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चिंतन से दूर होगी कांग्रेस की चिंता?:एक परिवार-एक टिकट से सॉफ्ट हिंदुत्व तक; सोनिया राज में चौथी बार चिंतन से संजीवनी की आस

उदयपुर/नई दिल्ली10 दिन पहलेलेखक: अविनीश मिश्रा

22 राज्यों की विधानसभा और 2 लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद उदयपुर में कांग्रेस पार्टी का चिंतन जारी है। यह पहला मौका नहीं है, जब कांग्रेस चिंतन शिविर का आयोजन कर रही है। सोनिया गांधी के रहते कांग्रेसियों के लिए चौथी बार चिंतन के लिए शिविर लगाया गया है। शिविर में वन फैमिली, वन टिकट का फॉर्मूला लागू करने की घोषणा की गई है। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों का टर्म भी फिक्स्ड किया जाएगा। अनुशासन को लेकर भी सख्त फैसले लिए जाएंगे।

दिलचस्प बात है कि गांधी परिवार को इन दोनों सख्त नियमों के दायरों से बाहर रखा गया है। सोनिया ने शुरुआती भाषण में कहा है कि यह कर्ज चुकाने का वक्त है और नेता अपनी इच्छाओं को छोड़कर पार्टी के लिए काम करें। सोनिया की स्पीच के बाद उदयपुर से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में अब एक ही सवाल तैर रहा है, क्या उदयपुर में शिविर लगाकर सत्ता में कांग्रेस उदय कर पाएगी?

सॉफ्ट हिंदुत्व के फॉर्मूले से सत्ता पाने की कोशिश
कांग्रेस के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव का पोस्टर लगाया गया है। दरअसल, 2004 में उनके निधन के बाद से यह पहला मौका है, जब पार्टी ने नरसिम्हा राव को फिर से जगह दी है। 2011 में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में गांधी परिवार के करीबी मणिशंकर अय्यर ने दावा किया था कि बाबरी विध्वंस में राव की भूमिका के बाद पार्टी हाईकमान उनसे असहज महसूस कर रही थी।

उदयपुर के चिंतन शिविर में पहली बार पूर्व पीएम नरसिम्हा राव का पोस्टर लगाया गया है। राव 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर रह चुके हैं। फोटो : ताराचंद गवारिया
उदयपुर के चिंतन शिविर में पहली बार पूर्व पीएम नरसिम्हा राव का पोस्टर लगाया गया है। राव 1991 से 1996 तक भारत के प्रधानमंत्री पद पर रह चुके हैं। फोटो : ताराचंद गवारिया

हालांकि, उनके पोस्टर लगाए जाने को कांग्रेस के सॉफ्ट हिंदुत्व की ओर बढ़ते हुए देखा जा रहा है। राव अयोध्या में बाबरी विध्वंस के वक्त भारत के प्रधानमंत्री थे। पिछले कुछ सालों से इस स्ट्रैटजी पर राहुल गांधी भी बढ़ते दिख रहे हैं। राहुल अक्सर हिंदू और हिंदुत्व को लेकर बयान देते रहे हैं।

कांग्रेस में अब एक परिवार से एक ही टिकट, मगर सोनिया-राहुल पर अप्लाई नहीं

कांग्रेस संगठन में गांधी परिवार को मिलेगी मजबूती
लगातार आंतरिक कलह से जूझ रहे गांधी परिवार को भी इस चिंतन शिविर से मजबूती मिल सकती है। चुनावों में हार की जिम्मेदारी को लेकर लगातार पार्टी में घमासान मचा हुआ है। वहीं शिविर में G-23 समेत कांग्रेस के सभी नेता एकजुट हुए हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि शिविर के बाद फिर से गांधी परिवार कांग्रेस की सत्ता के केंद्र में रहेगा। शिविर में राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाए जाने की भी मांग उठ सकती है। इसी साल कांग्रेस में नए अध्यक्ष का चुनाव होना है।

हाल ही में 5 राज्यों में मिली हार के बाद कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी को लेकर सवाल उठने लगे थे, जिसके बाद सोनिया ने CWC की मीटिंग में इस्तीफे की पेशकश की थी।
हाल ही में 5 राज्यों में मिली हार के बाद कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी को लेकर सवाल उठने लगे थे, जिसके बाद सोनिया ने CWC की मीटिंग में इस्तीफे की पेशकश की थी।

उदयपुर चिंतन में नवसंकल्प लेंगे कांग्रेसी
कांग्रेस ने इस चिंतन शिविर का नाम नवसंकल्प दिया है। इसमें खेती-किसानी, रोजगार, राष्ट्रीय सुरक्षा, दलित-आदिवासियों पर अत्याचार रोकना समेत 6 मुद्दों पर प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने के लिए शिविर में कांग्रेसी संकल्प लेंगे।

अब आइए जानते हैं सोनिया के रहते कांग्रेस में हुए 3 पहले के चिंतन शिविर के बारे में...

2013: जयपुर चिंतन में राहुल ही राहुल
2013 में केंद्र की सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने जयपुर में चिंतन शिविर लगाया था। अन्ना आंदोलन, UP, गुजरात, पंजाब सहित कई राज्यों के असेंबली इलेक्शन में करारी हार के बाद पार्टी ने यह चिंतन शिविर लगाया था, लेकिन शिविर में चिंतन के बजाय राहुल गांधी के प्रमोशन पर ही अधिक फोकस रहा। शिविर में महासचिव पद पर काम कर रहे राहुल गांधी को उपाध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया। वहीं, कांग्रेस ने इस शिविर में फैसला किया कि प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष लोकसभा या विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

जयपुर के चिंतन शिविर में राहुल गांधी ने भावुक भाषण दिया था। राहुल ने अपने भाषण में सत्ता की तुलना जहर से की थी।
जयपुर के चिंतन शिविर में राहुल गांधी ने भावुक भाषण दिया था। राहुल ने अपने भाषण में सत्ता की तुलना जहर से की थी।

2004: शिमला शिविर में UPA बनाने का फैसला
2004 के लोकसभा चुनाव से एक साल पहले कांग्रेस ने शिमला में चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में कांग्रेस ने पहले शिविर में तय की गई नीति को पलटकर समान विचारधारा के दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने का फैसला किया। शिविर में UPA बनाने का ऐलान किया गया। कांग्रेस को इस निर्णय का फायदा भी मिला और 2004 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने शाइनिंग इंडिया के रथ पर सवार अटल-आडवाणी की जोड़ी को पछाड़कर केंद्र में सरकार बनाई।

शिमला चिंतन शिविर में कांग्रेस ने देशभर में गठबंधन करने का फैसला किया। प्रणव मुखर्जी, अर्जुन सिंह और अहमद पटेल को इसका जिम्मा सौंपा गया था।
शिमला चिंतन शिविर में कांग्रेस ने देशभर में गठबंधन करने का फैसला किया। प्रणव मुखर्जी, अर्जुन सिंह और अहमद पटेल को इसका जिम्मा सौंपा गया था।

1998: सोनिया के नेतृत्व में पहला चिंतन शिविर
राजीव गांधी की हत्या के 7 साल बाद कांग्रेस संगठन में गांधी परिवार की वापसी हुई और सीताराम केसरी को हटाकर सोनिया गांधी ने पार्टी की कमान संभाली। 1998 में सोनिया ने मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में कांग्रेस नेताओं को एकजुट कर चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस शिविर में गठबंधन से त्रस्त कांग्रेस ने एकला चलो की नीति तय की। शिविर में पंचायती राज को लेकर 14 सूत्रीय योजना, खेती से जुड़ी आठ सूत्रीय योजना, सांप्रदायिकता के बढ़ते खतरे और बीजेपी के तेजी से बढ़ते असर से निपटने के लिए विस्तृत योजना पेश की गई थी।

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