फैक्ट / पिचाई के पास यूएस आने से पहले निजी कम्प्यूटर नहीं था लेकिन तकनीक की ताकत समझते थे



सुंदर पिचाई। सुंदर पिचाई।
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सुंदर पिचाई।सुंदर पिचाई।

  • गूगल के सीईओ ने एक इंटरव्यू में कहा- परिवार को फोन कनेक्शन के लिए 5 साल इंतजार करना पड़ा था
  • घर में फोन लगा तो पड़ोसी अपने बच्चों को कॉल करने आते थे, उस वक्त जाना कि तकनीक से क्या संभव है

Dainik Bhaskar

Jun 18, 2019, 11:57 AM IST

कैलिफोर्निया. गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई चेन्नई में पले-बढ़े हैं। अमेरिका आने से पहले उनके पास अपना कम्प्यूटर नहीं था। परिवार को टेलीफोन कनेक्शन के लिए 5 साल इंतजार करना पड़ा था। पिचाई ने एक इंटरव्यू में ये बातें कहीं। उन्होंने बताया- उन दिनों फोन बहुत कम थे। कम्प्यूटर और इंटरनेट की तो बात ही छोड़ दीजिए। घर में फोन लगा तो पड़ोसी अपने बच्चों को कॉल करने के लिए आते थे। वह सामुदायिक कनेक्शन हो गया था, लेकिन इन्हीं बातों से मुझे तकनीक की ताकत पता चली।

गूगल का सीईओ बनना लाइफटाइम अपॉर्च्यूनिटी: पिचाई

  1. पिचाई ने बताया- गूगल के को-फाउंडर लैरी पेज और सर्गे ब्रिन ने सीईओ की जिम्मेदारी के बारे में बात की तो मैं चौंक गया था। मैं प्रोडक्ट बनाने में व्यस्त था और बिल्कुल नहीं सोचता था कि यह सिलसिला कितना आगे जाएगा। गूगल का सीईओ बनने को पिचाई लाइफटाइम अपॉर्च्यूनिटी बताते हैं।

  2. पिचाई ने कहा- मैं अभी भी सोचता हूं कि अमेरिका अवसरों का देश है। इस बात को सही साबित करने के लिए हमें कड़ी मेहनत की जरूरत है। इसमें बड़ी भूमिका यह होगी कि अप्रवासी लोग सफलता हासिल करें। पिचाई ने अमेरिकी संसद से ऐसे लोगों के संरक्षण की मांग की है जो यूएस आकर कामयाब होने का सपना देखते हैं। वे हुनरमंद लोगों के इमिग्रेशन का समर्थन भी कर चुके हैं।

  3. पिचाई के मुताबिक- आप टेक इंडस्ट्री को देखिए, वहां कई बड़ी कंपनियों की स्थापना अप्रवासियों ने की है। तकनीक में हमारी लीडरशिप सबसे अच्छे कंप्यूटर साइंटिस्ट और रिसर्चर को आकर्षित करने की योग्यता से आती है। मुझे लगता है कि इसे जारी रखना अहम बात है।

  4. पिचाई को बीते कुछ सालों में प्राइवेसी और लिंगभेद जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। गूगल के खिलाफ अमेरिका में एंट्रीट्रस्ट की जांच भी हो सकती है। पिचाई का कहना है कि सीईओ को अपनी कंपनी का चीफ एथिक्स ऑफिसर भी होना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कौनसी तकनीक समाज पर कैसा असर डालेगी। मैं इसे अपनी मूलभूत जिम्मेदारी समझता हूं, लेकिन संस्थान के बाकी स्तरों पर भी नैतिकता होनी चाहिए।

  5. पिचाई ने 1993 में आईआईटी खड़गपुर से बीटेक किया। उसी साल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिल गई। पिचाई ने वहां से इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली और यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया। 2004 में गूगल जॉइन करने से पहले सॉफ्टवेयर कंपनी एप्लाइड मैटेरियल्स और मैनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म मैकेंजी में काम किया था। गूगल में प्रोडक्ट चीफ और हेड ऑफ एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे पदों पर रहने के बाद 2015 में उन्हें सीईओ बनाया गया।

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