सेबी का फैसला / इनसाइडर ट्रेडिंग का खुलासा करने वाले को 1 करोड़ रुपए तक का इनाम मिलेगा



Sebi announces Rs 1 cr reward hotline access for informers of insider trading
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Sebi announces Rs 1 cr reward hotline access for informers of insider trading

  • इनसाइडर ट्रेडिंग- कंपनी से जुड़ी गुप्त जानकारी के आधार पर शेयरों में खरीद-फरोख्त कर मुनाफा कमाना 
  • मुनाफा कमाने वाले से जितनी वसूली होगी उसकी 10% रकम सूचना देने वाले को मिलेगी, अधिकतम 1 करोड़

Dainik Bhaskar

Aug 22, 2019, 09:29 AM IST

मुंबई. इनसाइडर ट्रेडिंग का खुलासा करने वालों के लिए सेबी ने बुधवार को एक करोड़ रुपए तक के इनाम की व्यवस्था का ऐलान किया। विशेष तौर पर बनाई गई हॉटलाइन के जरिए पुख्ता सूचना देने वालों को रिवॉर्ड मिलेगा। यह फायदा इंडिविजुअल या कॉरपोरेट को ही मिलेगा। ऑडिटर जैसे प्रोफेशनल इस का लाभ नहीं ले सकेंगे क्योंकि, किसी भी गलत काम की रिपोर्ट देना उनका काम है।

 

सेबी इनसाइडर ट्रेडिंग करने वाले से जितनी वसूली करेगी, सूचना देने वाले को उसका 10% हिस्सा मिलेगा। यह राशि अधिकतम 1 करोड़ रुपए होगी। कोई व्यक्ति कंपनी से जुड़ी किसी गोपनीय जानकारी के आधार पर शेयरों में खरीद-फरोख्त से मुनाफा कमाता है तो उसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाता है। सेबी ने यह प्रस्ताव भी रखा कि छोटी गलतियों के मामलों में आरोपी जांच में सहयोग करता है सेटलमेंट का मौका दिया जाए। 

 

विदेशी फोर्टफोलियो निवेशकों के लिए केवाईसी नियम आसान किए 
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए अब भारत में निवेश करना पहले से अधिक आसान हो जाएगा। सेबी की बुधवार को हुई बैठक में एफीआई के लिए नो योर कस्टमर्स नियमों को सरल कर दिया। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों को बाजार से बाहर सिक्योरिटीज को विदेशी/घरेलू निवेशकों को ट्रांसफर करने की अनुमति भी दे दी। ऑफ मार्केट में गैर-लिस्टेड, सस्पेंडेड और इल्लिक्विड शेयर आते हैं। भारतीय बाजार में और अधिक विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए सेबी ने उन केंद्रीय बैंकों को एफपीआई के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति दे दी, जो बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के सदस्य नहीं हैं। सेबी ने एक बयान में कहा कि नए नियमों के तहत एफपीआई को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहले उन्हें तीन श्रेणियों में बांटा जाता था। केवाईसी के लिए डॉक्यूमेंट की जरूरत को सरल कर दिया गया है। आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एचआर खान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों के मुताबिक एफपीआई के नियम फिर से तैयार किए गए।

 

ऑफशोर फंड्स को बतौर एफपीआई निवेश की इजाजत 
ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स (ओडीआई) जारी करने और उसकी सदस्यता के लिए शर्तों को सरल किया गया है। म्यूचुअल फंड द्वारा जारी किए गए ऑफशोर फंड्स को एफपीआई के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद देश में निवेश करने की अनुमति दी गई है। म्यूचुअल फंड द्वारा जारी किए गए ऑफशोर फंड्स को एफपीआई के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद देश में निवेश करने की इजाजत दी गई है। अन्य बदलावों के तहत इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर में स्थापित कंपनियों के बारे में मान लिया जाएगा कि वे एफपीआई की शर्तों पर खरे उतरते हैं।

 

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