महाराष्ट्र / सातारा जिले का गांव- मिलिट्री आपशिंगे, यहां हर घर में एक सैनिक; गांव के 1650 से ज्यादा जवान सेनाओं में



story on Village of Satara District of Maharashtra Military Apshinge
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story on Village of Satara District of Maharashtra Military Apshinge

  • पहले विश्वयुद्ध में 46 जवान शहीद होने पर अंग्रेजों ने इस गांव के नाम पर मिलिट्री जोड़ा था
  • गांव का ध्येय वाक्य है- यहां वीर जवान गढ़े जाते हैं, एक परिवार से 23 लोग सेना में

Dainik Bhaskar

Aug 15, 2019, 01:09 AM IST

सातारा (मंगेश फल्ले). महाराष्ट्र के सातारा जिले का गांव है- मिलिट्री आपशिंगे। नाम में ही मिलिट्री होने की वजह है देश की सेवा करने का जज्बा। हर घर से एक जवान सेना में या सीमा सुरक्षा बल में सेवारत है। छत्रपति शिवाजी की सेना से शुरू हुई परंपरा आज भी कायम है। इस गांव से 1,650 से ज्यादा जवानों ने सेना और अन्य सुरक्षा बलों में सेवा की है।

 

देश के लिए कई हो चुके शहीद

ब्रिटिश काल में प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान इसी गांव के 46 जवान शहीद हुए थे। इस वजह से अंग्रेजों ने इस गांव का नाम रखा था मिलिट्री आपशिंगे। द्वितीय विश्वयुद्ध में भी इस गांव के चार लोग शहीद हुए थे। चीन के खिलाफ 1962 के युद्ध में चार और 1965 और 1971 के पाकिस्तान युद्धों में भी एक-एक जवान शहीद हुए थे। वैसे, तो सातारा जिले के कई गांवों से सेना और सुरक्षा बलों में लोग गए हैं। यह जवान मराठा रेजीमेंट, महार रेजीमेंट, इंजीनियर रेजीमेंट, मद्रास रेजीमेंट में कार्यरत है। इसके अलावा नौसेना, वायुसेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों में बड़ी संख्या में जिले के जवान सेवारत हैं।

 

आपशिंगे में सैनिक परंपरा

सेना से कैप्टन पद से रिटायर हुए शंकरराव देशमुख का कहना है कि जिस तरह किसी शिक्षक का बेटा शिक्षक और इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बनता है, उसी तर्ज पर आपशिंगे में सैनिक परंपरा है। गांव में लोगों के पास खेती बहुत कम है। इस वजह से प्रत्येक घर से कम से कम एक लड़का तो सुरक्षा बलों में जाता ही है। कुछ घरों से तो छह-छह लोग सेना में या अन्य सुरक्षा बलों में कार्यरत है।

 

बच्चों को स्कूलों में ही सेना में जाने की ट्रेनिंग दी जाती है

मिलिट्री आपशिंगे गांव में श्री छत्रपति शिवाजी विद्यालय में ही बच्चों को परेड, ड्रिल का अभ्यास कराया जाता है। कक्षा 9 के छात्र सौरभ निकम का कहना है कि गांव का ध्येय वाक्य है- "इथे घडती वीर जवान (यहां वीर जवान गढ़े जाते हैं)।’ 81 साल के रिटायर्ड कैप्टन लक्ष्मण कारंडे की चौथी पीढ़ी भी सेना में हैं। उनका भतीजा विश्वास कारंडे मेजर जनरल पद तक गया। परिवार के 23 लोग अब तक सेना में अपनी सेवा दे रहे हैं। वे कहते हैं कि देश सेवा की जिद हमारे खून हमें है।

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