बैन को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है और ओरिजनल डॉक्यूमेंट्स जमा करने के आदेश दिए हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई अप्रैल में होगी।

दरअसल, डॉक्यूमेंट्री पर रोक लगाए जाने के खिलाफ महुआ मोइत्रा, प्रशांत भूषण और एडवोकेट एमएल शर्मा ने याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगाने का सरकार का फैसला मनमाना और असंवैधानिक है।

याचिकाकर्ता का दावा- डॉक्यूमेंट्री दंगों की जांच में मददगार
याचिका में दावा किया गया है कि 'इंडिया: द मोदी क्वेश्चन' नामक डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों और उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच की गई है। जब दंगे भड़के थे, तब PM मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री थे। याचिका में यह भी कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्री में दंगे रोकने में नाकामयाब रहे जिम्मेदारों से जुड़े कई फैक्ट्स हैं। हालांकि, सच्चाई सामने आने के डर से इसे आईटी रूल 2021 के नियम 16 के तहत बैन किया गया है। रिकॉर्ड किए गए फैक्ट्स भी सबूत हैं और इन्हें पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे न्याय नहीं मिला है।

दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की मांग की गई
याचिका में गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों की जांच की भी मांग की गई है। एमएल शर्मा ने कहा है कि BBC डॉक्यूमेंट्री के दोनों एपिसोड और BBC के रिकॉर्ड किए गए सभी ओरिजनल फैक्ट्स की जांच करें। साथ ही गुजरात दंगों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह से जिम्मेदार या शामिल आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 146, 302, 376, 425 और 120-बी और के तहत उचित कार्रवाई करें।

याचिका लगाने पर कानून मंत्री बोले- ये लोग SC का समय बर्बाद करते हैं
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका को लेकर सोमवार को ट्वीट किया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि देश में जहां हजारों आम नागरिक न्याय के लिए इंतजार और तारीखों की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करते हैं।

BBC ने चीनी कंपनी हुवावे से पैसा लेकर बनाई डॉक्यूमेंट्री
BJP से राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट महेश जेठमलानी ने BBC पर चीनी कंपनी से पैसा लेकर भारत विरोधी डॉक्यूमेंट्री बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा- BBC को चीनी कंपनी हुवावे ने मोदी की छवि खराब करने के लिए पैसा दिया है। अब BBC चीनी एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहा है। महेश जेठमलानी दिवंगत एडवोकेट राम जेठमलानी के बेटे हैं।

उन्होंने ट्वीट करके कहा- BBC इतना भारत विरोधी क्यों है? BBC का भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है। 2021 में बिना जम्मू-कश्मीर के भारत का नक्शा BBC ने जारी किया था। बाद में उसने भारत सरकार से माफी मांगी थी और नक्शे को सही किया था।

डॉक्यूमेंट्री विवाद को लेकर अब पूरा घटनाक्रम पढ़िए....
24 जनवरी: JNU में डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर पथराव हुआ था

24 जनवरी: JNU में डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर पथराव हुआ था

JNU में 24 जनवरी को रातभर हंगामा होता रहा। छात्र संघ का कहना था कि वे डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग नहीं कर रहे थे, बल्कि मोबाइल पर देख रहे थे। इसे देखने पर कोई रोक नहीं है, फिर बिजली इंटरनेट क्यों काटा गया?
JNU में 24 जनवरी को रातभर हंगामा होता रहा। छात्र संघ का कहना था कि वे डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग नहीं कर रहे थे, बल्कि मोबाइल पर देख रहे थे। इसे देखने पर कोई रोक नहीं है, फिर बिजली इंटरनेट क्यों काटा गया?

इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 24 जनवरी को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में बवाल हुआ था। दरअसल, यूनिवर्सिटी को खबर लगी कि छात्र संघ के ऑफिस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की जा रही है तो वहां की बिजली और इंटनेट काट दिया गया।

इसके बाद भी छात्र नहीं माने और उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को मोबाइल पर डाउनलोड करने का क्यूआर कोड शेयर किया। विवाद इतना बढ़ गया कि डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर देर रात पथराव किया गया। पथराव किसने किया, यह पता नहीं चल पाया है। हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर भाग गए।

25 जनवरी: जामिया यूनिवर्सिटी में 7 स्टूडेंट्स हिरासत में लिए गए

तस्वीर जामिया यूनिवर्सिटी की है, डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर पुलिस ने 7 छात्रों को हिरासत में लिया lE।
तस्वीर जामिया यूनिवर्सिटी की है, डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर पुलिस ने 7 छात्रों को हिरासत में लिया lE।

जामिया में विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर अब तक 7 छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया गया है। इन पर माहौल खराब करने के प्रयास का आरोप है। SFI ने छात्रों की रिहाई तक स्क्रीनिंग टाल दी है। यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर की शिकायत पर इन्हें हिरासत में लिया गया है।

जामिया की वाइस चांसलर नजमा अख्तर ने बताया कि विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर छात्र संगठन SFI यूनिवर्सिटी कैंपस का माहौल खराब करने का प्रयास कर रहा है। हम ऐसी किसी भी काम की अनुमति नहीं देंगे। छात्रों की किसी भी गैरजरूरी हरकत पर कार्रवाई होगी।

25 जनवरी: BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाने पर पुडुचेरी विश्वविद्यालय में झड़प हुई

BBC की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुधवार को छात्रों में झड़प हुई थी।
BBC की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुधवार को छात्रों में झड़प हुई थी।

पुडुचेरी विश्वविद्यालय में बुधवार (25 जनवरी) को PM मोदी पर BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। इसके बाद छात्रों के दो संगठनों के बीच झड़प हो गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बिजली और वाईफाई को ठप कर दिया था, फिर छात्रों के एक गुट ने फोन और लैपटॉप पर डॉक्यूमेंट्री देखी।

25 जनवरी: पंजाब यूनिवर्सिटी में डॉक्यूमेंट्री को लेकर हंगामा हुआ

चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रखी थी। इसे देखने के लिए जमा छात्र।
चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI ने इस डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रखी थी। इसे देखने के लिए जमा छात्र।

पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) के स्टूडेंट सेंटर में 25 जनवरी को विवादित डॉक्यूमेंट्री चलाने पर हंगामा हुआ। NSUI ने यह डॉक्यूमेंट्री चलाई। जिसे देखने कई स्टूडेंट्स जुट गए। इतने में यूनिवर्सिटी अथॉरिटी को इसकी भनक लग गई और प्रोजेक्टर पर चलाई गई इस डॉक्यूमेंट्री को तुरंत बंद करवा दिया गया। इससे पहले लगभग आधी डॉक्यूमेंट्री चल चुकी थी

26 जनवरी: गणतंत्र दिवस पर केरल कांग्रेस ने डॉक्यूमेंट्री दिखाई
केरल कांग्रेस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) यह स्क्रीनिंग तिरुवनंतपुरम में शंकुमुघम बीच पर की। पार्टी ने कहा- ज्यादा से ज्यादा लोगों को यह डॉक्यूमेंट्री दिखाई जा सके इसलिए बीच पर इसकी स्क्रीनिंग की गई है।

26 जनवरी: हैदराबाद यूनिवर्सिटी में SFI और ABVP के बीच हुआ बवाल
26 जनवरी को हैदराबाद यूनिवर्सिटी में इसी डॉक्यूमेंट्री को लेकर स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच विवाद हुआ। SFI ने 400 से अधिक छात्रों को विवादित डॉक्यूमेंट्री दिखाई। जवाब में RSS की स्टूडेंट्स विंग और ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी कैंपस में 'द कश्मीर फाइल्स' डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की।

यह तस्वीर SFI ने सोशल मीडिया पर शेयर की है, जिसमें हैदराबाद में स्टूडेंट्स BBC की डॉक्यूमेंट्री देखते नजर आ रहे हैं।
यह तस्वीर SFI ने सोशल मीडिया पर शेयर की है, जिसमें हैदराबाद में स्टूडेंट्स BBC की डॉक्यूमेंट्री देखते नजर आ रहे हैं।

ABVP कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कैंपस में BBC की डॉक्यूमेंट्री दिखाने की अनुमति देने का आरोप लगाया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी मेन गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने BBC की डॉक्यूमेंट्री पर बैन लगा दिया है तो कैंपस में उसे दिखाने की इजाजत कैसे दी गई।

इससे पहले 21 जनवरी को भी स्टूडेंट्स के एक ग्रुप ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी के कैंपस में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग रखी थी। छात्रों ने इसके लिए न यूनिवर्सिटी प्रशासन को सूचना दी और न ही इजाजत ली थी। मामला सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने एक्शन लिया।

27 जनवरी: दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुआ हंगामा
27 जनवरी को डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के छात्रों और पुलिस में ठन गई। छात्रों का कहना था कि वे यह डॉक्यूमेंट्री देखना चाहते हैं, जबकि पुलिस उन्हें देखने नहीं दे रही है। वहीं, पुलिस का कहना है कि इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है, लिहाजा इसकी स्क्रीनिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती।

पुलिस ने कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की आर्ट्स फैकल्टी के पास धारा 144 लागू है। यहां भीड़ जमा होने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हंगामे के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया।

प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने डॉक्यूमेंट्री स्कीनिंग की जानकारी देने के लिए यह पोस्टर जारी किया था।
प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने डॉक्यूमेंट्री स्कीनिंग की जानकारी देने के लिए यह पोस्टर जारी किया था।

29 जनवरी: मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस में बवाल
मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस (TISS) में भी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर 29 जनवरी को बवाल हुआ था। इंस्टीट्यूट की रोक के बावजूद 200 से ज्यादा स्टूडेंट्स ने फोन-लैपटॉप पर डॉक्यूमेंट्री देखी। TISS के प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स फोरम ने शाम 7 बजे को डॉक्यूमेंट्री दिखाने का ऐलान किया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इसका विरोध किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले में दखल देते हुए कहा था कि TISS में डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग नहीं होगी। इसके बाद स्टूडेंट्स ने 9 लैपटॉप और फोन पर डॉक्यूमेंट्री देखी।

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