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जन्माष्टमी पर रोचक तथ्य:एक ही पत्थर से बनी थी कृष्ण की तीन छवियां : मुखारविंद गोविंददेव जी, वक्षस्थल गोपीनाथ जी और चरण मदनमोहन जी

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
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जयपुर में स्थित श्री राधा गोविंद देव जी का मंदिर
  • धार्मिक मान्यता है कि इन तीनों मंदिरों में एक साथ दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है
  • राजस्थान के करौली जिले में है मदनमोहन जी का मंदिर, जयपुर में गोविंददेव जी व गोपीनाथ जी

राजस्थान की धरती अपने प्रख्यात मंदिरों और चमत्कारों से भरी हुई है। यहां हर प्रख्यात मंदिर के पीछे एक अनूठी कहानी है। इनका अपना एक इतिहास है। ऐसे ही राजधानी जयपुर में बसे श्री राधागोविंद देव जी, गोपीनाथ जी और करौली जिले में बसे मदनमोहन जी के प्रसिद्ध मंदिर है, जो कि भगवान कृष्ण की अलग-अलग छवियों के विग्रह ना केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यता है कि इन तीनों मंदिरों में एक साथ दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव है। इसी मान्यता को लेकर अनेक श्रद्धालु इन तीनों मंदिरों में एक ही सूर्य में मतलब एक ही दिन में दर्शनों को पहुंचते हैं।

श्रीकृष्ण के प्रपौत्र ने बनवाई थी मूर्तियां

करौली राजपरिवार के राजपुरोहित पंडित प्रकाश शर्मा जत्ती के मुताबिक ऐसी धार्मिक मान्यता है कि एक बार भगवान कृष्ण के प्रपौत्र ने अपनी दादी से भगवान कृष्ण के स्वरूप के बारे में पूछा और कहा कि आपने तो भगवान कृष्ण के दर्शन किए उनका स्वरूप कैसा था। भगवान कृष्ण के स्वरूप को जानने के लिए उन्होंने जिस काले पत्थर पर कृष्ण स्नान करते थे उस पत्थर से 3 मूर्तियों का निर्माण किया। पहली मूर्ति में भगवान कृष्ण के मुखारविंद की छवि आई जो आज जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में विराजमान है।

जयपुर में स्थित श्री राधागोविंद देव जी मंदिर, जिन्हें श्री कृष्ण का मुखारविंद कहा गया
जयपुर में स्थित श्री राधागोविंद देव जी मंदिर, जिन्हें श्री कृष्ण का मुखारविंद कहा गया

दूसरी मूर्ति में भगवान कृष्ण के वक्षस्थल की छवि आई जो जयपुर के ही जयलाल मुंशी के चौथे चौराहे पर स्थित गोपीनाथ जी के मंदिर में विराजमान है। तीसरी मूर्ति में भगवान कृष्ण के चरणारविंद की छवि आई जो आज करौली में भगवान मदन मोहन के रूप में विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि एक ही सूर्य में तीनों विग्रहों के दर्शन करने से भगवान कृष्ण के संपूर्ण स्वरूप के दर्शन होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज लाखों श्रद्धालु भगवान मदन मोहन के दर्शन को पहुंचते है। करौली के भगवान मदन मोहन, जयपुर के गोविंद देव जी एवं जयपुर में विराजमान गोपीनाथजी के एक ही दिन में दर्शन करने से भगवान कृष्ण के संपूर्ण स्वरूप के दर्शन प्राप्त होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जयपुर में चांदपोल स्थित श्री राधा गोपीनाथ जी का मंदिर, मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण के वक्षस्थल का विग्रह माना गया
जयपुर में चांदपोल स्थित श्री राधा गोपीनाथ जी का मंदिर, मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण के वक्षस्थल का विग्रह माना गया

इस तरह वृंदावन से जयपुर पहुंची भगवान की मूर्तियां, दो जयपुर में और एक करौली आई

राज ऋषि प्रकाश शर्मा ने बताया कि मुगलों के आक्रमण के समय हिंदू मंदिर और मूर्तियों को तोड़ा जा रहा था। भगवान मदन मोहन की मूर्तियों को बचाने के लिए उन पर सिंदूर लगाकर मिट्टी के टीले में दबा दिया गया और छुपते-छुपाते हुए उन्हें वृंदावन से जयपुर पहुंचाया गया। इस दौरान करौली के तत्कालीन नरेश और श्रीकृष्ण के परम भक्त गोपाल सिंह जी को भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिया एवं करौली ले जाने की बात कही।

गोपाल सिंह जयपुर पहुंचे और मूर्ति करौली लेकर जाने की बात कही, तो गोपाल सिंह से मूर्ति पहचानने के लिए कहा। कहते हैं कि इस दौरान राजा गोपाल सिंह की आंखों पर पट्टी बांधकर मूर्ति पहचानने के लिए कहा। कहा जाता है कि भगवान मदन मोहन ने उनकी उंगली पकड़ ली। जिसके बाद भगवान मदन मोहन की प्रतिमा करौली पहुंची और महलों के बीच बने भगवान राधा गोपाल जी के मंदिर में स्थापित हुई।

करौली शहर में स्थित श्री मदनमोहन जी का मंदिर, मान्यताओं के अनुसार इन्हें भगवान श्री कृष्ण के चरणों के छवि माना गया है।
करौली शहर में स्थित श्री मदनमोहन जी का मंदिर, मान्यताओं के अनुसार इन्हें भगवान श्री कृष्ण के चरणों के छवि माना गया है।

करीब 300 वर्ष पूर्व भगवान मदन मोहन का विग्रह करौली के तत्कालीन नरेश और भगवान कृष्ण के परम भक्त गोपाल सिंह करौली लेकर आए थे। जिन्होंने करौली राजमहल में बने राधा गोपाल जी के मंदिर में स्थापित किया। मंदिर में भगवान मदन मोहन राधारानी जी के साथ विराजमान है, तो भगवान के बाईं ओर राधा गोपालजी एवं दाई ओर राधा - ललिता जी की मूर्तियां विराजमान है। भगवान मदन मोहन मंदिर में गौड़ीय सम्प्रदाय के अनुसार पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान कृष्ण के प्रपौत्र पद्नानाभ के हाथ से निर्मित श्रीकृष्ण की तीन मूर्तियों में से एक प्रतिमा भगवान मदन मोहन के रूप में करौली में विराजमान है।

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