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दिल्ली / पहली बार सॉफ्टवेयर से अप्रूव होगा इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट का पेपर



software will be approved engineering and management paper
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software will be approved engineering and management paper

  • अगले साल से होने वाली परीक्षाओं के लिए एआईसीटीई नया पेपर पैटर्न आजमाएगी
  • सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग मिलेगी, पहली वर्कशॉप आज से कोच्चि में
     

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 06:42 AM IST

अमित कुमार निरंजन, नई दिल्ली. अब इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के पेपर खास सॉफ्टवेयर से अप्रूव होने के बाद ही फाइनल होंगे। अगर प्रश्नपत्र में कोई भी गड़बड़ी हुई या ये तय मानकों से कमतर हुआ तो सॉफ्टवेयर यह कमी पकड़ लेगा। अगले साल से सॉफ्टवेयर से अप्रूव होने वाले पेपर ही फाइनल होंगे।

 

ये साॅफ्टवेयर कॉपी जांचने के बाद छात्रों को भी बताएगा कि कौन से क्षेत्र में उनका प्रदर्शन कमजोर है। कुछ पैरामीटर तय किए गए हैं, जिनके आधार पर कॉपी जांची जाएगी। इसके लागू होने से रट्‌टा मारकर लिखने वाले छात्रों के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी। 

 

सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल और इसके जरिए पेपर बनाने के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके लिए पहली वर्कशाॅप आज यानी 7 दिसंबर से कोच्चि में शुरू हो रही है, जिसमें 150 शिक्षक हिस्सा लेंगे। इसी तरह से पूरे देश में डेढ़ माह में 15 वर्कशॉप लगेंगी। इस तरह ढाई हजार शिक्षकों को नए पेपर के पैटर्न के बारे में बताया जाएगा। टेक्निकल एजुकेशन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शेट्‌टार कमेटी ने ये नया पैटर्न तैयार किया है।

 

ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के सलाहकार राजीव कुमार ने बताया कि जिन ढाई हजार शिक्षकों को नए पेपर पैटर्न का प्रशिक्षण दिया जाएगा, वे शिक्षक अन्य शिक्षकों को भी नए पेपर पैटर्न के बारे में बताएंगे। इस तरह दो से तीन महीने में सभी विवि के पेपर बनाने वाले शिक्षकों को प्रशिक्षित कर दिया जाएगा।

 

अगले साल परीक्षा देने वाले एआईसीटीई के करीब 15 लाख छात्रों को नए पेपर पैटर्न से गुजरना होगा। इस बदलाव के दो बड़े मकसद हैं- पेपर की गुणवत्ता में किसी भी कमी से बचना और छात्रों में रट्‌टामार की आदत खत्म करना। अब जो पेपर बनेंगे, उनमें व्यावहारिक ज्ञान पर जोर होगा।

 

अब तक टेक्निकल कमेटी मैनुअल तरीके से पेपर सेट करती थी। पेपर तो अब भी मैनुअल ही सेट होंगे, लेकिन इन्हें सॉफ्टवेयर की मदद से जांचा जाएगा। अगर तय मानकों के हिसाब से कोई भी कमी दिखी तो सॉफ्टवेयर पेपर को अप्रूव ही नहीं करेगा। पेपर बनाने वाली कमेटी को पेपर में सुधार कर फिर से पेपर सॉफ्टवेयर से अप्रूव कराना होगा। छात्रों के नंबरों की भी सॉफ्टवेयर में एंट्री की जाएगी। सॉफ्टवेयर बताएगा कि तय मानकों पर छात्रों ने कितने-कितने नंबर पाए हैं। 

 

4 मानकों पर पेपर बनेगा; 46% सवाल प्रैक्टिकल संबंधित :

अब तक सभी प्रश्नों के हिसाब से नंबर तय हो जाते थे। यानी अलग-अलग प्रश्नों के हिसाब से अलग-अलग नंबर। अब चार मानकों के आधार पर पेपर बनेगा। ये चार पैमाने होंगे- एप्टीट्यूड के आधार पर प्रश्न, व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर प्रश्न, मूल्यांकन के आधार पर और विश्लेषण के आधार पर प्रश्न। बीटेक, एमटेक और एमबीए जैसे प्रोग्राम में 36% सवाल एप्टीट्यूड के आधार पर, 46% सवाल व्यावहारिक ज्ञान पर और 9-9% सवाल मूल्यांकन और विश्लेषण पर आधारित होंगे। 

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