• Hindi News
  • National
  • Plastic Bags: Single Use Plastic Bag Ban Latest News; Polythene 20 times cheaper than cotton bags

एनालिसिस / अभी 5% प्लास्टिक सिंगल यूज; कॉटन बैग से पॉलीथीन 20 गुना सस्ती, इसलिए इस्तेमाल ज्यादा



Plastic Bags: Single Use-Plastic Bag Ban Latest News; Polythene 20 times cheaper than cotton bags
Plastic Bags: Single Use-Plastic Bag Ban Latest News; Polythene 20 times cheaper than cotton bags
X
Plastic Bags: Single Use-Plastic Bag Ban Latest News; Polythene 20 times cheaper than cotton bags
Plastic Bags: Single Use-Plastic Bag Ban Latest News; Polythene 20 times cheaper than cotton bags

  • एक पेपर बैग की कीमत 5 से 10 रुपए है, इसे 4 से 5 बार इस्तेमाल कर सकते हैं
  • कॉटन बैग की कीमत 20 रुपए, एक स्टडी के मुताबिक इसे 173 बार इस्तेमाल कर सकते हैं
  • पॉलिथीन बैग 1 रुपए में मिलता है, लेकिन मजबूती के हिसाब से सिर्फ दो से तीन बार इस्तेमाल करने लायक होता है

Dainik Bhaskar

Oct 09, 2019, 11:59 AM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ऐसे प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कम करने के लिए जागरूकता लाना चाहती है, जो सिंगल यूज प्लास्टिक की कैटेगरी में आते हैं। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर प्रतिबंध की घोषणा होने वाली थी, लेकिन सरकार अभी केवल जागरूकता बढ़ाना चाहती है। जानकारों का भी कहना है कि देश में कुल प्लास्टिक की खपत का सिर्फ 5% ही सिंगल यूज प्लास्टिक है। कॉटन बैग की तुलना में पॉलीथीन 20 गुना सस्ती है, इसलिए इसका इस्तेमाल ज्यादा है और इसे रोकने की जरूरत है।

 

सिंगल यूज प्लास्टिक क्या होता है?

प्लास्टिक की बनी ऐसी चीजें, जिनका हम सिर्फ एक ही बार इस्तेमाल कर सकते हैं या इस्तेमाल कर फेंक देते हैं और जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, वह सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाता है। इसका इस्तेमाल चिप्स पैकेट की पैकेजिंग, बोतल, स्ट्रॉ, थर्मोकॉल प्लेट और गिलास बनाने में किया जाता है।

 

देश में सालाना कितनी खपत?

मिनिस्ट्री ऑफ अर्बन एंड हाउसिंग अफेयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 1996 में 61 हजार टन प्लास्टिक की सालाना खपत होती थी। यह 2017 में बढ़कर 1.78 करोड़ टन पहुंच गई। गैर-सरकारी संगठन इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (आईपीसीए) के डायरेक्टर आशीष जैन बताते हैं कि देश में जितनी प्लास्टिक की खपत होती है, उसमें सिंगल यूज प्लास्टिक का सिर्फ 4% से 5% हिस्सा ही है, लेकिन इसका वजन हल्का होने की वजह से हमें ये चारों तरफ दिखाई देता है। प्लास्टिक का इस्तेमाल कई जगह होता है। जैसे- टीवी, रिमोट, एसी, रेफ्रिजरेटर, कार, फर्नीचर आदि। चूंकि सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल हम रोज करते हैं, इसलिए इसकी चर्चा ज्यादा होती है और पर्यावरण को ज्यादा नुकसान होता है।

 

 Plastic

 

प्लास्टिक का विकल्प क्या हो सकता है?

सरकार 12 तरह के सिंगल यूज प्लास्टिक प्रोडक्ट पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है, लेकिन आशीष कहते हैं कि सरकार इन पर प्रतिबंध लगाकर जो विकल्प लेकर आएगी, उससे पर्यावरण को ज्यादा नुकसान हो सकता है। सिंगल यूज प्लास्टिक रिसाइकलेबल भी है, लेकिन समस्या इसे इकट्ठा करने की है। अगर इन प्लास्टिक प्रोडक्ट पर प्रतिबंध लगने के बाद कोई ऐसा विकल्प आ गया, जिसे एकत्रित करने या रिसाइकल करने में और ज्यादा मुश्किल हुई, तो इससे हालात बदतर हो सकते हैं। वे कहते हैं कि प्लास्टिक का अपना महत्व है और इसकी जरूरत भी है। उदाहरण के लिए हम दूध लाने के लिए प्लास्टिक बैग के अलावा और कोई विकल्प नहीं देख सकते। 

 

कैरी बैग से 20 गुना महंगा कॉटन बैग, पेपर बैग से डिफॉरेस्टेशन होगा

आशीष कहते हैं कि कॉटन बैग विकल्प हो सकता है, लेकिन वह बहुत महंगा होगा। 1 किलो प्लास्टिक बैग 60 से 70 रुपए में मिल जाता है। इसमें करीब 60 प्लास्टिक कैरी बैग आते हैं। इस हिसाब से एक कैरी बैग अधिकतम 1 रुपए का पड़ता है। लेकिन उसी साइज या उसी कैपिसिटी का कॉटन बैग लेते हैं, तो उसकी कीमत 20 रुपए होती है। इसलिए ये आर्थिक दृष्टि से उतना बेहतर नहीं होगा। अगर प्लास्टिक बैग की जगह पेपर बैग का विकल्प लेते हैं, तो इससे पर्यावरण को ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि पेड़ काटकर कागज बनाया जाता है। अगर प्लास्टिक कैरी बैग की जगह पेपर बैग की खपत बढ़ती है, तो इससे डिफॉरेस्टेशन (पेड़ कटना) बढ़ने का खतरा है।
 

 

पॉलीथीन (सिंगल यूज प्लास्टिक)

पेपर बैग

कॉटन बैग

वजन

7.5 से 12.6 ग्राम

55.2 ग्राम

78.7 से 229.1 ग्राम

वॉल्यूम कैपेसिटी

17.9 से 21.8 लीटर

20.1 लीटर

17 से 33.4 लीटर

इस्तेमाल

2 से 3 बार

4 से 5 बार

173 बार या उससे ज्यादा

कीमत (अनुमानित)

50 पैसे से 1 रुपए

5 से 10 रुपए

10 से 20 रुपए

कार्बन फुटप्रिंट

1.3 किलो/1000 बैग

21.8 किलो/1000 बैग

38.6/1000 बैग

डिकंपोजिशन

1000 साल तक भी जमीन की सतह पर रहती है और डिकंपोज नहीं होती।

जैविक प्रक्रिया से डिकंपोज किया जा सकता है और रिसाइकल भी किया जा सकता है।

जैविक प्रक्रिया से डिकंपोज हो जाता है।

पर्यावरण को कितना नुकसान

प्लास्टिक रिसाइकल नहीं किया जाता है, तो यह वायु, जल और भूमि को प्रदूषित करेगा। इसे जलाने से जहरीली गैस निकलती है और जब यह नदी या समुद्र में पहुंचता है तो जीवों को नुकसान पहुंचाता है।

पेपर पेड़ों के पल्प से बनाया जाता है तो पेपर के अधिक इस्तेमाल से पेड़ों के ज्यादा काटे जाने की संभावना है। इसे बनाने में पर्यावरण को नुकसान है, लेकिन इस्तेमाल से नुकसान नहीं।

कोई नुकसान नहीं।

सोर्स : ब्रिटिश पर्यावरण एजेंसी रिपोर्ट 2011

 

रोजगार के विकल्प भी देखने होंगे

आशीष कहते हैं कि अगर प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगता है तो इससे प्लास्टिक के प्रोडक्शन में काम कर रहे लोगों का रोजगार जाने का खतरा है। प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग के छोटे से छोटे प्लांट में भी 2.5 करोड़ तक का इन्वेस्टमेंट होता है। इनसे कम से कम 10 से 15 लोग जुड़े होते हैं। अगर ये सब बंद हो जाता है तो इससे न सिर्फ रोजगार जाने का खतरा होगा, बल्कि जीडीपी को भी नुकसान पहुंचेगा। देश की जीडीपी में पेट्रोकेमिकल्स का एक चौथाई यानी 25% योगदान है। जितने भी प्लास्टिक प्रोडक्ट हैं, वो पेट्रोकेमिकल्स में आते हैं। अगर कुछ सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रोडक्शन बंद होता है या आयात-निर्यात बंद होता है, तो इससे जो 25% योगदान है, उसमें कम से कम 10% की कमी आ सकती है।

 

कंपनियों की क्या तैयारी है?

  • अमेजन इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट अखिल सक्सेना ने पिछले दिनों भास्कर APP को बताया था कि प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए हमने पैकेजिंग फ्री शिपमेंट लॉन्च किया है।
  • वहीं, फ्लिपकार्ट के मुताबिक, प्लास्टिक पैकेजिंग की जगह कंपनी मल्टी-यूज क्लॉथ जिपर बैग लाने की तैयारी कर रही है। 
  • रोजमर्रा की सबसे जरूरी चीजों में शामिल दूध के पैकेट 55 माइक्रोन मोटाई के कारण सिंगल यूज प्लास्टिक की कैटेगरी में नहीं आएगा।
  • गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन ने बताया कि अगर ट्रेटापैक से दूध बांटेंगे तो ग्राहकों पर प्रति लीटर 10 रुपए का भार आएगा

DBApp

COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना