मंडे पॉजिटिव / विराट ने पिछला शतक राम भंडारी के सुधारे बैट से लगाया, महेश रणसुबे ने धोनी के बैट को राउंड किया



भंडारी ने ही पहली बार हैंडल को ओवल शेप दिया। महेश इंग्लैंड के स्टोक्स का बैट ठीक कर चुके हैं। भंडारी ने ही पहली बार हैंडल को ओवल शेप दिया। महेश इंग्लैंड के स्टोक्स का बैट ठीक कर चुके हैं।
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भंडारी ने ही पहली बार हैंडल को ओवल शेप दिया। महेश इंग्लैंड के स्टोक्स का बैट ठीक कर चुके हैं।भंडारी ने ही पहली बार हैंडल को ओवल शेप दिया। महेश इंग्लैंड के स्टोक्स का बैट ठीक कर चुके हैं।

  • टीम इंडिया के बैट सुधारने वाले दो व्यक्तियों की कहानी, एक मजदूर थे तो दूसरे क्रिकेटर
  • टेनिस एल्बो से जूझ रहे सचिन के 1350 ग्राम के बल्ले को 1250 ग्राम का बनाकर बैट हल्का किया था

Apr 29, 2019, 02:28 AM IST

बेंगलुरू/पुणे . एक छोटी-सी दुकान में 59 साल के राम भंडारी एक बैट काे बारीकी से नाप रहे हैं। यह बैट टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली का है। बीते 7 अप्रैल को विराट ने यह बैट उन्हें सौंपा था। भंडारी कहते हैं, ‘मैंने विराट के बैट को प्रेसिंग कर उस पर पड़े स्पॉट खत्म किए। जब मैंने उन्हें बैट सौंपा तो इसे देखकर विराट बोले कि क्या कोई बैट इतना अच्छा भी बनाया जा सकता है! इसी बैट से उन्होंने पहले 67 रन बनाए और फिर शतक भी जमाया। 

 

मेरे ठीक किए बल्ले से जब रन बनते हैं तो लगता है मैं भी टीम इंडिया का हिस्सा : राम भंडारी

दो दिन पहले शुक्रवार को ही रोहित शर्मा ने भी अपने बैट के हैंडल को ओवल शेप करने के लिए भिजवाया है। इससे बल्ले पर पकड़ मजबूत बनती है। पहली बार मैंने ही हरभजन के लिए इस तरह का हैंडल बनाया था, जिससे उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में शतक बनाया था।’ भंडारी बताते हैं, ‘खिलाड़ी पूछते हैं कितना पैसा हुआ तो मैं कहता हूं जो इच्छा हो दे दीजिए। जब इन बल्लों से खिलाड़ी रन बनाते हैं तो लगता है कि मैं भी टीम का एक हिस्सा हूं।’

 

राम भंडारी को राहुल द्रविड़ के जरिए अन्य क्रिकेटर्स के बैट सुधारने का मौका मिला

वे बताते हैं 2000 के दशक में राहुल द्रविड़ अपने बैट रिपेयर करवाने आते थे। जरूरत पड़ने पर मुझे स्टेडियम ही बुला लेते थे। उनके जरिए ही अन्य खिलाड़ियों से मिला। टेनिस एल्बो से जूझ रहे सचिन तेंदुलकर के 1350 ग्राम के बल्ले को 1250 ग्राम का बनाकर हल्का किया था।

 

राम को नैसर्गिक रूप में मिला बैट सुधारने का हुनर

राम भंडारी अपने हुनर के बारे में बताते हैं, ‘यह मुझे नैसर्गिक रूप से मिला है। बिहार के प. चंपारण जिले के भिखना थोरी गांव का रहने वाला हूं। दादाजी कारपेंटर थे और मैं उनकी मदद करता था। जब 10वीं में फेल हुआ तो घर से भाग निकला। मजदूरी करते हुए बेंगलुरु पहुंचा। दो बेटे हैं। दोनों क्रिकेटर बनना चाहते हैं। बड़ा नरेंद्र क्रिकेट कोचिंग का खर्च पूरे करने के लिए टैक्सी चलाता है।’ 

 

क्रिकेटर बनना चाहते थे महेश, पिता को कारोबार में घाटा हुआ तो छोड़ना पड़ा खेल

पुणे के महेश रणसुबे क्रिकेटर बनना चाहते थे। क्रिकेट खेलने क्लब भी गए, लेकिन पिता को कारोबार में हुए नुकसान के कारण खेल छोड़ना पड़ा। हालांकि, अब धोनी, जाधव, जडेजा और पांडेय इन्हीं के सुधारे गए बल्लों से खेलते हैं। वे टीम इंडिया के खिलाड़ियों के बैट सुधारने के बदले में एक पैसा भी नहीं लेते।

 

महेश ने पहली बार दोस्त के बेटे का बैट सुधरा था

महेश बताते हैं, ‘दोस्त ताहिर का बैट खराब हो गया। मैंने उससे कहा कि इसे मैं सुधारकर देता हूं। सुधरा बैट दोस्त को पसंद आया। उसका प्रदर्शन भी निखरा। फिर मैंने यूट्यूब पर बैट रिपेयरिंग के वीडियो देखने शुरू किए और यही काम करने का फैसला लिया। 2014 में घर से ही बैट रिपेयरिंग शुरू की। पहले राहुल त्रिपाठी, केदार जाधव के बैट सुधारे।

 

महेश से विदेशी क्रिकेटर भी सुधरवाते हैं बल्ले
इन लोगों के जरिए महेंद्र सिंह धोनी, रविंद्र जडेजा, मनीष पांडेय के बैट सुधारने का मौका मिला। अब महाराष्ट्र रणजी टीम के ज्यादातर खिलाड़ियों के बैट सुधरने के लिए मेरे पास ही आते हैं।’ महेश अब तक 600-700 बैट सुधार चुके हैं। इंग्लैंड के जो रूट, बेन स्टोक्स, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ भी इनसे अपने बैट सुधरवा चुके हैं।

 

बैट के हैंडल का सीधी रेखा में होना जरूरी : महेश

अपनी खूबी पर महेश बताते हैं, ‘क्रिकेट खेलने का तजुर्बा सबसे कीमती है। हैंडल किसी भी बैट का सबसे अहम हिस्सा होता है। उसका सीधी रेखा में होना जरूरी है। बैट के ज्यादा घिसने से संतुलन बिगड़ने का भी डर रहता है। ग्रेस निकलने पर बैट की प्रेसिंग जरूरी होती है। मसलन, धोनी के बैट का निचला हिस्सा बार-बार टूटता था। उनके बैट के निचले हिस्से को राउंड शेप करके दिया तो उन्हें अच्छा लगा। वे यॉर्कर अच्छे से खेलने लगे। वे करीब 1250 ग्राम के बल्ले से खेलते हैं।’

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