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स्थाई कमीशन / सुप्रीम कोर्ट के फैसले में 10 महिलाओं के जज्बे का हवाला; काबुल में मेजर मिताली ने आतंकी हमले से जूझ रहे लोगों को बचाया था, अभिनंदन को मिंटी ने गाइड किया था

Stories of women soldiers bravery used in argument over grant permanent commision to women
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Stories of women soldiers bravery used in argument over grant permanent commision to women

  • सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने का फैसला सुनाया, मार्च 2010 में हाईकोर्ट ने भी यही फैसला दिया था
  • कारगिल युद्ध के दौरान वॉर जोन में हेलिकॉप्टर उड़ाने वालीं गुंजन सक्सेना का भी कोर्ट में जिक्र हुआ

दैनिक भास्कर

Feb 17, 2020, 09:16 PM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने का फैसला सुनाया। यह मांग 17 साल से चली आ रही थी। 8 साल तक चली सुनवाई के बाद मार्च 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यह माना था कि महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन मिलना चाहिए। हालांकि, इस फैसले को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। वहां करीब 9 साल तक सुनवाई चली। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने महिलाओं को स्थाई कमीशन नहीं देने के पीछे दलीलें दीं तो सरकार के विरोध में महिला सैनिकों की बहादुरी और जज्बे के किस्से भी सुनाए गए। कोर्ट ने इन 10 महिलाओं की बहादुरी की कहानी सुनी...

मेजर मिताली मधुमिता : सेना मेडल पाने वाली पहली महिला आर्मी अफसर
26 फरवरी 2010 को काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए आतंकी हमले के दौरान मेजर मिताली ने कई लोगों की जान बचाई थी। मिताली इंग्लिश लैंग्वेज के लिए वहां बनी ट्रेनिंग टीम की हेड थीं। जब उन्हें हमले की सूचना मिली तो वे तुरंत घटनास्थल रवाना हुईं। अफगान सुरक्षा बलों ने उन्हें वहां जाने से रोका तो वे गाड़ी छोड़कर पैदल ही आतंकी वारदात वाली जगह पर पहुंच गईं। वहां पहुंचकर उन्होंने घायलों का रेस्क्यू किया और फौरन अस्पताल पहुंचाया। हॉस्पिटल पहुंचाने के बाद वे इन घायलों को भारत वापस भेजने तक उनके साथ डटी रहीं। इस बहादुरी के लिए उन्हें 2011 में सेना मेडल से नवाजा गया। मिताली यह सम्मान पाने वालीं पहली महिला आर्मी अफसर थीं।

मिताली साल 2000 में शार्ट सर्विस कमीशन पर आर्मी में शामिल हुईं। अफगानिस्तान के अलावा जम्मू-कश्मीर और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भी वे तैनात रहीं। उन्होंने रक्षा मंत्रालय से स्थाई कमीशन देने की मांग की, जिसे ठुकरा दिया गया। उन्होंने रक्षा मंत्रालय के इस फैसले को मार्च 2014 में आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में चुनौती भी दी। ट्रिब्यूनल ने उनकी चुनौती को सही पाया और रक्षा मंत्रालय को मेजर मिताली को स्थाई कमीशन देने का आदेश दिया। इस आदेश को रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी रक्षा मंत्रालय की अपील को खारिज कर दिया।

स्क्वॉड्रन लीडर मिंटी अग्रवाल : युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित पहली महिला अफसर
मिंटी अग्रवाल इंडियन एयरफोर्स में फायटर कंट्रोलर हैं। पिछले साल बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जब पाक लड़ाकू विमान भारतीय सीमा में घुसे तो यही वो अफसर थीं, जिनकी बदौलत दुश्मन को बैरंग लौटना पड़ा। मिंटी इस डॉग फाइट में अभिनंदन को गाइड कर रहीं थीं। अभिनंदन ने ही पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया था। मिंटी को इस उपलब्धि के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अगस्त 2019 में युद्ध सेवा मेडल से नवाजा था। मिंटी यह सम्मान पाने वाली पहली महिला हैं।

मिंटी का काम पायलट को दुश्मन विमानों की सटीक लोकेशन मुहैया कराना था ताकि एक तो पायलट खुद को दुश्मन लड़ाकू विमानों से बचा सके और दूसरा सही मौके पर उसे निशाना बना सके। विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान अपने मिग-21 बायसन लड़ाकू विमान से दुश्मन के दो एफ-16 विमानों का पीछा कर रहे थे और मिंटी उन्हें दुश्मन विमानों की सटीक लोकेशन दे रही थीं। इस दौरान एक मौके पर मिंटी ने अभिनंदन से कहा- टारगेट लॉक... हिट...। और अभिनंदन ने मिसाइल दाग दी और पल भर में F-16 जमीन पर गिर पड़ा।

दिव्या अजीत कुमार : स्वॉर्ड ऑफ ऑनर हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी
21 साल की उम्र में दिव्या ने 244 पुरुष और महिला साथियों को पछाड़ कर बेस्ट ऑलराउंड कैडेट का तमगा हासिल किया था। उन्हें स्वार्ड ऑफ ऑनर सम्मान से नवाजा गया था। इस सम्मान को पाने के लिए किसी कैडेट को फील्ड ट्रेनिंग, ड्रिल टेस्ट, ऑब्स्टेकल ट्रेनिंग, स्विमिंग टेस्ट, सर्विस सब्जेक्ट जैसी कई सारी ट्रेनिंग फील्ड्स में अन्य से बेहतर स्कोर करना होता है। भारतीय थल सेना के इतिहास में पहली बार किसी महिला ने यह उपलब्धि हासिल की थी। कैप्टन दिव्या सितंबर 2010 में आर्मी एयर डिफेंस कॉर्प्स में शामिल हुईं। पांच साल बाद 2015 में उन्हें गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना की सभी महिला टुकड़ियों का नेतृत्व करने के लिए भी चुना गया। इसमें 126 महिला अधिकारी और 28 महिला कैडेट शामिल थीं।

गुंजन सक्सेना : शौर्य वीर अवॉर्ड से सम्मानित पहली महिला अफसर
फ्लाइट ऑफिसर गुंजन सक्सेना पहली ऐसी भारतीय महिला थीं, जिन्होंने युद्ध प्रभावित क्षेत्र में उड़ान भरी थी। कारगिल युद्ध के दौरान गुंजन सक्सेना ने दर्जनों उड़ानें भरी थीं और युद्ध प्रभावित क्षेत्र में जरूरी सामान पहुंचाने के साथ-साथ घायल सैनिकों को रेस्क्यू भी किया। गुंजन सक्सेना ने युद्ध क्षेत्र में निडर होकर चीता हेलिकॉप्टर उड़ाया। पाकिस्तानी सैनिक लगातार रॉकेट लॉन्चर और गोलियों से हमला कर रहे थे। गुंजन के एयरक्राफ्ट पर मिसाइल भी दागी गई, लेकिन निशाना चूक गया और गुंजन बाल-बाल बचीं। बिना किसी हथियार के गुंजन ने पाकिस्तानी सैनिकों का मुकाबला किया और कई जवानों को वहां से सुरक्षित निकाला। उनकी इस उपलब्धि पर राष्ट्रपति ने उन्हें शौर्य वीर अवार्ड से सम्मानित भी किया था।

समुद्र के रास्ते दुनिया का चक्कर लगाने वाली 6 नेवी अफसर

नौसेना की 6 जांबाज महिला अफसरों की टीम  10 सितंबर 2017 को समुद्र के रास्ते दुनिया नापने निकलीं। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी की अगुवाई में टीम 55 फीट की बोट आईएनएस तारिणी पर निकली थी। इस टीम ने 194 दिन में 26 हजार समुद्री मील का सफर तय किया। इस दौरान 140 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार वाली हवाओं और 10-10 मीटर ऊंची लहरों ने उनका रास्ता रोका, पर इन अफसरों का हौसला नहीं डिगा। राष्ट्रपति ने इन महिला अफसरों को नौसेना मेडल से सम्मानित किया था।

1) लेफ्टिनेंट कमांडर पायल गुप्ता
2) लेफ्टिनेंट कमांडर पी स्वाति
3) लेफ्टिनेंट कमांडर विजया देवी
4) लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी
5) लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल
6) लेफ्टिनेंट कमांडर ऐश्वर्या बोड्डापटी

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