• Hindi News
  • National
  • Srinagar Terror Attack | Expert Said To Wipe Out Terrorism In Valley Jammu Kashmir Police Played A Key Role

श्रीनगर हमले में शहीदों की संख्या 3 हुई:आतंकियों की 90% खबर रखने वाली पुलिस हमेशा निशाने पर; फिर भी मूवमेंट को प्रोटेक्शन नहीं

श्रीनगरएक महीने पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

सोमवार शाम श्रीनगर के जेवन इलाके में पुलिस की बस पर आतंकी हमला हुआ। इस हमले में दो पुलिसकर्मी मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि एक ने मंगलवार की सुबह दम तोड़ दिया। हमले में 11 जवान घायल हुए हैं।

इस घटना के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि घाटी और खासकर श्रीनगर में इतने सख्त सुरक्षा इंतजामों के बावजूद यह हमला कैसे हो गया। आतंकी कैसे पुलिस बस के करीब पहुंचे, फायरिंग की और भाग खड़े हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिसकर्मियों के पास हथियार के नाम पर बस डंडा था।

दैनिक भास्कर ने इस बारे में जम्मू कश्मीर पुलिस के पूर्व DGP एसपी वेद से बातचीत की। वेद के मुताबिक, राज्य के पुलिसकर्मी आतंकियों के टारगेट पर हैं, क्योंकि इनका रोल ही सबसे अहम होता है। इनके पास आतंकी गतिविधियों से जुड़ी 90% जानकारी होती है। इसके बावजूद पुलिस पार्टी के मूवमेंट को प्रोटेक्शन क्यों नहीं दी गई, ये समझ से परे है। जानिए, पूर्व DGP ने और क्या कहा।

आतंकी हमले की पूरी खबर यहां पढ़ें: कश्मीर में बड़ा आतंकी हमला:श्रीनगर में पुलिस बस पर आतंकवादियों ने फायरिंग की, 2 पुलिसकर्मी शहीद, 12 घायल

प्रोटेक्शन पार्टी साथ क्यों नहीं थी?

आतंकियों ने पुलिस की इसी बस पर हमला किया। यह बुलेट प्रूफ भी नहीं थी।
आतंकियों ने पुलिस की इसी बस पर हमला किया। यह बुलेट प्रूफ भी नहीं थी।

वेद कहते हैं- कश्मीर में जब भी किसी पुलिस पार्टी की मूवमेंट होती है तो एरिया डॉमिनेशन के जरिए इसकी सुरक्षा की तैयारी की जाती है। जहां हमला हुआ है वहां CRPF, BSF, ITBP, JKP के भी कैंप हैं। आमतौर पर यहां पुलिस की भारी तैनाती रहती है। सोमवार को क्या हुआ, ये समझ से परे है, लेकिन यहां यकीनन बड़ी चूक दिखती है। इस तरह के पुलिस पार्टी मूवमेंट में वेपन (हथियार) होना चाहिए, लेकिन खबरें हैं कि ज्यादातर पुलिसकर्मियों के पास हथियार नहीं थे।

आतंकियों ने बस के टायर पर फायरिंग कर उसे पंक्चर किया, फिर बस पर गोलियां बरसाईं।
आतंकियों ने बस के टायर पर फायरिंग कर उसे पंक्चर किया, फिर बस पर गोलियां बरसाईं।

वेद आगे कहते हैं- मूवमेंट के वक्त प्रोटेक्शन पार्टी होनी ही चाहिए। ये वही इलाका है जहां से सिक्योरिटी फोर्सेज की मूवमेंट होती रहती है। हो सकता है कि आतंकियों ने बसों की मूवमेंट पर नजर रखी हो और तैयारी के साथ हमला किया हो। जिस इलाके में हमला हुआ है वो रिहायशी इलाका भी है।

पुलिस क्यों निशाने पर?
वेद के मुताबिक- सर्दियों में आमतौर पर आतंकी गतिविधियां कम हो जाया करती थीं, लेकिन आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद उल्टा हो रहा है। हाल के दिनों में जम्मू कश्मीर पुलिस पर हमले बढ़े हैं। पुलिसकर्मियों के परिवारों को ही आतंकवाद की सबसे ज्यादा कीमत अदा करनी पड़ रही है। पूर्व DGP कहते हैं- अब जबकि पुलिस पर लगातार हमले बढ़ रहे हैं तो पुलिस पार्टी मूवमेंट में ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है।

आतंकी हमले के बाद बस में पुलिस जवानों का खून बिखरा हुआ था।
आतंकी हमले के बाद बस में पुलिस जवानों का खून बिखरा हुआ था।

पाकिस्तान को पता है कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को खत्म करने में सबसे अहम रोल पुलिस का है। इसलिए आतंकी पुलिस को ही निशाना बना रहे हैं। आतंकी गतिविधियों से जुड़ी 90% जानकारी जम्मू पुलिस के पास ही आती है, इसकी वजह ये है कि पुलिसकर्मी ही आम लोगों के बीच ज्यादा रहते हैं।