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महाभारत-2019 /विकास इतना नहीं हुआ कि भाजपा इस मुद्दे पर चुनाव लड़े, हालांकि मोदी को मोदी ही हरा पाएंगे: शेखर गुप्ता



shekhar gupta interview under bhaskar mahabharat 2019
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shekhar gupta interview under bhaskar mahabharat 2019
  • 'मोदीजी को हराया जा सकता है या नहीं यह कहना जल्दबाजी'
  • 'उप्र में सपा-बसपा गठबंधन हुआ तो भाजपा के लिए 2014 को दोहराना असंभव'

Dainik Bhaskar

Oct 07, 2018, 07:35 AM IST

इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक, वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता मानते हैं कि विपक्ष के पास कोई चेहरा नहीं है, जो माेदी का मुकाबला कर सके। उनका मानना है कि इस सरकार में सांप्रदायिकता बढ़ी है। पढ़िए भास्कर के संतोष कुमार से उनकी विशेष बातचीत का दूसरा भाग... 

  • सवाल- क्या महागठबंधन ही मोदी को हरा सकता है?

    जवाब- महागठबंधन अभी बहुत दूर की बात है। बड़ी बात ये होगी कि पांच-छह बड़े राज्यों में लोकल गठबंधन हो जाए जैसे- सपा-बसपा, कांग्रेस-एनसीपी या शिवसेना-बीजेपी का गठबंधन होगा या नहीं? ऐसी बातों से फर्क पड़ेगा। मोदीजी को हराया जा सकता है या नहीं ये कहना अभी जल्दी है। अगर लोग नाराज हो जाएंगे तो ही मोदी हारेंगे, नहीं तो नहीं। 
     

  • सवाल- भाजपा के मुद्दे क्या होंगे?

    जवाब- वे विकास का मुद्दा लेकर नहीं जा सकते हैं, क्योंकि विकास इतना हुआ नहीं है। आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है। खासकर टैक्सपेयर पर ज्यादा टैक्स लगाए हैं। एक तरह से इंदिरा गांधी की स्टाइल से वेलफेयर इकोनॉमिक्स चलाई है। वही बात होगी जो 2014 में हुई थी कि हम भ्रष्ट नहीं हैं, देश को खतरा है। और फिर हिंदू-मुसलमान का ध्रुवीकरण होगा।

  • सवाल- यूपी में सपा-बसपा का गठबंधन हो पाएगा?

    जवाब- गठबंधन वही होता है जो दोनों को फायदा दे। इस गठबंधन में दोनों को फायदा है और नहीं होने से दोनों को नुकसान है। हो सकता है कि बीएसपी एकदम से ही खत्म हो जाए, जैसा कि राज्य के चुनाव में हुआ था। उनके लिए इंसेंटिव वहां बहुत ज्यादा है। गठबंधन हो जाता है तो भाजपा के लिए 2014 को दोहराना असंभव है।

  • सवाल- आरोप हैं कि मोदी सरकार में सांप्रदायिकता और कट्‌टरता बढ़ी है?

    जवाब- जी हां, बिल्कुल बढ़ी है। लोगों में जो शर्म थी, कुछ बात कहने की या पोजीशन लेने की, वो खत्म हो गई है। काफी हद तक कट्‌टरता सामने आई है। उनकी राजनीति यही है। ये नहीं होता तो कभी योगी आदित्यनाथ को सीएम नहीं बनाते उप्र में।

  • सवाल- चेहराविहीन विपक्ष मोदी का सामना कर पाएगा?

    जवाब- विपक्ष के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो मोदी का मुकाबला कर सकता है। इसलिए मैंने कहा कि अगर उनको हारना है या हराना है तो वे खुद ही हरा पाएंगे, कोई और नहीं

  • सवाल-तो मोदी को खुद मोदी ही हरा सकते हैं?

    जवाब- जी।

  • सवाल- सरकार के आंकड़ों को विपक्ष झूठा बता रहा है। क्या वास्तव में देश में आंकड़ों की बाजीगरी चल रही है?

    जवाब- जी हां, इस समय आंकड़ों में वो भरोसा नहीं है जो पहले हुआ करता था। रिजर्व बैंक या एनएसओ के आंकड़े तो मानने लायक हैं। लेकिन बहुत फालतू आंकड़े भी फेंके जाते हैं। जैसे इतना निवेश हो गया, इतनी सड़कें बन गईं। सड़कों के आंकड़े तो भी काफी हद तक ठीक हैं। लेकिन इतना एलपीजी हो गया, रेलवे आदि के आंकड़े जुमलेबाजी हैं।  

  • सवाल- मीडिया बंटा हुआ है। या तो प्रो-मोदी या एंटी-मोदी। ऐसी धारणा बन रही है कि बड़े पत्रकार भी तटस्थ नहीं हैं?

    जवाब- तटस्थ कोई पत्रकार नहीं होता। आप राय न दें तो वो तटस्थता बेवकूफी है, दीवालियापन है। तटस्थ का मतलब है कि जो सच है, तथ्य है, उस पर जाएं, तब वो फेयर जर्नलिज्म है। वो ऑब्जेक्टिविटी है, यानी ऑब्जेक्टिविटी हो सकती है, न्यूट्रिलिटी नहीं होती और ऑब्जेक्टिविटी को न्यूट्रैलिटी से कंफ्यूज नहीं करना चाहिए।

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