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सीरियल किलर डॉक्टर का जयपुर से कनेक्शन:17 साल पहले दो टैक्सी चालक सगे भाईयों की गला घोंटकर हत्या की, फिर हजारा नहर में फेंकी थी लाश

जयपुर8 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
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दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स सेल की गिरफ्त में सीरियल किलर डाॅ. देवेंद्र शर्मा (पीली टीशर्ट) में - Dainik Bhaskar
दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स सेल की गिरफ्त में सीरियल किलर डाॅ. देवेंद्र शर्मा (पीली टीशर्ट) में
  • तत्कालीन सबइंस्पेक्टर डीएसपी महेंद्र भगत की सूझबूझ से पकड़ा गया था सीरियल किलर
  • जयपुर में रेलवे स्टेशन से यूपी जाने के लिए टैक्सी कार किराए पर लेकर गया था आरोपी डॉक्टर
  • एसडीडी बूथ से किए गए फोन नंबरों को खंगालते हुए यूपी पहुंची थी पुलिस टीम, फिर पकड़ा

दिल्ली में नारकोटिक्स सेल के हत्थे चढ़ा सीरियल किलर डाॅ. देवेंद्र शर्मा का जयपुर से भी कनेक्शन रहा है। 17 साल पहले उसने जयपुर के टैक्सी चालक सगे भाइयों हत्या की थी। हत्यारा शर्मा दोनों भाइयों को यूपी ले गया और उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी थी। इसके बाद कासगंज की हजारा नहर में दोनों के शव फेंक दिए थे। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद हत्यारा देवेंद्र जयपुर की सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। यहां से वह पैराेल लेकर जेल से बाहर आया। इसके बाद वह फरार हो गया। बुधवार को उसे दिल्ली पुलिस की नारकोटिक्स सेल ने धरदबोचा।

यूपी ले जाकर दो भाइयों की हत्या का खुलासा कर इस सीरियल किलर को दबोचने में राजस्थान पुलिस के तत्कालीन सब इंस्पेक्टर महेंद्र भगत (वर्तमान में पुलिस उपाधीक्षक) ने अहम भूमिका निभाई थी। तब तत्कालीन आईजी रेलवे हरिश्चंद्र मीणा ने महेंद्र भगत सहित इस जांच में शामिल पुलिस टीम को 14 हजार रुपए का पुरस्कार देकर सम्मानित किया था।

सीरियल किलर देवेंद्र शर्मा व उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाने वाले तत्कालीन सबइंस्पेक्टर और वर्तमान में पुलिस उपाधीक्षक महेंद्र भगत।
सीरियल किलर देवेंद्र शर्मा व उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाने वाले तत्कालीन सबइंस्पेक्टर और वर्तमान में पुलिस उपाधीक्षक महेंद्र भगत।

इसी दोहरे हत्याकांड में कोर्ट ने डॉ. देवेंद्र शर्मा उर्फ डॉ. मुकेश खंडेलवाल और उसके दो साथियों उदयवीर उर्फ मकोय तथा उसका भाई राजू उर्फ रजवा को 2018 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हत्या के मुकदमों में संभवत: यह राजस्थान का पहला केस है कि जिसमें वर्ष 2004 में इनकी गिरफ्तारी से लेकर आजीवन कारावास की सजा मिलने तक इन आरोपियों को कोर्ट ने जमानत नहीं दी थी। इस दौरान ये जयपुर जेल में ही बंद रहे।

पत्नी-बच्चों को यूपी से लेकर आने की बात कहकर जयपुर जंक्शन से ली थी टैक्सी किराए पर

जानकारी के मुताबिक, 18 जनवरी 2004 को डॉ. देवेंद्र शर्मा जयपुर आया था। यहां रेलवे जंक्शन पर उसने एक टाटा सूमो टैक्सी गाड़ी किराए पर ली। उसने ड्राइवर चांद खां से बातचीत में बहाना बनाया कि वह हापुड़, यूपी से पत्नी व बच्चों को लेकर आएगा। चांद खां अपने भाई शराफत खां के साथ डॉ. देवेंद्र शर्मा को लेकर रवाना हुए। तब देवेंद्र ने खुद का नाम डॉ. मुकेश खंडेलवाल बताकर टैक्सी बुक करवाई थी।

दौसा जिले के महवा पहुंचने पर दोनों भाइयों ने अपने पिता गफ्फार खां से एक एसटीडी बूथ से फोन पर बातचीत की। इसमें एक सवारी को लेकर यूपी जाने और अगले दिन जयपुर लौटने की बात कही थी। इसके बाद दो दिन तक दोनों बेटों के घर नहीं लौटने पर गफ्फार खां ने जीआरपी जयपुर थाने में गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। टाटा सूमो गाड़ी के मालिक गफ्फार खान स्टेट मोटर गैराज में ड्राइवर थे।

एसटीडी बूथ से हुए फोन नंबरों के आधार पर यूपी पहुंची पुलिस और वहीं कैंप किया

डीएसपी महेंद्र भगत के मुताबिक, तब वह जीआरपी में सब इंस्पेक्टर थे। तब थानाप्रभारी मंसूर अली के नेतृत्व में जांच शुरू की। इसमें फोन नंबरों के आधार पर पुलिस महवा स्थित एसटीडी बूथ पर पहुंची। वहां पता चला कि इसी फोन से गफ्फार खान को फोन होने के बाद दूसरा फोन कासमपुर, यूपी में किसी नंबर पर कॉल किया था। यह फोन नंबर कासमपुर, यूपी में एक मोटी चाय वाली महिला का था। वहां महिला ने बताया कि उसके रिश्तेदार उदयवीर और राजू रजवा से बातचीत के लिए डाॅ. देवेंद्र ने फोन किया था। उदयवीर व राजू रजवा अलीगढ़ के रहने वाले थे।

गंगा नहर में क्षत विक्षत हालत में बरामद हुए थे दोनों भाइयों के शव, घड़ी व कंबल से पहचान

इस दौरान यूपी में पुलिस ने एटा जिले में दो लावारिस लाशें गंगा नहर में मिली थी। उन्हें एटा पुलिस ने शव क्षत विक्षत होने से लावारिस समझकर दाह संस्कार कर दिया। उनके घड़ी व कंबल भी पुलिस ने जब्त किए थे। इससे दोनों शवों की हुलिए व बरामद वस्तुओं से शवों की पहचान मृतक भाई चांद व शराफत के तौर में की। तब मार्च-अप्रेल 2004 में जीआरपी ने हत्या का केस दर्ज कर पड़ताल शुरू की।

शातिर इतना कि जयपुर पुलिस को गुमराह कर डबल मर्डर में किसी और को पकड़वा दिया

इसके बाद फिर से तत्कालीन आईजी रेलवे हरिश्चंद्र मीणा के निर्देशन में पुलिस निरीक्षक मंसूर अली, सब इंस्पेक्टर महेंद्र भगत सहित लगभग एक दर्जन पुलिस की टीम यूपी भेजी गई। कई जगह पड़ताल व दबिश के बाद उदयवीर और राजू रजवा का पता चला। उससे पूछताछ में मुकेश खंडेलवाल उर्फ डॉ. देवेंद्र शर्मा के यूपी की जेल में होने का पता चला। पूछताछ में देवेंद्र शर्मा ने जयपुर पुलिस को गुमराह करने के लिए अलीगढ़ के ही एक परिवार को रंजिश वश दोनों भाइयों की हत्या में शामिल करना बताया। तब जीआरपी जयपुर ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

फिर से यूपी पहुंची पुलिस टीम, साक्ष्य एकत्रित कर सीरियल किलर और उसके दोनों साथियों को पकड़ा

इस बीच तत्कालीन एसपी डॉ. प्रशाखा माथुर के निर्देशन में गहन जांच चली। जीआरपी व सदर थाना पुलिस ने जयपुर रेलवे स्टेशन पर टैक्सी चालकों से बातचीत कर दोनों भाईयों को टैक्सी बुक कर रवाना हुए व्यक्ति का हुलिया पूछकर एक स्केच बनवाया था, जो कि डाॅ. देवेंद्र से मिलता जुलता था। इसके बाद सब इंस्पेक्टर महेंद्र भगत के नेतृत्व में पुलिस टीम को यूपी भेजा। तब डॉ. देवेंद्र शर्मा के साथ जेल में एक ही सेल में बंद काजी सावेश नाम के कैदी ने बताया कि देवेंद्र ने डबल मर्डर में जिन्हें गिरफ्तार करवाया है। वे बेकसूर है। दोहरा मर्डर देवेंद्र व उसके साथियों ने करवाया है।

टायलेट जाने के बहाने गाड़ी को रुकवाया, फिर बेल्ट से गला घोंटकर दोनों भाइयों की हत्या की

महेंद्र भगत के मुताबिक, उन्होंने रिकार्ड में दर्ज फोन नंबरों, स्केच व अन्य आधार पर डॉ. देवेंद्र शर्मा व उसके दोनों साथियों उदयवीर व राजू रजवा को पकड़ा। जयपुर में हुई पूछताछ में खुलासा किया कि टैक्सी कार से यूपी पहुंचने पर कासमपुर में डॉ. देवेंद्र शर्मा ने अपने दोनों साथियों को कार में साथ बैठाया। वहां से अपने फुफुरे भाई के यहां रात को ठहरे। लेकिन गतिविधि संदिग्ध होने पर भाई ने अगले दिन अलसुबह घर से रवाना कर दिया।

इसके बाद रास्ते में डाॅ. देवेंद्र शर्मा, राजू रजवा और उदयवीर ने टाॅयलेट के बहाने हाइवे पर गाड़ी रुकवाई। फिर पीछे सीट पर बैठे तीनों आरोपियों ने टैक्सी चालक दोनों भाइयों चांद खां और शराफत खां की बेल्ट से गला घोंटकर हत्या कर दी और फिर दोनों शवों को हजारा नहर में फेंक दिया था। बताया जाता है कि इससे पहले भी डॉ. देवेंद्र ने यूपी व अन्य राज्यों में कई टैक्सी चालकों की हत्या की। उसे गला घोंटकर लोगों को मारने में मजा आता था।

वह शवों को हजारा नहर में फेंक देता था कि ताकी वहां मगरमच्छ शवों को खा जाएं और कोई साक्ष्य नहीं रहे। लेकिन इन दोनों भाइयों के शव बहकर एटा में गंगानहर तक आ गए। इस तरह डबल मर्डर का खुलासा होने पर जीआरपी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। वहीं, पहले गिरफ्तार हुए लोगों को रिहा किया गया।

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