क्रिकेट / उतार-चढ़ाव से भरा रहा गांगुली का करियर; टीम से हटाने पर भी टूटे नहीं, घरेलू टूर्नामेंट से की वापसी



सौरव गांगुली। सौरव गांगुली।
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सौरव गांगुली।सौरव गांगुली।

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18 हजार से ज्यादा रन बनाने वाला यह खिलाड़ी अब बीसीसीआई अध्यक्ष बनने वाला है
  • गांगुली ने कहा था- मैं जैसा खिलाड़ी बन पाया उसका आधा भी नहीं बन पाता अगर मेरा बल्लेबाजी क्रम ऊपर नहीं किया जाता

Dainik Bhaskar

Oct 20, 2019, 11:05 AM IST

खेल डेस्क. पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली अब बीसीसीआई अध्यक्ष होंगे। सौरव का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उनकी किताब ‘अ सेंचुरी इज नॉट इनफ’ के तीसरे अध्याय का शीर्षक भी ‘महाराज यू आर इन’ ही है। सौरव कैसे हैं, बता रहे हैं उनकी इस किताब के लेखक और करीबी मित्र गौतम भट्‌टाचार्य।

 

1. जिद ऐसी कि...
टीम में वापसी के लिए दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज पहुंचा छोटे से टूर्नामेंट में

बात 2008 की गर्मी के दिनों की है। सौरव उस दिन इडेन गार्डन में प्रैक्टिस के लिए जा रहे थे। अचानक पता चला कि उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया है। जिसे प्लेयर ऑफ द ईयर और हाल ही में बेस्ट एशियाई बैट्समैन का खिताब मिला हो, उसे ड्रॉप होने पर दुख तो होगा। लेकिन वे टूटे नहीं। चयनकर्ताओं को जवाब देने के लिए घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करने की ठानी। उस समय चंडीगढ़ में जेपी अत्रे मेमोरियल कप चल रहा था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18 हजार से ज्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी अपनी वापसी के लिए इस शुरुआती स्तर के टूर्नामेंट में खेलने पहुंचा।

 

2. भरोसा ऐसा कि...
कप्तानी के गुर सिखाने वाली किताब नहीं पढ़ी, व्यावहारिक बात समझी
गांगुली कप्तान बने तो उन्हें माइक ब्रियरली की श्रेष्ठ किताब ‘द आर्ट ऑफ कैप्टेंसी’ गिफ्ट में मिली।  लेकिन गांगुली ने इसे नहीं पढ़ा। उन्होंने कहा कि मैं मीटिंग और किताब के भरोसे कप्तानी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि- ‘मैं सबसे पहले टीम की बॉडी लैंग्वेज बदलना चाहता था। मैं टीम से ड्रॉ खेलने की आदत खत्म करना चाहता था।’ गांगुली ने टीम को स्पष्ट संदेश दिया था कि- अगर तुम सफल नहीं हुए तब भी मैं खड़ा हूं। वीरेंद्र सहवाग से जब टेस्ट में ओपनिंग करवाई तब भी यही कहा कि घबराओ नहीं फेल भी हुए तो टीम में ही रहोगे।

 

3. लगन ऐसी कि...
अचानक ओपनिंग करने को कहा गया, यही सफलता का टर्निंग पॉइंट बना

बात अक्टूबर 1996 की है। टीम जयपुर में थी। कप्तान सचिन ने कमरे में बुलाया। उन्होंने गांगुली से कहा कि तुम्हें ओपनिंग करनी है। गांगुली चिंतित हुए क्योंकि उन्होंने पहले कभी ओपनिंग नहीं की थी और सीरीज में दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया की टीम थी। गांगुली ने खुद को समझाया कि जीवन में अच्छी चीज जो भी होगी वो अचानक ही होगी। बाद में गांगुली ने कहा कि- ‘मैं जैसा खिलाड़ी बन पाया उसका आधा भी नहीं बन पाता अगर मेरा बल्लेबाजी क्रम ऊपर नहीं किया जाता’।


4. समझ ऐसी कि..
सफलता और असफलता के बीच में केवल आपका दिमाग है

वर्ष 1997 था। गांगुली इससे एक साल पहले तक टीम में जगह के लिए संघर्ष कर रहे थे, जबकि अब उन्हें सहारा कप में शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सीरीज मिली थी। उन्हें तोहफे में ओपल एस्ट्रा कार भी मिली। इस संघर्ष पर गांगुली कहते हैं कि- ‘पुराने समय में और आज की सफलता में सिर्फ दिमाग का अंतर है। असली खेल दिमाग से होता है। दबाव को झेलना सीखिए। आप किसी ऐसे हीरो के बारे में नहीं सुना होगा जो घर पर आराम से बैठे, दस घंटे की नींद लेकर दोपहर को दफ्तर जाए।’ गांगुली संघर्ष को ही सफलता की कुंजी मानते हैं।

 

अध्यक्ष बनने के बाद गांगुली की रह सकती हैं ये 5 प्राथमिताएं

  • 2012 के बाद से टीम इंडिया दो से अधिक देशों वाला कोई टूर्नामेंट नहीं जीत सकी है। इसके कारणों को जानना और टीम को तैयार करना।
  • अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को मिलने वाली राशि में भारी अंतर है। इसे कम करना।
  • टीम में अभी जल्दी-जल्दी बदलाव हो रहे हैं। किसी भी स्थापित टीम में इतनी जल्दी बदलाव नहीं होने चाहिए। इस संस्कृति में बदलाव लाना चाहेंगे।
  • कंफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट पर कार्य करेंगे। यानी आईपीएल कोच रहते हुए भी कोई कॉलम लिख पाएगा आदि।
  • टीम में धोनी रहेंगे या नहीं। इस संबंध में स्पष्ट फैसला ले सकते हैं।
  • सिर्फ 10 माह का ही कार्यकाल है इसलिए पहला दिन यानी 23 अक्टूबर से ही फैसला लेना शुरू कर सकते हैं। उनके करीबियों के मुताबिक वे इसे 10 ओवर का खेल मानकर तेजी से काम करेंगे।

 

मैदान पर ड्रिंक्स लेकर नहीं जाते थे, घमंडी हैं
यह सभी बातें गलत है। हां, एक बार सिडनी में ब्रेक के दौरान ड्रिंक्स ले जाने में गांगुली से देर हो गई थी, क्योंकि वो टीवी पर पसंदीदा कमेंट्री सुनने में व्यस्त हो गए थे। प्रशासनिक प्रबंधक रणबीर सिंह महेंद्रा ने द्वारा गांगुली को कारण बताओ नोटिस देना, गांगुली द्वारा सीनियर्स पर रैगिंग की लिखित शिकायत के आरोप झूठे हैं।


लॉर्ड्स के मैदान पर शर्ट लहराते वक्त गाली दी थी?
नहीं। गांगुली ने बताया है कि ‘ये एंड्रयू फ्लिंटॉफ को जवाब देने का तरीका था। इंग्लैंड ने जब मुंबई में सीरीज जीती थी तो फ्लिंटॉफ ने चिढ़ाने के लिए शर्ट उतारी थी। गांगुली बोले कि कई लोगों ने मुझसे पूछा कि आप शर्ट लहराते समय क्या बोल रहे थे, क्या आप उन्हें गाली दे रहे थे। मैंने बताया कि मैं कह रहा था, ‘मेरा भारत महान’।


स्टीव वॉ को सात बार टॉस के लिए इंतजार कराया
गांगुली कहते हैं कि ऐसा 3 बार ही हुआ था। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ कहते हैं कि गांगुली ने ड्रेसिंग रूम में ब्लेजर भूल जाने का बहाना किया। गांगुली कहते हैं कि पहली बार मैं सच में ब्लेजर भूल गया था, लेकिन जब मैंने देखा स्टीव चिढ़ रहा है तो मैंने जानबूझकर उसे चिढ़ाने का फैसला लिया।

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