जीएसटी / सर्विसेज कंपनियां 30 अप्रैल तक कंपोजीशन का विकल्प चुन सकेंगी



Service providers can opt for GST composition scheme by April 30 says CBIC
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Service providers can opt for GST composition scheme by April 30 says CBIC

  • 50 लाख रुपए तक टर्नओवर वाली सर्विस कंपनियों को सहूलियत 
  • इन कंपनियों को 6% की दर से जीएसटी देना पड़ेगा 
  • 1.2 करोड़ कंपनियां रजिस्टर्ड हैं इस समय जीएसटी के तहत
  • 20 लाख कंपनियों ने चुन रखा है कंपोजीशन का विकल्प

Dainik Bhaskar

Apr 08, 2019, 08:13 AM IST

नई दिल्ली. छोटी सर्विस कंपनियां 30 अप्रैल तक जीएसटी कंपोजीशन स्कीम का विकल्प चुन सकती हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं कस्टम बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस बारे में सर्कुलर जारी किया है। कंपोजीशन स्कीम वही सर्विस कंपनियां चुन सकती हैं, जिनका टर्नओवर 2018-19 में 50 लाख रुपए तक था। उन्हें 1 अप्रैल से 6% की दर से टैक्स देना पड़ेगा। इसमें 3% सेंट्रल जीएसटी और 3% स्टेट जीएसटी होगा। अभी ज्यादातर सर्विसेज पर 12% और 18% जीएसटी लगता है।

गुड्स-सर्विसेज दोनों बिजनेस वाले भी चुन सकते हैं विकल्प

  1. नई कंपनियां भी इस स्कीम के तहत रजिस्ट्रेशन करवा सकती हैं। जो कारोबारी गुड्स और सर्विसेज दोनों का बिजनेस करते हैं, वे भी इस विकल्प को चुन सकते हैं। अभी तक सर्विसेज कंपनियों को सामान्य श्रेणी में ही रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता था। सिर्फ रेस्तरां को कंपोजीशन की छूट थी।

  2. जीएसटी काउंसिल ने 10 जनवरी को 32वीं बैठक में 50 लाख रुपए तक टर्नओवर वाली सर्विसेज कंपनियों को कंपोजीशन का विकल्प देने का फैसला किया था। लेकिन काउंसिल ने उसी समय यह फैसला भी किया था कि यह बदलाव 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा।

  3. नियम किनके लिए है? 

    • जो कारोबारी गुड्स और सर्विसेज दोनों का बिजनेस करते हैं, वे भी कंपोजीशन स्कीम का विकल्प चुन सकते हैं। 
    • जिन सर्विस कंपनियों का टर्नओवर पिछले साल 50 लाख रुपए से ज्यादा था, वे सामान्य श्रेणी में ही रहेंगी।

  4. इन्हें क्या करना पड़ेगा? 

    • कंपनियों को 30 अप्रैल तक जीएसटी सीएमपी-02 फॉर्म भरना पड़ेगा। जीएसटी पोर्टल पर इसे ऑनलाइन भरा जा सकता है। 
    • नई कंपनी यह विकल्प चुनती है तो उसे रजिस्ट्रेशन के वक्त जीएसटी आरईजी-01 फॉर्म में इसका जिक्र करना पड़ेगा।

  5. कंपोजीशन में तिमाही रिटर्न की सुविधा मिलती है

    • ये कारोबारी टैक्स वाला बिल नहीं दे सकते। ग्राहक से टैक्स ले भी नहीं सकते हैं। बिल पर कंपोजीशन लिखना जरूरी है। 
    • हर महीने के बजाय हर तिमाही टैक्स जमा कर सकते हैं। इन्हें रिटर्न भी तिमाही भरने की सुविधा मिलती है।

  6. अभी क्या: कंपोजीशन मैन्युफैक्चरर और ट्रेडर्स के लिए

    अभी तक कंपोजीशन की सुविधा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और ट्रेडर्स के लिए थी। सर्विसेज में सिर्फ रेस्तरां को यह विकल्प चुनने की सहूलियत थी। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और ट्रेडर्स के लिए पहले इसकी सालाना टर्नओवर की सीमा एक करोड़ रुपए थी। इसे 1 अप्रैल 2019 से बढ़ाकर 1.5 करोड़ कर दिया गया है। कंपोजीशन स्कीम में ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चरर को टर्नओवर के 1% के बराबर जीएसटी देना पड़ता है। रेस्तरां के लिए 5% जीएसटी का नियम है।

  7. टैक्स और ई-वे बिल में मेल नहीं, ऐसी कंपनियों को नोटिस भेजा जा रहा

    जीएसटी अधिकारियों के सामने ऐसे मामले आए हैं जिनमें कारोबारियों द्वारा जमा टैक्स उनके ई-वे बिल से मेल नहीं खाता है। इन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। गाजियाबाद जीएसटी कमिश्नरेट ने एक कारोबारी को नोटिस भेजकर तीन दिन में जवाब मांगा है। सूत्रों के अनुसार कई मामलों में यह बात सामने आई कि ट्रांसपोर्टर एक ही ई-वे बिल पर कई बार सामान ले जा रहे हैं। कुछ कारोबारी ई-वे बिल ही जेनरेट नहीं कर रहे। 

  8. लॉ कंसल्टेंसी फर्म एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर रजत मोहन ने कहा, यह मान लेना गलत होगा कि आंकड़े मेल नहीं खाने का मतलब टैक्स चोरी है। यह मानवीय भूल या सप्लाई में कमी के कारण भी हो सकता है। 50,000 रुपए से अधिक का सामान कहीं ले जाने के लिए ई-वे बिल जरूरी होता है। एक राज्य से दूसरे राज्य में सप्लाई के लिए यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2018 से लागू हुई थी।

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