• Hindi News
  • National
  • Some Hindus Returning From The Valley To Jammu; After The Killing Of Innocents, The Fear Of The 90s Is Seen, 30% Of The Tourists Canceled The Booking

कश्मीर में कुछ हिंदू घाटी से जम्मू लौट रहे:बेगुनाहों की हत्या के बाद दिख रहा 90 के दशक जैसा खौफ, 30% पर्यटकों ने बुकिंग रद्द की

18 दिन पहलेलेखक: मोहित कंधारी, मुदस्सिर कुल्लू और हारून रशीद
  • कॉपी लिंक

कश्मीर में बौखलाए आतंकी निर्दोषों को निशाना बना रहे हैं। कश्मीर में 90 के दशक के खौफजदा दिनों की वापसी की आहट हो रही है। कुछ हिंदू परिवार घाटी छोड़कर जाने भी लगे हैं। हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। घाटी में काम करने वाले एक हिंदू कर्मचारी ने कहा कि उसका परिवार उसे जम्मू वापस आने की गुहार लगा रहा है। उन्होंने कहा कि गैर-मुसलमानों की सुरक्षा के लिए स्थिति ठीक नहीं है और हमें कुछ समय के लिए निकल जाना चाहिए। एक कश्मीरी पंडित स्कूल टीचर ने कहा कि हमने अपना सामान बांध लिया है। हम वापस जम्मू जा रहे हैं।

यहां हमारी सुरक्षा कौन करेगा। कश्मीर पंडित संघर्ष समिति के संजय टिक्कू ने कहा कि 1990 का दौर घाटी में वापस आ गया है। केवल भगवान ही हमें बचाएंगे। वहीं गुरुवार को प्रिंसिपल सुपिंदर के घर पर सभी धर्म के लोग जुटे। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।

उधर, आतंक के फिर सिर उठाने के बाद सैलानियों के कदम भी ठिठकने लगे हैं। कश्मीर में पिछले 3 माह के दौरान 3 लाख सैलानी आए थे। हर दिन 3 से 4 हजार सैलानी यहां पहुंच रहे थे। पर आतंकियों द्वारा हत्याओं का दौर छेड़ने के बाद 30% पर्यटकों ने बुकिंग रद्द कराई है।

श्रीनगर में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले मोहम्मद शरीफ का कहना है कि बिजनेस पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार कश्मीर में इस वर्ष अब तक लगभग 3 लाख पर्यटक आ चुके हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कश्मीर के हालात को लेकर गुरुवार को नई दिल्ली में आला अफसरों की बैठक भी ली।

कश्मीर की सड़कों पर डर छा गया है, कोई नहीं जानता कि अगला निशाना कौन है। सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एक सरकारी अस्पताल के एक कर्मचारी ने कहा कि हमारे अस्पतालों और कार्यालयों में गैर-मुस्लिम कर्मचारी हैं, हम नहीं जानते कि उन्हें क्या बताया जाए, उन्हें कैसे आश्वस्त किया जाए।

यहां हमारी सुरक्षा कौन करेगा, हम कहां जाएं

उपवास पर थे टीचर दीपक
ईदगाह इलाके में मारे गए टीचर दीपक के एक रिश्तेदार ने बताया कि उसने घटना से पहले ही पत्नी आराधना से फोन पर बात की थी। नवरात्र स्थापना की शुभकामनाएं देने के साथ ही उसने बताया था कि उसने व्रत भी रखा है। आराधना ने रोते हुए कहा कि किसी को भी कश्मीर नहीं जाना चाहिए। आतंकी वहां किसी को भी मार सकते हैं।

अब सब मुश्किल लग रहा
कश्मीर में पिछले कुछ समय से फिजा में बहुत सकारात्मकता थी। एक टूर ऑपरेटर ने कहा कि सिनेमाघरों के उद्घाटन और नाइट लाइफ को फिर से शुरू करने की बात थी, लेकिन अब सब कुछ मुश्किल लग रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें पर्यटकों से कई कॉल आ रहे हैं। ज्यादातर पर्यटक बुकिंग्स रद्द करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

आतंकी ढूंढ़ रहे सॉफ्ट टारगेट
एक सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार उग्रवादी सुरक्षा बलों का सामना नहीं कर पा रहे है इसीलिए वो सॉफ्ट टारगेट ढूंढ रहे हैं। ये हत्याएं ऐसे समय में हुई हैं जब कश्मीर पर्यटकों के आगमन से गुलजार था। दर्जनों केंद्रीय मंत्री रोज कश्मीर आ रहे थे। विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे थे। गृह मंत्री अमित शाह के इस महीने के अंत में आने की उम्मीद है।

रोजी को आए हैं, जा नहीं सकते
हाल की वारदातों से सहमे भूपेश कुमार का कहना है कि हम उत्तरप्रदेश से यहां रोजी-रोटी कमाने के लिए आए हैं। हम किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं हैं। हाल में बिहार के एक मजदूर की हत्या के बाद हमारे मन में डर समाया हुआ है। भूपेश ने कहा कि हम वापस भी नहीं जा सकते हैं। भूपेश पिछले चार साल से कश्मीर में रह रहे हैं।

छात्र और परिजनों को दीपक के लिए आवाज उठानी होगी
दीपक के चचेरे भाई ने कहा कि छात्र और उनके परिजनों को दीपक के लिए आवाज उठानी चाहिए। आतंक का हर संभव विरोध होना चाहिए। यदि घाटी के लोग दीपक के पक्ष में खड़े होंगे तो ही लोग घाटी नहीं छोड़ेंगे। उधर, कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि निहत्थे नागरिकों की हत्या कश्मीर में सदियों पुराने पारंपरिक सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की साजिश है।

खबरें और भी हैं...